गुजरात: में इबोला वायरस को लेकर फैली चिंता के बीच बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। कांगो से आए एक 37 वर्षीय व्यवसायी की इबोला जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है। इसके बाद राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली है। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराने की जरूरत नहीं है।
दरअसल, हाल ही में कांगो से भारत आए अमुरी लोकुला नाम के व्यवसायी को इबोला संक्रमण की आशंका के चलते निगरानी में रखा गया था। स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात के तौर पर उन्हें और उनके संपर्क में आए तीन अन्य लोगों को क्वारंटाइन किया था। अब सभी की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद प्रशासन ने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताया है।
कांगो से भारत आने के बाद बढ़ी थी चिंता
जानकारी के अनुसार, अमुरी लोकुला पहले मुंबई पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने सिलवासा, दमन और गुजरात के वडोदरा की यात्रा की थी। कांगो में इबोला संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारतीय स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई थीं।
जैसे ही स्वास्थ्य विभाग को यात्री के कांगो से आने की जानकारी मिली, तुरंत मेडिकल प्रोटोकॉल लागू किए गए। व्यवसायी को मेडिकल निगरानी में रखा गया और उनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए।
स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से की अपील
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि सभी जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई हैं और फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा,
“लोग अफवाहें फैलाने से बचें। स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है और हर आवश्यक कदम उठाया गया है।”
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार किसी भी संभावित स्वास्थ्य खतरे से निपटने के लिए तैयार है और एयरपोर्ट से लेकर अस्पतालों तक निगरानी बढ़ा दी गई है।
WHO की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
हालांकि गुजरात में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अफ्रीकी देश कांगो में इबोला के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, कांगो सरकार ने बताया है कि अब तक 1,077 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 246 लोगों की मौत हो चुकी है।
लैब टेस्ट में 121 संक्रमणों की पुष्टि हुई है, जिनमें 17 लोगों की मौत हो गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का मानना है कि वास्तविक आंकड़े इससे कहीं ज्यादा हो सकते हैं क्योंकि कई इलाकों में मामलों की रिपोर्टिंग नहीं हो पा रही है।
क्या होता है इबोला वायरस?
इबोला वायरस एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ या संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से फैलती है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त और अंदरूनी रक्तस्राव शामिल हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक समय रहते इलाज और आइसोलेशन से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। यही वजह है कि भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की स्क्रीनिंग और निगरानी पर विशेष ध्यान दे रही है।
एयरपोर्ट और अस्पतालों में अलर्ट
इबोला के खतरे को देखते हुए गुजरात सहित कई राज्यों में एयरपोर्ट्स पर मेडिकल स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है। विदेश से आने वाले यात्रियों की विशेष जांच की जा रही है। अस्पतालों को भी किसी भी संदिग्ध मामले से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि फिलहाल गुजरात में इबोला का कोई सक्रिय मामला नहीं है। लेकिन सावधानी के तौर-तरीकों का पालन जारी रहेगा।
अफवाहों से बचने की सलाह
सोशल मीडिया पर इबोला को लेकर कई तरह की अफवाहें फैलने लगी थीं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग को स्पष्टीकरण देना पड़ा। अधिकारियों ने कहा कि गलत सूचनाएं लोगों में डर और भ्रम पैदा करती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वायरल बीमारी को लेकर घबराने के बजाय सही जानकारी पर भरोसा करना जरूरी है। सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।