छत्तीसगढ़: की राजनीति में धार्मिक गुरुओं और नेताओं को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य और बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर तीखा हमला बोलते हुए नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। बघेल के बयान के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है और भाजपा-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
दरअसल, भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कटाक्ष भरे अंदाज में कहा कि अगर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री “पर्ची” देखकर लोगों की समस्याओं का समाधान बता सकते हैं, तो उन्हें पेट्रोल-डीजल के दाम भी कम करवाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य अपने शिष्य धीरेंद्र शास्त्री को निर्देश दें कि देश में बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों का समाधान भी निकालें।
“मोदी ट्रंप के सामने क्यों झुकते हैं?” — बघेल
भूपेश बघेल ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर रामभद्राचार्य इतने ज्ञानी और दिव्य दृष्टि वाले हैं, तो वे यह भी बताएं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने इतना क्यों झुकते हैं।
उन्होंने भाजपा पर धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि देश के असली मुद्दों — महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं — से ध्यान हटाने के लिए धार्मिक चेहरों का सहारा लिया जा रहा है।

किरण रिजिजू को लेकर भी उठाया सवाल
बघेल ने केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि रामभद्राचार्य खुद को गौभक्त और रामभक्त बताते हैं, लेकिन वे यह क्यों नहीं बताते कि भाजपा सरकार में ऐसे लोग मंत्री हैं जिन पर गौमांस खाने के आरोप लगते रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि क्या रामभद्राचार्य इस पर अपनी राय देंगे या सिर्फ राजनीतिक मंचों से भाजपा के समर्थन में ही बोलेंगे।
आरएसएस और मोहन भागवत पर तंज
अपने बयान में भूपेश बघेल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके प्रमुख मोहन भागवत को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि आज आरएसएस खुद को हिंदू धर्म का सबसे बड़ा ठेकेदार मानने लगा है।
बघेल ने कहा कि जब रामभद्राचार्य खुद यह कहते हैं कि कई संतों को संस्कृत का ज्ञान नहीं है, तो फिर मोहन भागवत को धर्म का प्रतिनिधि कैसे माना जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “मोहन भागवत ने आज तक सार्वजनिक मंच से संस्कृत का कोई श्लोक नहीं बोला, फिर भी उन्हें धर्मगुरु की तरह पेश किया जाता है।”
राम मंदिर कार्यक्रम को लेकर भी टिप्पणी
भूपेश बघेल ने अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि रामभद्राचार्य जैसे बड़े संत को उस कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया, जबकि मोहन भागवत वहां मौजूद थे। उन्होंने इसे भाजपा की राजनीतिक प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए सवाल उठाया।
चरणदास महंत ने भी साधा था निशाना
इस विवाद की शुरुआत छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत के बयान से हुई थी। महंत ने कहा था कि वे रामभद्राचार्य को “जगद्गुरु” नहीं मानते और उनकी कथा में शामिल नहीं होंगे।
उन्होंने आरोप लगाया था कि रामभद्राचार्य अपने प्रवचनों में भाजपा का प्रचार करते हैं और धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। महंत ने यहां तक कह दिया था कि “ऐसे बाबा लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं।”
महंत ने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर भी निशाना साधते हुए उन्हें “फर्जी बाबा” बताया था।
भाजपा का पलटवार तय
भूपेश बघेल और कांग्रेस नेताओं के इन बयानों के बाद भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना है। भाजपा पहले भी कांग्रेस पर हिंदू संतों और धार्मिक आस्थाओं का अपमान करने का आरोप लगाती रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में आगामी चुनावों को देखते हुए धर्म और राजनीति का यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।
छत्तीसगढ़ में धार्मिक गुरुओं को लेकर शुरू हुई बयानबाजी अब बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुकी है। भूपेश बघेल के तीखे तंज और कांग्रेस नेताओं के बयानों ने भाजपा को भी जवाबी हमला करने का मौका दे दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और ज्यादा गर्मा सकता है।