नई दिल्ली: बैंकिंग की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल अब सिर्फ ग्राहक सेवा या चैटबॉट तक सीमित नहीं रह गया है। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने बैंकिंग के कई अहम कामों में AI को शामिल करना शुरू कर दिया है। बैंक के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में AI की मदद से करीब ₹1 लाख करोड़ के MSME कर्ज को मंजूरी दी गई।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि बैंक ₹10 हजार तक के चेक की प्रोसेसिंग को भी AI की मदद से स्वचालित कर रहा है। इसका मतलब है कि छोटी रकम वाले कई चेकों को प्रोसेस करने के लिए पहले की तरह हर चरण में कर्मचारी के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं रह गई है।
₹1 लाख करोड़ के MSME कर्ज में AI की भूमिका
SBI के प्रबंध निदेशक रामा मोहन राव अमारा ने वार्षिक FIBAC कार्यक्रम में बैंक की AI रणनीति के बारे में जानकारी दी। उनके अनुसार, 12 महीनों की अवधि में AI आधारित प्रक्रियाओं की मदद से करीब ₹1 लाख करोड़ के MSME कर्ज को मंजूरी दी गई।
इन कर्जों की सीमा प्रत्येक ग्राहक के लिए पांच करोड़ रुपये तक थी। इस प्रक्रिया में नए और मौजूदा दोनों तरह के ग्राहक शामिल रहे।
AI आधारित प्रणाली का इस्तेमाल कर्ज से जुड़े आंकड़ों को समझने, शुरुआती विश्लेषण करने और जोखिम का आकलन करने जैसे कार्यों में किया जा रहा है। इससे बैंक कर्मचारियों को डेटा जुटाने और शुरुआती स्तर के विश्लेषण में लगने वाला समय बचाने में मदद मिल रही है।

अब ₹10 हजार तक के चेक की प्रोसेसिंग कैसे होगी?
SBI के मुताबिक बैंक ₹10 हजार तक के चेकों की प्रोसेसिंग को Straight-Through Processing यानी STP सिस्टम के जरिए स्वचालित कर रहा है।
इस प्रक्रिया में AI मॉडल चेक से जरूरी जानकारी पढ़ सकता है और अनिवार्य विवरण तथा अनुपालन से जुड़ी आवश्यकताओं की जांच कर सकता है।
बैंक के कुल चेक वॉल्यूम में ₹10 हजार तक के चेकों की हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी बताई गई है। ऐसे में इस प्रक्रिया को स्वचालित करने से कर्मचारियों पर पड़ने वाला काम का बोझ कम हो सकता है और चेक प्रोसेसिंग की गति बढ़ सकती है।
क्या चेक क्लियरिंग में इंसान की जरूरत खत्म हो गई?
यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। SBI ने छोटी रकम वाले चेकों की प्रोसेसिंग को बड़े पैमाने पर स्वचालित जरूर किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक ने मानवीय निगरानी पूरी तरह खत्म कर दी है।
बैंक ने एक कंट्रोल मैकेनिज्म भी रखा है। इसके तहत एक समर्पित कंट्रोल रिस्क यूनिट AI सिस्टम द्वारा प्रोसेस किए गए चेकों के कुछ नमूनों की समीक्षा करती है।
इस समीक्षा का मकसद यह पता लगाना है कि AI मॉडल ने कहीं गलती तो नहीं की। साथ ही इससे यह भी समझने में मदद मिलती है कि मॉडल को आगे और प्रशिक्षण या सुधार की जरूरत है या नहीं।
यानी बैंकिंग प्रक्रिया में AI तेजी से काम कर रहा है, लेकिन उसके ऊपर निगरानी का एक सुरक्षा तंत्र भी मौजूद है।
कर्ज देने में भी AI की बढ़ती भूमिका
SBI में AI का इस्तेमाल केवल चेक प्रोसेसिंग तक सीमित नहीं है। बैंक ग्राहक के पूरे लाइफसाइकिल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ा रहा है।
इसमें लोन अंडरराइटिंग, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट और फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
AI बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करके बैंक को संभावित जोखिमों की पहचान करने में मदद कर सकता है। इससे कर्ज देने की प्रक्रिया को ज्यादा डेटा-आधारित बनाने की कोशिश की जा रही है।
फ्रॉड रोकने के लिए भी AI का इस्तेमाल
डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ साइबर फ्रॉड और वित्तीय धोखाधड़ी का जोखिम भी बढ़ा है। ऐसे में SBI AI आधारित प्रणालियों का इस्तेमाल धोखाधड़ी के जोखिम को पहचानने के लिए भी कर रहा है।
बैंक AI आधारित Early Warning Signals का इस्तेमाल कर रहा है। इनका उद्देश्य किसी खाते या पोर्टफोलियो में समस्या गंभीर होने से पहले संभावित जोखिम के संकेतों को पहचानना है।
इसके लिए क्षेत्र विशेष की जानकारी, बाजार से जुड़े संकेत और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अन्य सूचनाओं का विश्लेषण किया जा सकता है।
कर्मचारियों और ग्राहकों दोनों को फायदा
SBI के मुताबिक AI अपनाने से बैंक को कई स्तरों पर लाभ मिल रहा है। सबसे बड़ा फायदा कर्मचारियों के समय की बचत के रूप में सामने आ रहा है।
पहले कर्मचारियों और रिलेशनशिप मैनेजरों को डेटा जुटाने तथा शुरुआती विश्लेषण में काफी समय लगाना पड़ता था। AI आधारित सिस्टम इन कामों को तेजी से करने में मदद कर रहा है।
इससे कर्मचारी अपना समय अधिक महत्वपूर्ण और ग्राहक-केंद्रित कार्यों में लगा सकते हैं। बैंक के मुताबिक इससे ग्राहक संतुष्टि और कार्यक्षमता में सुधार देखने को मिल रहा है।
क्या AI से बैंकिंग पूरी तरह बदल जाएगी?
SBI का AI प्रयोग इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में बैंकिंग सेवाओं में तकनीक की भूमिका और बढ़ सकती है। चेक प्रोसेसिंग से लेकर कर्ज मंजूरी, जोखिम प्रबंधन और ग्राहक सेवा तक AI धीरे-धीरे बैंकिंग सिस्टम के अलग-अलग हिस्सों में शामिल हो रहा है।
हालांकि, AI से होने वाली बचत और लागत में कमी का वास्तविक वित्तीय प्रभाव मापने में अभी समय लगेगा। बैंक के अधिकारियों के अनुसार लागत-से-आय अनुपात पर इसका पूरा प्रभाव भविष्य में स्पष्ट होगा।
फिलहाल AI का सबसे बड़ा फायदा तेज प्रोसेसिंग, कर्मचारियों के समय की बचत, बेहतर डेटा विश्लेषण और जोखिम की शुरुआती पहचान के रूप में सामने आ रहा है।
बैंकिंग का भविष्य AI के हाथ में?
SBI जैसे बड़े बैंक का इतने बड़े स्तर पर AI को अपनाना भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में बड़े बदलाव का संकेत माना जा सकता है। अगर AI सिस्टम लगातार बेहतर होते हैं और उनके साथ मजबूत मानवीय निगरानी बनी रहती है, तो भविष्य में बैंकिंग सेवाएं पहले से तेज, डेटा आधारित और अधिक स्वचालित हो सकती हैं।
हालांकि वित्तीय क्षेत्र में AI के इस्तेमाल के साथ डेटा सुरक्षा, मॉडल की सटीकता, साइबर सुरक्षा और मानवीय निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण रहेगी।

