नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देशभर में तिरंगे के साथ देशभक्ति के गीतों की गूंज सुनाई देती है। कुछ गीत ऐसे हैं, जो दशकों गुजर जाने के बाद भी लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए हैं। हिंदी सिनेमा के इतिहास में भी कई ऐसे देशभक्ति गीत रहे हैं, जिन्होंने पर्दे पर देशप्रेम की भावना को मजबूती से पेश किया। इन्हीं में एक नाम ‘वतन की राह में’ का भी लिया जाता है।
यह गीत साल 1948 में रिलीज हुई फिल्म ‘शहीद’ से जुड़ा है। फिल्म में दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार नजर आए थे। आजादी के ठीक बाद रिलीज हुई इस फिल्म और इसके गीत ने उस दौर के दर्शकों के बीच देशप्रेम की भावना को एक अलग अंदाज में सामने रखा।
दिलीप कुमार पर फिल्माया गया था यादगार गीत
फिल्म ‘शहीद’ को दिलीप कुमार के शुरुआती दौर की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म की कहानी और इसके गीत-संगीत ने दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। इसी फिल्म का गीत ‘वतन की राह में’ देशभक्ति के जज्बे से जुड़ा यादगार गीत बन गया।
इस गीत की खास बात यह थी कि यह ऐसे समय सामने आया, जब देश को आजादी मिले अभी ज्यादा वक्त नहीं बीता था। ऐसे दौर में देश और मातृभूमि से जुड़े भावनात्मक गीतों का लोगों पर गहरा असर पड़ता था।
मोहम्मद रफी की आवाज ने बढ़ाया असर
‘वतन की राह में’ को महान गायक मोहम्मद रफी की आवाज मिली। उनके साथ खान मस्ताना ने भी इस गीत को अपनी आवाज दी। रफी की आवाज में देशप्रेम से जुड़ी भावनाओं की गहराई ने गीत को और प्रभावशाली बना दिया।
गीत के संगीत की जिम्मेदारी मशहूर संगीतकार गुलाम हैदर ने संभाली थी, जबकि इसके बोल गीतकार राजा मेंहदी अली खान ने लिखे थे। इस तरह अभिनय, आवाज, संगीत और गीतकार की प्रतिभा ने मिलकर इस रचना को यादगार बना दिया।
आजादी के बाद देशभक्ति गीतों का नया दौर
1947 में भारत की आजादी के बाद देश में एक नए दौर की शुरुआत हुई थी। फिल्मों में भी देश, समाज और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों को जगह मिलने लगी। ‘शहीद’ जैसी फिल्मों ने उस दौर की भावनाओं को पर्दे पर प्रस्तुत करने में भूमिका निभाई।
‘वतन की राह में’ जैसे गीतों ने दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ देश के प्रति भावनात्मक जुड़ाव का अहसास भी कराया। यही वजह है कि आजादी के दशकों बाद भी ऐसे गीत स्वतंत्रता दिवस के आसपास चर्चा में आ जाते हैं।
‘शहीद’ की सफलता में गीतों की भी अहम भूमिका
दिलीप कुमार स्टारर ‘शहीद’ को 1948 की चर्चित फिल्मों में शामिल किया जाता है। फिल्म को दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली और इसके गीतों ने भी लोकप्रियता हासिल की।
उस समय फिल्मी गीत सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक और भावनात्मक संदेशों को भी लोगों तक पहुंचाने का जरिया बनते थे। ‘वतन की राह में’ ने इसी भूमिका को मजबूती से निभाया।
78 साल बाद भी क्यों याद है यह गीत?
किसी गीत का दशकों तक याद रहना उसकी लोकप्रियता के साथ-साथ उसके भाव और प्रस्तुति की ताकत को भी दिखाता है। ‘वतन की राह में’ आजादी के बाद के उस दौर की याद दिलाता है, जब देश नई शुरुआत कर रहा था।
दिलीप कुमार का अभिनय, मोहम्मद रफी की आवाज, गुलाम हैदर का संगीत और राजा मेंहदी अली खान के बोल—इन सभी का मेल इस गीत को हिंदी सिनेमा के देशभक्ति संगीत की यादगार विरासत में जगह देता है।
स्वतंत्रता दिवस पर जब देशभर में देशभक्ति के गीत गूंजते हैं, तब पुराने दौर के ऐसे गीत भी नई पीढ़ी को हिंदी सिनेमा और आजादी के बाद के भारत के सांस्कृतिक इतिहास से जोड़ते हैं।

