अहमदाबाद/अजमेर। कल्पना कीजिए कि जिसकी मासिक आमदनी महज 15 हजार रुपये हो, उसके नाम पर अचानक करीब 975 करोड़ रुपये की टैक्स देनदारी सामने आ जाए। अजमेर के एक 62 वर्षीय दर्जी रेखराज ठाडा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। सूरत आयकर विभाग से मिले नोटिस ने उनके परिवार को हैरान कर दिया। मामला सामने आने के बाद आधार और पैन कार्ड के कथित दुरुपयोग से जुड़े बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े का संदेह सामने आया है।
रेखराज ठाडा राजस्थान के अजमेर जिले के गोविंदगढ़ क्षेत्र में रहते हैं और सिलाई का काम करके परिवार का गुजारा करते हैं। परिवार के मुताबिक उनकी मासिक आय करीब 15 हजार रुपये है। ऐसे में उनके नाम पर करोड़ों नहीं बल्कि करीब ₹975 करोड़ की टैक्स देनदारी सामने आने से पूरा परिवार सकते में आ गया।
अचानक आया करोड़ों का टैक्स नोटिस
बताया गया है कि 13 अगस्त 2026 को रेखराज ठाडा को सूरत आयकर विभाग की ओर से नोटिस मिला। इसमें उनके नाम पर ₹9,74,97,25,457 की कथित टैक्स देनदारी बताई गई।
नोटिस में उन्हें सूरत स्थित ‘रूप रजत डायमंड प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी का डायरेक्टर बताया गया। दर्जी के परिवार के लिए सबसे बड़ा सवाल यही था कि जब रेखराज ने कभी ऐसी कंपनी में काम ही नहीं किया और उनकी आय भी बेहद सीमित है, तो इतनी बड़ी रकम का टैक्स उनके नाम पर कैसे आ गया?

जांच में सामने आई दूसरी डायमंड कंपनी
नोटिस मिलने के बाद परिवार ने मामले की जानकारी जुटाने के लिए एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद ली। सरकारी रिकॉर्ड की जांच के दौरान कथित तौर पर सामने आया कि रेखराज का नाम एक दूसरी कंपनी ‘जय बाबेरी डायमंड प्राइवेट लिमिटेड’ के डायरेक्टर के तौर पर भी दर्ज है।
इस जानकारी के सामने आने के बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई। रेखराज के मुताबिक उन्होंने कभी गुजरात जाकर इन कंपनियों से जुड़ी कोई प्रक्रिया पूरी नहीं की और न ही उन्हें इन कंपनियों के संचालन की जानकारी थी।
आधार और पैन के कथित दुरुपयोग का आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि किसी अज्ञात व्यक्ति या गिरोह ने रेखराज के आधार कार्ड और पैन कार्ड से जुड़ी जानकारी का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया।
परिवार का दावा है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कागजों पर कंपनियां बनाई गईं और उनके नाम का इस्तेमाल कथित तौर पर बड़े वित्तीय लेनदेन के लिए किया गया।
हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता और कंपनियों के जरिए हुए कथित लेनदेन की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। परिवार ने मामले में पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
कंपनी के पते पर डायमंड कारोबार नहीं मिला
मामले की जांच के दौरान कंपनियों के बताए गए रजिस्टर्ड पते को लेकर भी सवाल खड़े हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस पते पर कथित डायमंड कंपनियां रजिस्टर्ड थीं, वहां कोई डायमंड कारोबार नहीं मिला।
बताया गया कि उस स्थान पर दीपकभाई हसमुखभाई क्लेटवाला का परिवार रहता है और वहां वर्ष 1997 से एक मैकेनिकल वर्कशॉप संचालित हो रही है।
मकान मालिक के अनुसार उन्हें भी हाल में इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी रकम और डायमंड कंपनियों से संबंधित जानकारी सामने आने पर वे खुद भी हैरान हैं।
दर्जी का दावा—पूरी जिंदगी गुजरात नहीं गया
रेखराज ठाडा के मामले में सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि वह कथित तौर पर पूरी जिंदगी गुजरात नहीं गए। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उनका नाम सूरत की कंपनियों से जुड़ा हुआ सामने आया।
यही वजह है कि परिवार को आशंका है कि उनकी पहचान और दस्तावेजों का इस्तेमाल किसी संगठित वित्तीय धोखाधड़ी में किया गया हो सकता है।
पुलिस में शिकायत, अब जांच का इंतजार
मामला सामने आने के बाद पीड़ित परिवार ने कथित वित्तीय धोखाधड़ी और दस्तावेजों के दुरुपयोग को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना अहम होगा कि कंपनियां वास्तव में किसने बनाई थीं, रेखराज के दस्तावेजों का इस्तेमाल किस तरह हुआ, कंपनियों के बैंक खातों से कितना लेनदेन हुआ और इस पूरे मामले के पीछे कौन लोग हैं।
साथ ही यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि आयकर रिकॉर्ड में रेखराज को कंपनी का डायरेक्टर किस आधार पर दर्ज किया गया और उनके नाम पर इतनी बड़ी कथित टैक्स देनदारी कैसे बनी।
आम लोगों के लिए भी बड़ा सबक
यह मामला केवल एक दर्जी को मिले भारी-भरकम टैक्स नोटिस तक सीमित नहीं है। अगर दस्तावेजों के दुरुपयोग की बात जांच में सही साबित होती है, तो यह आम लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण चेतावनी है।
लोगों को अपने पैन, आधार और अन्य वित्तीय दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर सतर्क रहना चाहिए। समय-समय पर यह जांच करना भी जरूरी है कि उनके नाम पर कोई कंपनी, बैंक खाता या वित्तीय गतिविधि तो दर्ज नहीं है।

