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    Home»देश»इटावा के 1,484 स्कूलों में पहुंचेगा प्रशासन! बच्चे सीधे अफसरों को बताएंगे अपनी परेशानी, 167 अधिकारी करेंगे ‘रियलिटी चेक’
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    इटावा के 1,484 स्कूलों में पहुंचेगा प्रशासन! बच्चे सीधे अफसरों को बताएंगे अपनी परेशानी, 167 अधिकारी करेंगे ‘रियलिटी चेक’

    Chandra JyotiBy Chandra JyotiAugust 24, 2026No Comments5 Mins Read
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    इटावा: जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की समस्याएं अब सिर्फ कागजों और शिकायतों तक सीमित नहीं रहेंगी। 25 अगस्त से 1 सितंबर तक इटावा के 1,484 परिषदीय विद्यालयों में विशेष सोशल ऑडिट अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत जिला और ब्लॉक स्तर के 167 अधिकारी खुद स्कूलों में पहुंचेंगे और बच्चों से सीधे बातचीत कर वहां उपलब्ध सुविधाओं की वास्तविक स्थिति जानेंगे।

    इस अभियान का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं की जमीनी हकीकत सामने लाना है। खास बात यह होगी कि अधिकारी केवल दस्तावेज या रजिस्टर देखकर वापस नहीं लौटेंगे, बल्कि स्कूल में मौजूद बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों से भी समस्याओं की जानकारी लेंगे।

    बच्चों से सीधे पूछेंगे अधिकारी- क्या परेशानी है?

    अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे सीधे अधिकारियों के सामने अपनी बात रख सकेंगे। यदि किसी विद्यालय में बिजली की समस्या है, पानी उपलब्ध नहीं है, शौचालय खराब है या स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते में परेशानी है, तो इसकी जानकारी मौके पर ली जाएगी।

    इसके अलावा बच्चों से पढ़ाई और विद्यालय के माहौल को लेकर भी जानकारी ली जा सकती है। इससे प्रशासन को यह समझने में मदद मिलेगी कि सरकारी योजनाओं के तहत उपलब्ध कराई गई सुविधाएं वास्तव में विद्यार्थियों तक पहुंच रही हैं या नहीं।

    1,484 स्कूलों की होगी पड़ताल

    इटावा जिले में कुल 1,484 परिषदीय विद्यालय इस सोशल ऑडिट अभियान के दायरे में हैं। इन विद्यालयों में कुल 95,932 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं।

    इतने बड़े स्तर पर होने वाला यह अभियान जिले के सरकारी स्कूलों की स्थिति का व्यापक आकलन करने का अवसर देगा। इसके लिए 167 अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है।

    अधिकारियों को विद्यालयवार जिम्मेदारी दी गई है और विभाग की ओर से विद्यालय आवंटन की सूची भी तैयार की गई है।

    बिजली-पानी से लेकर पढ़ाई तक होगी जांच

    सोशल ऑडिट के दौरान अधिकारियों का ध्यान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रहेगा। इनमें स्कूल में बिजली की उपलब्धता, पेयजल व्यवस्था, शौचालय की स्थिति और विद्यालय तक पहुंचने वाली सड़क प्रमुख हैं।

    इसके अलावा पठन-पाठन की स्थिति और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी जानकारी ली जाएगी।

    इसका उद्देश्य केवल कमियां गिनना नहीं, बल्कि उन समस्याओं को सामने लाना है जिनका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और स्कूल में उनके अनुभव पर पड़ता है।

    कागजों से बाहर निकलेगी स्कूलों की असली तस्वीर

    अक्सर सरकारी योजनाओं और स्कूलों से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी निरीक्षण रिपोर्ट या रिकॉर्ड के आधार पर सामने आती है। लेकिन सोशल ऑडिट में मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति जानने की कोशिश की जाएगी।

    उदाहरण के तौर पर किसी स्कूल के रिकॉर्ड में शौचालय उपलब्ध बताया गया हो, लेकिन वह इस्तेमाल के योग्य न हो। इसी तरह कागजों में पानी की व्यवस्था दर्ज हो सकती है, लेकिन बच्चों को वास्तव में पर्याप्त पेयजल न मिल रहा हो।

    ऐसी स्थिति में बच्चों और शिक्षकों से बातचीत करके वास्तविक समस्या सामने आ सकती है।

    शिक्षक और अभिभावक भी रख सकेंगे अपनी बात

    अभियान के दौरान केवल बच्चों से ही नहीं, बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों से भी विद्यालय की समस्याओं के बारे में जानकारी लेने की व्यवस्था है।

    अभिभावक स्कूल की व्यवस्थाओं, बच्चों की पढ़ाई और अन्य समस्याओं के बारे में अधिकारियों को अपनी बात बता सकेंगे। वहीं शिक्षक रोजाना सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं की जानकारी प्रशासन को दे सकते हैं।

    इससे स्कूल की स्थिति का अधिक व्यापक आकलन किए जाने की उम्मीद है।

    Google Sheet पर दर्ज होगी पूरी रिपोर्ट

    सोशल ऑडिट के बाद अधिकारियों को प्रत्येक विद्यालय की जांच रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इसके लिए रिपोर्ट को Google Sheet पर दर्ज किया जाएगा।

    इसके माध्यम से विद्यालयवार जानकारी को व्यवस्थित तरीके से संकलित किया जा सकेगा। बाद में इसी रिपोर्ट के आधार पर शासन को जिले के सरकारी स्कूलों की स्थिति की जानकारी भेजी जाएगी।

    इस व्यवस्था का उद्देश्य निरीक्षण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और रिकॉर्ड आधारित बनाना है।

    जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी

    जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने इस संबंध में आदेश जारी कर अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी हैं। विभाग की ओर से जारी विद्यालय आवंटन सूची में संबंधित अधिकारियों के लिए स्कूल निर्धारित किए गए हैं।

    अधिकारियों को निर्धारित अवधि में अपने आवंटित विद्यालयों का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी जुटानी होगी।

    बच्चों की आवाज को प्राथमिकता देने की कोशिश

    सरकारी स्कूलों में बिजली, स्वच्छ पेयजल, साफ शौचालय, सुरक्षित रास्ता और बेहतर पढ़ाई जैसी सुविधाएं बच्चों की बुनियादी जरूरत हैं। इन सुविधाओं की कमी का सीधा असर उनकी पढ़ाई और स्कूल में उपस्थिति पर पड़ सकता है।

    ऐसे में सोशल ऑडिट अभियान का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें बच्चों को अपनी बात सीधे प्रशासन तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

    यदि किसी विद्यालय में कोई गंभीर कमी सामने आती है तो उसे रिपोर्ट में दर्ज किया जा सकता है और संबंधित विभाग के सामने सुधार के लिए रखा जा सकता है।

    अभियान की प्रमुख जानकारी

    बिंदु जानकारी
    कुल परिषदीय विद्यालय 1,484
    कुल नामांकित छात्र 95,932
    जांच के लिए अधिकारी 167
    अभियान की अवधि 25 अगस्त से 1 सितंबर
    मुख्य जांच बिंदु बिजली, पानी, शौचालय, सड़क, पढ़ाई व अन्य सुविधाएं
    रिपोर्टिंग Google Sheet के माध्यम से

    इटावा में 25 अगस्त से शुरू होने वाला सोशल ऑडिट अभियान सरकारी स्कूलों की सुविधाओं की वास्तविक स्थिति सामने लाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। 1,484 विद्यालयों और करीब 95 हजार नामांकित छात्रों से जुड़े इस अभियान में 167 अधिकारी सीधे स्कूलों में पहुंचेंगे। बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों से बातचीत के जरिए समस्याओं की जानकारी ली जाएगी और रिपोर्ट शासन तक पहुंचाई जाएगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस जमीनी जांच में कितने स्कूलों की कमियां सामने आती हैं और उन पर प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।

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