देश: की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने दावा किया है कि हर साल NEET परीक्षा की तैयारी और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर छात्रों और उनके परिवारों से लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च कराए जाते हैं। उन्होंने इस राशि की तुलना केंद्र सरकार के वार्षिक शिक्षा बजट से करते हुए कहा कि यह रकम लगभग पूरे शिक्षा बजट के बराबर है।
प्रियंका गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब देशभर में NEET-UG 2026 री-एग्जाम को लेकर चर्चाएं जारी हैं और लाखों छात्र दोबारा परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए हैं। उनके बयान ने शिक्षा व्यवस्था, कोचिंग उद्योग और प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते आर्थिक बोझ पर नई बहस छेड़ दी है।
राहुल गांधी के कोटा दौरे के बाद आया बयान
प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया कांग्रेस नेता राहुल गांधी के राजस्थान के कोटा दौरे के बाद सामने आई। राहुल गांधी ने “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम के दौरान छात्रों से बातचीत की थी। इस कार्यक्रम में उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ रहे आर्थिक और मानसिक दबाव को प्रमुख मुद्दा बताया।
राहुल गांधी ने कहा था कि देश की पांच प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं—NEET, JEE, SSC, UPSC और RRB—की तैयारी में छात्र और उनके परिवार हर वर्ष लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं। उनका आरोप था कि शिक्षा प्रणाली युवाओं पर अत्यधिक दबाव डाल रही है और इसे बदलने की आवश्यकता है।
प्रियंका गांधी ने क्या कहा?
प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि केवल NEET परीक्षा की तैयारी में ही लगभग 22 लाख छात्र और उनके परिवार बड़ी आर्थिक कीमत चुका रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में होने वाला कुल खर्च 1.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है।
उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि एक ओर छात्रों और परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर बड़े उद्योगपतियों के लाखों करोड़ रुपये के ऋण माफ किए जा रहे हैं। प्रियंका ने दावा किया कि सरकार ने अपने पसंदीदा कारोबारियों के लगभग 16 लाख करोड़ रुपये के ऋण माफ किए हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ती बहस
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग उद्योग का आकार लगातार बढ़ रहा है। बड़े शहरों में कोचिंग, हॉस्टल, अध्ययन सामग्री और अन्य खर्चों के कारण परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ता है।
कोटा, हैदराबाद, दिल्ली और पटना जैसे शिक्षा केंद्रों में लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए बड़ी बचत खर्च कर देते हैं। यही कारण है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की लागत और शिक्षा के व्यावसायीकरण का मुद्दा लगातार चर्चा में बना रहता है।
NEET री-एग्जाम को लेकर NTA का बड़ा फैसला
इसी बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने NEET-UG 2026 री-एग्जाम के एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की प्रक्रिया में राहत दी है। पहले बैंक खाता सत्यापन पूरा किए बिना एडमिट कार्ड डाउनलोड नहीं किया जा सकता था, लेकिन अब छात्रों को यह सुविधा दे दी गई है कि वे पहले एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं और बाद में बैंक सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
NTA ने स्पष्ट किया है कि बैंक विवरण बाद में अपडेट करने वाले छात्र भी परीक्षा शुल्क रिफंड के पात्र बने रहेंगे। इस फैसले से हजारों छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है।
21 जून को होगा री-एग्जाम
NEET-UG 2026 का री-एग्जाम 21 जून को आयोजित किया जाएगा। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक चलेगी। NTA ने परीक्षा अवधि को 180 मिनट से बढ़ाकर 195 मिनट कर दिया है। साथ ही छात्रों को अतिरिक्त रफ वर्क शीट भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
सरकार और NTA का दावा है कि इस बार परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना न रहे।
छात्रों और अभिभावकों की नजरें परीक्षा पर
देशभर के लाखों छात्र अब री-एग्जाम पर फोकस कर रहे हैं। वहीं राजनीतिक दल शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और कोचिंग उद्योग के बढ़ते प्रभाव को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।