मेरठ: सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर निलंबित की गई मेरठ की दरोगा अनु ने अब अपना पक्ष सामने रखा है। वीडियो जारी कर उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर सफाई दी और कहा कि सोशल मीडिया पर उनके फोटो और वीडियो का उनकी अनुमति के बिना इस्तेमाल कर कंटेंट बनाया गया, जिसका उनके करियर पर गंभीर असर पड़ा है।
अनु का कहना है कि जिस फ्रॉक को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए गए, उसे उन्होंने अपनी मां के साथ आगरा से खरीदा था। उनका दावा है कि उनके कपड़ों से उनके परिवार को कोई आपत्ति नहीं है, ऐसे में दूसरे लोगों को इस पर सवाल उठाने का अधिकार क्यों है।
उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं और यदि उनके खिलाफ आर्थिक सहायता लेने या अन्य किसी तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनके बैंक खातों और परिवार के खातों की जांच कराई जा सकती है।
वायरल वीडियो के बाद हुआ था निलंबन
अनु वर्ष 2023 बैच की दरोगा हैं और मूल रूप से प्रयागराज की रहने वाली बताई गई हैं। वह सोशल मीडिया पर जिम और वर्कआउट से जुड़े वीडियो पोस्ट करती रही हैं।
एक वीडियो वायरल होने के बाद उनकी सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर विवाद खड़ा हुआ। इसके बाद पुलिस विभाग ने सोशल मीडिया नीति के उल्लंघन के आरोप में उन्हें निलंबित कर दिया।
बताया गया कि एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने पुलिस की गरिमा का हवाला देते हुए वीडियो को शेयर किया था। वायरल वीडियो में अनु फ्रॉक पहने दिखाई दे रही थीं और वीडियो में एक QR कोड भी नजर आ रहा था।
इसी QR कोड को लेकर यह दावा किया गया कि इसका इस्तेमाल आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए किया जा रहा था।
QR कोड को लेकर अनु ने दी सफाई
अनु ने अब इस दावे को गलत बताया है। उनका कहना है कि वीडियो में दिखाई देने वाला QR कोड उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से संबंधित था।
उनके मुताबिक, वह सोशल मीडिया अकाउंट अपने भोजन और स्वास्थ्य से जुड़े कंटेंट के लिए इस्तेमाल करती थीं। उन्होंने आर्थिक सहायता लेने के आरोपों से भी इनकार किया।
अनु ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अमित किल्होर को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्हें आर्थिक सहायता मिलने का दावा किया जा रहा है तो उनके और उनके परिवार के बैंक खातों की जांच कराई जाए।
हालांकि, QR कोड वास्तव में किस अकाउंट से जुड़ा था और उससे कोई आर्थिक लेन-देन हुआ या नहीं, यह आधिकारिक जांच का विषय है।

‘फ्रॉक मां के साथ खरीदी थी’
अपने नए वीडियो में अनु ने उसी फ्रॉक को लेकर भी सफाई दी, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर विवाद हुआ था।
उन्होंने कहा कि यह फ्रॉक उन्होंने अपनी मां के साथ आगरा जाकर खरीदी थी। उनके मुताबिक, उनके परिवार में इस तरह के कपड़े पहनना सामान्य बात है और उनके परिवार को उनके पहनावे से कोई परेशानी नहीं है।
अनु ने सवाल उठाया कि जब उनके परिवार को उनके कपड़ों से कोई आपत्ति नहीं है तो दूसरे लोगों को इससे परेशानी क्यों होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति को उनके सोशल मीडिया कंटेंट से कोई आपत्ति थी तो विभाग में शिकायत की जानी चाहिए थी, न कि उनकी तस्वीरों और वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर अलग तरह की सामग्री तैयार की जानी चाहिए थी।
‘पांच दिन से कमरे में बंद हूं’
अनु ने अपने वीडियो में यह भी दावा किया कि वह पिछले पांच दिनों से कमरे में बंद हैं और उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
उन्होंने खुद को पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने वाली छात्रा बताते हुए कहा कि वह स्कूल और कॉलेज में अव्वल रही हैं और सरकारी नौकरी हासिल की है।
अनु का कहना है कि उन्होंने पुलिस की वर्दी में ऐसा कोई वीडियो नहीं बनाया, जिससे विभाग की गरिमा को ठेस पहुंचे। उनके मुताबिक, सोशल मीडिया पर निजी जीवन से जुड़े वीडियो और वर्दी में आधिकारिक गतिविधि के बीच अंतर किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वह विभागीय जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
‘मैं चुप हूं, इसका मतलब गलत नहीं’
अनु ने अपने बयान में कहा कि उनके बारे में सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें कही जा रही हैं और उनके लिए हर व्यक्ति को अलग-अलग जवाब देना संभव नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ बनाए गए कुछ कंटेंट में उनकी तस्वीरों का कथित तौर पर बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया। उनका कहना है कि इससे उनकी प्रतिष्ठा और भविष्य प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा कि वह चुप हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह गलत हैं।
वरिष्ठ इंस्पेक्टर से मुलाकात का भी जिक्र
अनु ने बताया कि वह पुलिस कार्यालय गई थीं, जहां उनकी मुलाकात एक वरिष्ठ इंस्पेक्टर से हुई। उनके मुताबिक, इंस्पेक्टर ने उनसे कहा कि उन्होंने विभाग को बदनाम कर दिया है।
अनु ने इस बात पर भी नाराजगी जताई और कहा कि उनके बारे में गलत तरीके से धारणा बनाई जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि किसी ने संबंधित इंस्पेक्टर का AI से बनाया गया वीडियो भी वायरल किया था।
हालांकि, इस संबंध में सामने आए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
पूरे विवाद में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सोशल मीडिया नीति का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ और वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले कंटेंट की वास्तविक प्रकृति क्या थी।
अनु ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए जांच के लिए तैयार रहने की बात कही है। दूसरी ओर, विभागीय कार्रवाई के पीछे क्या आधार रहे, इसकी पूरी जानकारी आधिकारिक जांच और दस्तावेज सामने आने के बाद स्पष्ट होगी।
सोशल मीडिया के दौर में पुलिसकर्मियों के निजी कंटेंट, विभागीय आचार संहिता और सोशल मीडिया नीति के बीच संतुलन का सवाल भी इस मामले के साथ चर्चा में आ गया है।

