मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले से सामने आए एक बेहद दर्दनाक हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। गरोठ तहसील के पीपलखेड़ा गांव में करीब दो साल पहले चार मासूम बच्चों की मौत के मामले में उनकी मां सुगनाबाई को अदालत ने दोषी ठहराया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश गरोठ निरंजन कुमार पांचाल की अदालत ने महिला को चार अलग-अलग मामलों में चार बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने प्रत्येक मामले में 2,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सुनाया गया। मामले में मृत बच्चों में नौ वर्षीय बंटी, सात वर्षीय अनुष्का, चार वर्षीय मुस्कान और दो वर्षीय कार्तिक शामिल थे।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 14 जुलाई 2024 का है। पुलिस के मुताबिक, पीपलखेड़ा गांव में सुगनाबाई अपने चार बच्चों के साथ रहती थी। परिवार में लंबे समय से घरेलू विवाद और कथित प्रताड़ना की स्थिति बनी हुई थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि सुगनाबाई का विवाह करीब 17 वर्ष पहले रोड सिंह से हुआ था। आरोपों के मुताबिक, पति शराब का सेवन करता था और आए दिन महिला तथा बच्चों के साथ मारपीट करता था।
वारदात से एक रात पहले भी परिवार में विवाद हुआ था। तेज बारिश के बीच महिला और बच्चों को घर से बाहर जाने की स्थिति बनी और बाद में उन्हें आंगनबाड़ी केंद्र में रात गुजारनी पड़ी। जांच में पुलिस ने लगातार घरेलू तनाव को इस मामले की अहम पृष्ठभूमि के तौर पर दर्ज किया।
सुबह उठाया ऐसा कदम कि पूरा गांव दहल गया
पुलिस के अनुसार, अगले दिन सुबह सुगनाबाई ने अपने भाई को फोन कर बताया कि वे सभी मरने जा रहे हैं। इसके बाद वह चारों बच्चों को लेकर खेत की ओर गई, जहां एक कुआं था।
आरोप के मुताबिक, महिला ने एक-एक करके चारों बच्चों को कुएं में धकेल दिया और इसके बाद खुद भी कुएं में छलांग लगा दी।
घटना के बाद आसपास मौजूद ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई। लोगों ने महिला को कुएं से बाहर निकाल लिया और उसकी जान बच गई, लेकिन चारों बच्चों को नहीं बचाया जा सका।
घटना की सूचना मिलते ही गरोठ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने महिला के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई और बाद में न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।

अदालत ने चारों बच्चों की मौत को अलग-अलग अपराध माना
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने विभिन्न साक्ष्य और परिस्थितियां प्रस्तुत कीं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने सुगनाबाई को चारों बच्चों की हत्या के मामलों में दोषी माना।
अदालत ने प्रत्येक बच्चे की मृत्यु के लिए अलग-अलग आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा हर मामले में 2,000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
इस तरह अदालत का फैसला कुल चार अलग-अलग आजीवन कारावास की सजा के रूप में सामने आया। फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
घरेलू प्रताड़ना का पहलू भी जांच में आया सामने
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू कथित घरेलू हिंसा और पारिवारिक प्रताड़ना भी है। पुलिस जांच के मुताबिक, सुगनाबाई अपने पति के व्यवहार से परेशान थी। वारदात से पहले की रात हुए विवाद और घर से बाहर रहने की घटना को भी जांच का हिस्सा बनाया गया।
हालांकि, घरेलू विवाद या प्रताड़ना किसी भी परिस्थिति में बच्चों की हत्या को उचित नहीं ठहरा सकती। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर महिला को चारों बच्चों की मौत के लिए दोषी माना है।
मामले में सुगनाबाई के पति रोड सिंह के खिलाफ भी घरेलू हिंसा और आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित कार्रवाई की गई थी। उसकी सुनवाई अलग से चल रही है।
फैसले के बाद फिर उठे कई सवाल
अदालत के इस फैसले ने उस घटना की भयावहता को फिर सामने ला दिया, जिसने 2024 में पूरे इलाके को झकझोर दिया था। चार मासूम बच्चों की मौत के बाद गांव में लंबे समय तक इस घटना को लेकर चर्चा होती रही।
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि परिवार के भीतर चल रहे विवाद, घरेलू हिंसा और मानसिक दबाव जैसे गंभीर मुद्दों को भी सामने लाता है। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की ओर से ऐसे मामलों में समय रहते सहायता और हस्तक्षेप की जरूरत पर अक्सर जोर दिया जाता है।
फिलहाल गरोठ अदालत के फैसले के बाद सुगनाबाई को चार मामलों में चार बार आजीवन कारावास की सजा मिली है। वहीं पति के खिलाफ चल रही अलग कानूनी कार्रवाई का परिणाम आने वाले समय में सामने आएगा।

