नई दिल्ली। देश में बाइक टैक्सी सेवा को लेकर एक बड़ा बदलाव आने की संभावना ने चर्चा तेज कर दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सभी राज्य सरकारों से बाइक टैक्सी सेवाओं को अनुमति देने की अपील की है। अगर राज्य सरकारें इस दिशा में आगे बढ़ती हैं, तो शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी कम लागत वाले यात्री परिवहन का एक नया विकल्प मजबूत हो सकता है।
गडकरी ने यह बात ‘सुरक्षा’ नामक पायलट कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान कही। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हाईवे निर्माण, खनन और अन्य हाई-रिस्क क्षेत्रों में काम करने वाले ड्राइवरों तथा कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर ध्यान देना है। इसके तहत मौके पर मुफ्त मेडिकल जांच और काउंसलिंग की सुविधा देने की योजना है।
हालांकि, बाइक टैक्सी को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे पूरे देश में एक साथ लागू किया जा चुका नियम नहीं समझा जाना चाहिए। परिवहन से जुड़े कई पहलू राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और अंतिम अनुमति संबंधित राज्य सरकारों की नीतियों पर निर्भर कर सकती है।
बाइक टैक्सी को लेकर राज्यों से गडकरी की अपील
गडकरी के मुताबिक, केंद्र की ओर से निजी दोपहिया वाहनों यानी स्कूटर और मोटरसाइकिल को यात्री परिवहन में इस्तेमाल करने की अनुमति का रास्ता साफ किया गया है, लेकिन कुछ राज्यों में अभी भी बाइक टैक्सी सेवाओं को अनुमति नहीं मिली है।
केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से इस सेवा को मंजूरी देने पर विचार करने की अपील की। उनका तर्क है कि बाइक टैक्सी विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे शहरों में लोगों के लिए आजीविका का जरिया बन सकती है।
गडकरी ने इससे बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होने की संभावना भी जताई है। उनके मुताबिक, बाइक टैक्सी व्यवस्था को व्यापक रूप से लागू किए जाने से करीब आठ करोड़ लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
अगर ऐसा होता है तो इसका असर केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन मालिक अतिरिक्त आय के लिए यात्री परिवहन से जुड़ सकते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी मिल सकता है फायदा
बाइक टैक्सी का सबसे बड़ा फायदा उन इलाकों में हो सकता है जहां सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता सीमित है। छोटी दूरी के सफर में मोटरसाइकिल या स्कूटर आधारित टैक्सी सेवा लोगों को तेज और अपेक्षाकृत सुविधाजनक विकल्प दे सकती है।
हालांकि, इसके साथ सुरक्षा, ड्राइवरों की ट्रेनिंग, यात्री बीमा, परमिट, किराया व्यवस्था और स्थानीय नियमों जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण होंगे। इसलिए अलग-अलग राज्यों में इसकी शर्तें और संचालन व्यवस्था अलग हो सकती है।
अब ट्रैफिक नियम तोड़ना पड़ सकता है भारी
बाइक टैक्सी के साथ-साथ नितिन गडकरी ने सड़क सुरक्षा को लेकर भी एक अहम प्रस्ताव का संकेत दिया है। उन्होंने मोटर वाहन अधिनियम में बदलाव के जरिए नेगेटिव पॉइंट सिस्टम लाने की बात कही।
इस प्रस्ताव के तहत वाहन चालकों द्वारा किए जाने वाले ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर अंक काटे जा सकते हैं। यानी किसी चालक के रिकॉर्ड में नियम तोड़ने के आधार पर नेगेटिव पॉइंट जुड़ते जाएंगे।
अगर कोई चालक बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है और उसके पॉइंट एक निर्धारित सीमा तक पहुंच जाते हैं, तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
Habitual Offenders पर होगी खास नजर
गडकरी ने बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों को लेकर भी चिंता जताई। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे habitual offenders पर लगाम लगाना है, जो लगातार नियम तोड़ते हैं।
फिलहाल इसे तत्काल लागू हो चुका नियम नहीं माना जाना चाहिए। इसके लिए संबंधित कानूनी और नियामकीय प्रक्रिया पूरी होना जरूरी होगा। लेकिन अगर ऐसा सिस्टम लागू होता है तो ड्राइवर के ट्रैफिक रिकॉर्ड का महत्व काफी बढ़ जाएगा।
एक ही तरह की गलती बार-बार करने वाले चालक पर कार्रवाई का खतरा बढ़ सकता है। इससे उम्मीद है कि वाहन चालक हेलमेट, स्पीड लिमिट, सिग्नल और अन्य सड़क सुरक्षा नियमों को लेकर ज्यादा सतर्क होंगे।
ड्राइवर की सेहत पर भी गडकरी का जोर
‘सुरक्षा’ पायलट कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने ड्राइवरों के स्वास्थ्य को सड़क सुरक्षा से सीधे जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि वाहन चालक की सेहत अच्छी होना सुरक्षित ड्राइविंग के लिए बेहद जरूरी है।
विशेष रूप से आंखों की जांच और काम की प्रकृति से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई। हाईवे निर्माण और खनन जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है।
पायलट कार्यक्रम महाराष्ट्र के नागपुर-काम्पटी क्षेत्र के NH-44 और चंद्रपुर की माइनिंग बेल्ट में लगभग 150 किलोमीटर के क्षेत्र में लागू किया जाएगा। इसमें करीब 10 हजार लोगों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
रोजगार और सड़क सुरक्षा—दोनों पर फोकस
गडकरी की घोषणाओं में एक तरफ बाइक टैक्सी के जरिए रोजगार और परिवहन विकल्प बढ़ाने पर जोर दिखाई देता है, तो दूसरी तरफ नेगेटिव पॉइंट सिस्टम के जरिए सड़क सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश की बात सामने आई है।
अब असली नजर राज्य सरकारों के रुख और प्रस्तावित ट्रैफिक पॉइंट सिस्टम की आगे की प्रक्रिया पर रहेगी। यदि राज्यों ने बाइक टैक्सी सेवाओं को व्यापक मंजूरी दी और नियम उल्लंघन पर पॉइंट आधारित कार्रवाई लागू हुई, तो आने वाले समय में देश के परिवहन और सड़क सुरक्षा सिस्टम में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

