सात मौतों के बाद बड़ा एक्शन, PG मालिक हरि ओम बंसल गिरफ्तार
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत ढहने के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। हादसे के बाद से फरार चल रहे इमारत के मालिक हरि ओम बंसल को पुलिस ने राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी की पुष्टि विशेष पुलिस आयुक्त नीरज ठाकुर ने की है।
इमारत गिरने के इस हादसे में अब तक सात लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद से ही पुलिस की कई टीमें आरोपी मालिक की तलाश में जुटी थीं। पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया था। दिल्ली के साथ-साथ आसपास के राज्यों में भी संभावित ठिकानों पर तलाश की जा रही थी।
आखिरकार पुलिस टीम को हरि ओम बंसल के राजस्थान के भिवाड़ी में होने की जानकारी मिली और उसे वहां से गिरफ्तार कर लिया गया।
रविवार दोपहर अचानक भरभराकर गिरी थी पांच मंजिला इमारत
सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे पांच मंजिला PG इमारत अचानक ढह गई थी। इमारत में बड़ी संख्या में छात्र और अन्य लोग रह रहे थे।
इमारत के अचानक गिरने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई। सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल और बचाव दल मौके पर पहुंचे और बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
काफी मशक्कत के बाद मलबे से लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राहत और बचाव अभियान के बावजूद मृतकों की संख्या बढ़कर सात तक पहुंच गई।
निर्माण और बेसमेंट के काम पर उठे सवाल
हादसे के बाद जांच में सबसे बड़ा सवाल इमारत की संरचना और वहां चल रहे निर्माण कार्य को लेकर सामने आया है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, जिस इमारत में PG संचालित हो रहा था, वहां पिछले कुछ समय से मरम्मत और निर्माण से जुड़े काम किए जा रहे थे। खास तौर पर बेसमेंट में काम होने की बात सामने आई है।
बताया गया है कि हादसे के समय इलाके में भारी बारिश हुई थी और बेसमेंट में पानी जमा हो गया था। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि पानी और निर्माण गतिविधियों का इमारत की संरचना पर कितना प्रभाव पड़ा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी शुरुआती तौर पर बेसमेंट में पानी भरने से ढांचे पर असर पड़ने की संभावना का उल्लेख किया था। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

क्या इमारत में अतिरिक्त निर्माण किया गया था?
हादसे के बाद जांच का दायरा केवल मालिक की भूमिका तक सीमित नहीं है। अधिकारी यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि इमारत में किए गए निर्माण और बदलावों के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं।
इसके अलावा अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण और भवन सुरक्षा नियमों के संभावित उल्लंघन की भी जांच की जा रही है।
यही वजह है कि पुलिस और संबंधित एजेंसियां इमारत के निर्माण रिकॉर्ड, अनुमति, संरचनात्मक स्थिति और PG संचालन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर सकती हैं।
हादसे के बाद दर्ज हुई थी FIR
इमारत ढहने के बाद पुलिस ने मालिक हरि ओम बंसल समेत अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इसके बाद से ही पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
पुलिस की कई टीमों को संभावित ठिकानों पर लगाया गया। दिल्ली के अलावा हरियाणा और राजस्थान में भी उसकी तलाश की गई। उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
अब भिवाड़ी से गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे हादसे से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब जानने की कोशिश करेगी।
सत्य निकेतन में क्यों है इतने PG और हॉस्टल?
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक होने के कारण लंबे समय से छात्रों के बीच लोकप्रिय इलाका रहा है। यहां बड़ी संख्या में PG, निजी हॉस्टल, किराये के मकान, दुकानें और खाने-पीने के प्रतिष्ठान संचालित होते हैं।
छात्रों की बढ़ती संख्या के साथ कई आवासीय इमारतों का इस्तेमाल भी बदला है। कई जगह सामान्य मकानों को PG या हॉस्टल में परिवर्तित किया गया है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद अब इस पूरे इलाके में संचालित PG और बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
चार मंजिल से ज्यादा वाली इमारतों पर भी नजर
हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई शुरू हो गई है। MCD ने चार मंजिल से अधिक की ऐसी इमारतों को सील करने के निर्देश दिए हैं, जहां अवैध निर्माण पाया जा रहा है।
अब सवाल सिर्फ एक इमारत के गिरने का नहीं है, बल्कि यह भी है कि राजधानी के उन इलाकों में भवन नियमों और सुरक्षा मानकों की निगरानी कितनी प्रभावी है, जहां बड़ी संख्या में छात्र और किरायेदार रहते हैं।
मालिक की गिरफ्तारी के बाद आगे क्या?
हरि ओम बंसल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अब और महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि इमारत में किस तरह का निर्माण चल रहा था, उसकी अनुमति थी या नहीं, बेसमेंट की स्थिति क्या थी और हादसे से पहले भवन की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर कोई चेतावनी या शिकायत सामने आई थी या नहीं।
साथ ही हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और घायलों से जुड़े तथ्यों की भी जांच जारी रहेगी।

