नई दिल्ली। Apple के अगले बड़े iPhone लॉन्च से पहले टेक्नोलॉजी की दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा सिर्फ नए फीचर्स और डिजाइन को लेकर नहीं है। इस बार एक और सवाल बेहद महत्वपूर्ण है—आखिर Apple की नजर भारत पर इतनी ज्यादा क्यों टिक गई है?
पिछले कुछ वर्षों में भारत Apple के लिए केवल एक बड़ा स्मार्टफोन बाजार नहीं रहा। देश तेजी से कंपनी के ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। उत्पादन में तेजी, बढ़ते निर्यात और भारतीय बाजार में रिकॉर्ड बिक्री ने Apple की रणनीति में भारत की भूमिका को और मजबूत किया है।
iPhone 18 सीरीज के लॉन्च से पहले सामने आए आंकड़े इसी बदलाव की ओर इशारा करते हैं।
चीन के बाद भारत क्यों बना Apple का बड़ा दांव?
लंबे समय तक Apple की मैन्युफैक्चरिंग व्यवस्था का बड़ा हिस्सा चीन पर निर्भर रहा। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान सप्लाई चेन में आई बाधाओं और अमेरिका-चीन व्यापार तनाव ने कंपनियों को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया।
इसी दौर में Apple ने अपनी ‘China Plus One’ रणनीति को आगे बढ़ाया। इसका उद्देश्य चीन पर अत्यधिक निर्भरता को कम करते हुए दूसरे देशों में भी उत्पादन क्षमता विकसित करना था।
भारत इस रणनीति का बड़ा लाभार्थी बनकर सामने आया।
भारत में अपेक्षाकृत प्रतिस्पर्धी श्रम लागत, विशाल बाजार और सरकार की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने Apple और उसके सप्लायर्स के लिए यहां निवेश को आकर्षक बनाया।
भारत में 5.5 करोड़ iPhone असेंबल होने का दावा
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में भारत में लगभग 5.5 करोड़ iPhone असेंबल किए गए। यह कंपनी के वैश्विक उत्पादन का करीब एक चौथाई हिस्सा बताया जा रहा है।
अगर पिछले साल से तुलना करें तो तस्वीर और भी दिलचस्प हो जाती है। 2024 में भारत में करीब 3.6 करोड़ iPhone असेंबल किए जाने का आंकड़ा दिया गया था। यानी एक साल में उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई।
यह बदलाव बताता है कि भारत अब केवल शुरुआती स्तर की असेंबली तक सीमित नहीं है, बल्कि Apple के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन का केंद्र बन रहा है।
2026 में और बढ़ सकती है हिस्सेदारी
Apple की भारत में बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का असर आने वाले समय में और दिखाई दे सकता है। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक 2026 के अंत तक वैश्विक स्तर पर बिकने वाले iPhone में भारत में निर्मित फोन की हिस्सेदारी करीब 28 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो वैश्विक iPhone सप्लाई चेन में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।

एक्सपोर्ट में भी भारत ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारत में iPhone उत्पादन बढ़ने के साथ निर्यात में भी तेजी आई है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत से iPhone का निर्यात 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।
यह आंकड़ा भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए भी महत्वपूर्ण है। iPhone अब देश से निर्यात होने वाले प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में शामिल हो चुका है।
Tata और Foxconn की बढ़ती भूमिका
भारत में Apple की मैन्युफैक्चरिंग कहानी में दो नाम सबसे महत्वपूर्ण हैं—Foxconn और Tata Electronics।
Foxconn लंबे समय से Apple की ग्लोबल सप्लाई चेन का बड़ा पार्टनर रहा है और भारत में भी बड़े पैमाने पर iPhone असेंबल कर रहा है।
वहीं Tata Electronics ने भी Apple के मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क में अपनी मौजूदगी तेजी से बढ़ाई है। Wistron के भारतीय ऑपरेशन को अपने नियंत्रण में लेने और होसुर में क्षमता बढ़ाने के बाद Tata Electronics की भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
इससे भारत में Apple के लिए एक मजबूत स्थानीय सप्लाई नेटवर्क तैयार होने की संभावना बढ़ी है।
भारत में Apple की बिक्री भी तेजी से बढ़ी
भारत सिर्फ उत्पादन के मामले में ही Apple के लिए महत्वपूर्ण नहीं हो रहा है। कंपनी का घरेलू कारोबार भी लगातार बढ़ रहा है।
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में समाप्त वित्तीय वर्ष में भारत में Apple की बिक्री पहली बार 10 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गई। 2023 में यह कारोबार करीब 6 अरब डॉलर बताया गया था।
यानी कुछ ही वर्षों में भारतीय बाजार से Apple की कमाई में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार ने बदली तस्वीर
भारत में स्मार्टफोन बाजार भी तेजी से बदल रहा है। प्रीमियम फोन खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है। खास तौर पर 30 हजार रुपये से ऊपर के स्मार्टफोन सेगमेंट में मांग बढ़ी है।
नो-कॉस्ट EMI, एक्सचेंज ऑफर और आसान फाइनेंसिंग विकल्पों ने महंगे स्मार्टफोन को पहले की तुलना में ज्यादा ग्राहकों की पहुंच में ला दिया है।
इसका सीधा फायदा Apple को मिलता है, क्योंकि iPhone भारतीय प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार के सबसे प्रमुख ब्रांडों में शामिल है।
iPhone 18 के लिए क्यों खास है भारत?
iPhone 18 के आने के साथ भारत की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर Apple भारत में उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ाता है तो आने वाले समय में यहां निर्मित iPhone का इस्तेमाल सिर्फ घरेलू बाजार के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के दूसरे बड़े बाजारों के लिए भी किया जा सकता है।
यही वह बदलाव है जो Apple की रणनीति को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
कभी चीन कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग का सबसे बड़ा आधार था। अब Apple अपनी सप्लाई चेन को ज्यादा विविध बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और भारत इस बदलाव का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है।
Apple के लिए भारत अब सिर्फ बाजार नहीं
भारत में बढ़ता उत्पादन, रिकॉर्ड एक्सपोर्ट और बढ़ती बिक्री एक साथ देखें तो तस्वीर काफी स्पष्ट दिखाई देती है। Apple के लिए भारत अब केवल वह देश नहीं है जहां iPhone बेचे जाते हैं।
भारत अब मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट और बिक्री—तीनों मोर्चों पर कंपनी के लिए महत्वपूर्ण बाजार बन रहा है।
आने वाले वर्षों में अगर Apple भारत में अपने उत्पादन और रिटेल नेटवर्क का विस्तार जारी रखता है, तो इसका असर देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम, रोजगार और सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है।

