बेंगलुरु। देश के जाने-माने वैज्ञानिक और भारत रत्न से सम्मानित प्रोफेसर सीएनआर राव से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कर्नाटक में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।
SIR के दौरान वोटर लिस्ट में उनके नाम की स्पेलिंग में अंतर पाया गया। इसी अंतर के आधार पर प्रोफेसर सीएनआर राव को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है। खास बात यह है कि जिस अंतर की वजह से नोटिस भेजा गया, वह उनके नाम में सिर्फ एक अतिरिक्त ‘F’ जुड़ने से संबंधित है।
वोटर लिस्ट में कैसे बदला नाम?
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2002 की मतदाता सूची में वैज्ञानिक का नाम “Prof C N R Rao” दर्ज है।
वहीं मौजूदा मतदाता सूची में उनका नाम “Proff C N R Rao” लिखा हुआ है। यानी पुराने रिकॉर्ड में “Prof” है, जबकि मौजूदा रिकॉर्ड में “Proff” दर्ज है।
नाम की इसी स्पेलिंग में अंतर को SIR प्रक्रिया के दौरान Self Name Mismatch के तौर पर देखा गया।
यही मामूली नजर आने वाला अंतर अब सुनवाई की वजह बन गया है।
क्या है ‘Self Name Mismatch’?
SIR प्रक्रिया में पुराने मतदाता रिकॉर्ड और मौजूदा मतदाता सूची के बीच जानकारी का मिलान किया जा रहा है।
Self Name Mismatch ऐसी स्थिति को कहा जाता है, जब पुराने रिकॉर्ड में दर्ज मतदाता के नाम और मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज नाम के बीच अंतर पाया जाता है।
यानी व्यक्ति वही है, लेकिन पुराने और नए रिकॉर्ड में उसके नाम की स्पेलिंग अलग है। ऐसी स्थिति में संबंधित मतदाता को अपनी पहचान और रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी स्पष्ट करने के लिए सुनवाई में बुलाया जा सकता है।
सीएनआर राव के मामले में भी नाम की स्पेलिंग में यही अंतर सामने आने की बात कही गई है।
अब व्यक्तिगत रूप से पेश होंगे सीएनआर राव?
नोटिस के बाद प्रोफेसर सीएनआर राव को सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा गया है।
बताया गया है कि सुनवाई का स्थान मल्लेश्वरम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के पास रखा गया है।
SIR से जुड़े ऐसे मामलों में जिस व्यक्ति के नाम पर नोटिस जारी किया गया है, उसी की ओर से सुनवाई में उपस्थित होकर रिकॉर्ड से संबंधित स्थिति स्पष्ट करने की प्रक्रिया बताई गई है।
इसलिए 92 वर्षीय वैज्ञानिक सीएनआर राव को भी व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा गया है।

कौन हैं प्रोफेसर सीएनआर राव?
प्रोफेसर चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव (CNR Rao) देश के प्रमुख वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। उनका जन्म बेंगलुरु में हुआ और उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में लंबा योगदान दिया है।
विज्ञान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2014 में भारत रत्न से सम्मानित किया था।
वह भारत रत्न पाने वाले वैज्ञानिकों में शामिल हैं। उनके लंबे वैज्ञानिक करियर और देश के शोध क्षेत्र में योगदान के कारण उनका नाम देश-विदेश में जाना जाता है।
ऐसे में वोटर लिस्ट में उनके नाम की स्पेलिंग में एक अतिरिक्त ‘F’ को लेकर SIR नोटिस मिलना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया है।
अमर्त्य सेन के मामले में भी सामने आया था नाम का अंतर
नाम की स्पेलिंग में अंतर का ऐसा ही मामला अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के संदर्भ में भी सामने आया है।
हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से उन्हें व्यक्तिगत रूप से सुनवाई में उपस्थित होने से छूट दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
इससे यह मामला भी चर्चा में आ गया है कि SIR प्रक्रिया में पुराने और मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड के बीच छोटे से छोटे अंतर की भी जांच की जा रही है।
SIR प्रक्रिया को लेकर क्यों है चर्चा?
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज जानकारी की जांच करना और रिकॉर्ड को अपडेट करना है।
लेकिन जब पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा सूची में नाम, पता या अन्य विवरण में अंतर सामने आता है तो संबंधित मतदाता को अतिरिक्त प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।
सीएनआर राव का मामला इसी प्रक्रिया का एक उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां नाम में सिर्फ एक अतिरिक्त अक्षर के अंतर ने सुनवाई का रास्ता खोल दिया।
अब देखना यह होगा कि सुनवाई के दौरान उनके रिकॉर्ड का सत्यापन किस तरह किया जाता है और नाम की स्पेलिंग में अंतर को किस प्रक्रिया के तहत ठीक किया जाता है।
एक ‘F’ से शुरू हुआ मामला बना चर्चा का विषय
पूरे मामले की सबसे खास बात यही है कि देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सीएनआर राव का नाम पुराने और मौजूदा वोटर रिकॉर्ड में लगभग समान है। अंतर सिर्फ “Prof” और “Proff” की स्पेलिंग का बताया जा रहा है।
यानी एक अतिरिक्त F की वजह से सामने आए नाम के अंतर ने SIR प्रक्रिया के तहत सुनवाई तक की स्थिति पैदा कर दी।
यह मामला बताता है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान रिकॉर्ड में छोटी सी स्पेलिंग संबंधी विसंगति भी संबंधित व्यक्ति के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।

