नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में रेलवे से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। सरकार का जोर खास तौर पर उन रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाने पर है, जिन पर देश की बड़ी संख्या में यात्री और मालगाड़ियां निर्भर हैं।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि देश के करीब 11,000 किलोमीटर लंबे हाई-डेंसिटी रेलवे नेटवर्क में सात प्रमुख कॉरिडोर ऐसे हैं, जिन पर भारतीय रेलवे के लगभग 40 फीसदी ट्रैफिक का दबाव है। भविष्य में ट्रेनों की संख्या और माल परिवहन बढ़ने की संभावना को देखते हुए इन कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
किन सात रेल कॉरिडोर पर बढ़ेगी क्षमता?
सरकार की योजना सात प्रमुख हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को चार-लेन यानी क्वाड्रुपल ट्रैक व्यवस्था की दिशा में विकसित करने की है। इसमें देश के प्रमुख औद्योगिक और कारोबारी केंद्रों को जोड़ने वाले रूट शामिल हैं।
इनमें दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली के अलावा दो प्रमुख डायगोनल रूट दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता तथा दिल्ली-गुवाहाटी कॉरिडोर शामिल हैं।
इन रूटों पर ट्रैफिक का दबाव पहले से काफी अधिक है। ऐसे में अतिरिक्त रेल लाइनें तैयार होने से एक ही ट्रैक पर यात्री और मालगाड़ियों के संचालन का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
करीब 2,000 किलोमीटर का काम पूरा
सरकार के मुताबिक इन हाई-डेंसिटी कॉरिडोर के कुल नेटवर्क में करीब 2,000 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। लगभग 5,000 किलोमीटर हिस्से पर काम जारी है या उसे मंजूरी मिल चुकी है, जबकि बाकी करीब 4,000 किलोमीटर हिस्से के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
इससे संकेत मिलता है कि रेलवे आने वाले वर्षों में देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों की क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।

10,783 करोड़ रुपये के तीन मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट
कैबिनेट ने कुल 10,783 करोड़ रुपये की लागत वाले तीन मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं की कुल लंबाई करीब 656 किलोमीटर होगी और इन्हें पांच राज्यों के 14 जिलों से होकर विकसित किया जाएगा।
सरकार ने इन परियोजनाओं को वित्त वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
इनमें सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग पर खड़गपुर से झारसुगुड़ा के बीच चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। करीब 367 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर लगभग 6,528 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।
इसके अलावा अरकुनम-रेनिगुन्टा सेक्शन पर करीब 77 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी लाइन विकसित करने की योजना है। इस परियोजना की लागत करीब 1,936 करोड़ रुपये बताई गई है।
वहीं बिलासपुर-कटनी रेल मार्ग को भी चार-लेन क्षमता वाला बनाने की परियोजना को मंजूरी दी गई है।
यात्रियों को क्या फायदा होगा?
नई रेल लाइनों के निर्माण का सीधा असर रेल संचालन की क्षमता पर पड़ने की उम्मीद है। मौजूदा ट्रैक पर जब यात्री ट्रेन और मालगाड़ी दोनों अधिक संख्या में चलती हैं, तो ट्रेनों के बीच परिचालन संबंधी दबाव बढ़ जाता है। कई बार मालगाड़ियों को रास्ता देने के लिए यात्री ट्रेनों को भी रोकना पड़ता है।
मल्टीट्रैकिंग के बाद अलग-अलग ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। इससे ट्रेनों को अधिक सुचारु तरीके से चलाने में मदद मिल सकती है और व्यस्त रूटों पर परिचालन संबंधी बाधाएं कम हो सकती हैं।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर ट्रेन भविष्य में समय पर ही चलेगी। ट्रेन की समयपालन क्षमता पर मौसम, तकनीकी समस्या, ट्रैक मेंटेनेंस और अन्य परिचालन परिस्थितियों का भी असर पड़ता है।
4,790 गांवों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी
सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं से करीब 4,790 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। साथ ही लगभग 56 लाख अतिरिक्त यात्रियों को रेल परिवहन की सुविधा का लाभ मिल सकता है।
इसका फायदा केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। अतिरिक्त रेल क्षमता से मालगाड़ियों के संचालन को भी गति मिलने की संभावना है। सरकार का अनुमान है कि इन परियोजनाओं के जरिए सालाना करीब 27 मीट्रिक टन अतिरिक्त माल परिवहन संभव हो सकेगा।
माल ढुलाई बढ़ने से अर्थव्यवस्था को भी फायदा
रेलवे देश में कोयला, स्टील, सीमेंट, खाद्यान्न और अन्य औद्योगिक सामान की ढुलाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में मालगाड़ियों के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार होने से लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
रेल नेटवर्क पर दबाव कम होने से उद्योगों तक कच्चा माल पहुंचाने और तैयार उत्पादों को बाजार तक भेजने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। इससे लंबी अवधि में परिवहन लागत और सप्लाई चेन की दक्षता पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
रेलवे के आधुनिकीकरण पर सरकार का फोकस
केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से रेलवे के आधुनिकीकरण, नई रेल लाइनों, विद्युतीकरण, मल्टीट्रैकिंग और स्टेशन पुनर्विकास पर जोर दे रही है। हाई-डेंसिटी कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने की योजना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
अब चुनौती इन परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने की होगी। अगर निर्धारित समय पर काम पूरा होता है, तो देश के व्यस्ततम रेल मार्गों पर ट्रैफिक संभालने की क्षमता काफी बढ़ सकती है।

