रांची। झारखंड की राजधानी रांची में बुधवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने हड़कंप मचा दिया। कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित जिला स्कूल परिसर में पुराने पानी टंकी के टावर को तोड़ने के दौरान अचानक पूरा ढांचा ढह गया। टावर के मलबे में दबने से दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए। मलबे में मजदूर के फंसे होने की जानकारी के बाद बचाव अभियान तेज किया गया। बाद में एनडीआरएफ की टीम ने भी मोर्चा संभाला और मलबे की तलाशी शुरू की।
पुराने टावर को तोड़ते समय हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, जिला स्कूल परिसर में नई पानी टंकी बनाने की तैयारी चल रही थी। इसके लिए परिसर में मौजूद पुराने पानी टंकी के टावर को हटाने का काम किया जा रहा था।
बुधवार शाम करीब 6 बजे पुराने ढांचे को तोड़ने का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक टावर भरभराकर नीचे गिर गया।
जिस समय यह हादसा हुआ, उस वक्त मौके पर कुल पांच मजदूर मौजूद थे। अचानक ढांचा गिरने से वहां अफरा-तफरी मच गई और दो मजदूर मलबे के नीचे फंस गए।
तीन मजदूरों को तत्काल सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि, दो मजदूरों के मलबे में दबे होने के कारण मौके पर बचाव अभियान शुरू करना पड़ा।
एक शव पहले मिला, दूसरे की तलाश में चला अभियान
हादसे के बाद राहत-बचाव दल ने सबसे पहले मलबे की जांच शुरू की। अधिकारियों के मुताबिक, एक मजदूर का शव शुरुआती कार्रवाई के दौरान ही मलबे से बरामद कर लिया गया था।
वहीं, दूसरे मजदूर के मलबे में फंसे होने की आशंका के चलते तलाशी अभियान जारी रखा गया। भारी मलबे और ढहे हुए ढांचे के बीच बचाव दल को सावधानी के साथ काम करना पड़ा।
काफी प्रयास के बाद दूसरे मजदूर का शव भी मलबे से बरामद कर लिया गया।
दोनों शवों को पुलिस के हवाले कर दिया गया, जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।

एनडीआरएफ ने संभाला बचाव अभियान
हादसे की गंभीरता को देखते हुए एनडीआरएफ की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। रांची स्थित 9वीं बटालियन एनडीआरएफ की टीम सूचना मिलते ही घटनास्थल के लिए रवाना हुई।
टीम के मौके पर पहुंचने के बाद मलबे में फंसे मजदूर की तलाश के लिए विशेष बचाव अभियान चलाया गया।
9वीं बटालियन एनडीआरएफ के कमांडेंट मोहम्मद सलीम रईम ने बताया कि हादसे के वक्त पांच लोग वहां मौजूद थे। इनमें से तीन को सुरक्षित बचा लिया गया था। एक शव जिला प्रशासन द्वारा पहले ही बरामद कर लिया गया था, जबकि बचाव अभियान के दौरान दूसरे मजदूर का शव भी बरामद कर लिया गया।
इसके बाद दोनों शवों को पुलिस के हवाले कर दिया गया।
हादसे की खबर फैलते ही मौके पर जुटी भीड़
पानी टंकी का टावर अचानक गिरने की खबर से आसपास के इलाके में भी हलचल मच गई। पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला।
बचाव अभियान के दौरान सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई, क्योंकि ढहा हुआ ढांचा और मलबा आगे भी खिसकने का खतरा पैदा कर सकता था।
घटनास्थल पर राहत-बचाव कार्य के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन की टीम हादसे से जुड़े तथ्यों को जुटाती रही।
आखिर अचानक क्यों ढहा टावर?
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुराने पानी टंकी के टावर को तोड़ने के दौरान ढांचा अचानक क्यों गिर गया?
क्या टावर पहले से कमजोर था? क्या उसे तोड़ने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया में कोई चूक हुई? या ढांचे की स्थिति का पर्याप्त आकलन नहीं किया गया था?
फिलहाल इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।
जांच के दौरान यह भी देखा जा सकता है कि पुराने ढांचे को हटाने के लिए सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं और काम के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम मौजूद थे या नहीं।
मजदूरों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
निर्माण और पुराने ढांचों को तोड़ने से जुड़े काम में सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। पुराने ढांचे कई वर्षों तक मौसम और अन्य परिस्थितियों का सामना करने के कारण कमजोर हो सकते हैं। ऐसे में उन्हें गिराने से पहले उनकी संरचनात्मक स्थिति का आकलन और सुरक्षित तरीके से काम करना जरूरी होता है।
रांची का यह हादसा भी इसी वजह से गंभीर सवाल खड़े करता है।
हालांकि, हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने से पहले जांच पूरी होना जरूरी है। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टावर गिरने की वास्तविक वजह क्या थी और इसमें किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं।
तीन मजदूरों के सुरक्षित बचने से मिली राहत
हादसे में दो मजदूरों की जान जाने के बावजूद राहत की बात यह रही कि मौके पर मौजूद अन्य तीन मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
अगर राहत-बचाव अभियान में देरी होती या मलबा और अधिक फैलता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। जिला प्रशासन, पुलिस और एनडीआरएफ की टीमों ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान चलाया और मलबे में फंसे मजदूर की तलाश पूरी की।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता हादसे के कारणों का पता लगाने और आगे की आवश्यक कार्रवाई करने पर है।

