लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) के भीतर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पहले अहम संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटाया और अब उन्हें पार्टी से पूरी तरह बाहर कर दिया है। इसी बीच मायावती के छोटे भतीजे ईशान आनंद को संगठन में सक्रिय भूमिका दिए जाने से बसपा के भीतर नेतृत्व के अगले समीकरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मायावती का यह फैसला ऐसे समय आया है जब बसपा उत्तर प्रदेश के साथ-साथ दूसरे राज्यों में भी संगठन को चुनावी चुनौती के लिए तैयार करने में जुटी है। आकाश आनंद को 3 सितंबर को राष्ट्रीय समन्वयक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से हटाया गया था। उस समय मायावती ने कहा था कि आकाश को राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है तथा फिलहाल उन्हें बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी देना उचित नहीं होगा।
आकाश आनंद को आखिर पार्टी से क्यों निकाला गया?
आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने के पीछे मायावती ने मुख्य रूप से पार्टी अनुशासन और पारिवारिक हितों को संगठन से ऊपर रखने का आरोप लगाया है।
यह पूरा घटनाक्रम आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ से भी जुड़ा हुआ है। अशोक सिद्धार्थ को बसपा ने अगस्त में कथित अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के बीच निष्कासित किया था। इसके बाद मायावती और अशोक सिद्धार्थ के बीच मतभेद और ज्यादा सार्वजनिक हो गए।
9 सितंबर को मायावती ने संकेत दिया था कि यदि अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेते हैं तो आकाश आनंद की संगठनात्मक जिम्मेदारियों को बहाल करने पर विचार किया जा सकता है। इसके बाद 10 सितंबर को अशोक सिद्धार्थ ने सक्रिय राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने की घोषणा कर दी।
लेकिन इसके बाद घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने का ऐलान कर दिया। यानी अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद भी आकाश की बसपा में वापसी नहीं हुई।

अब ईशान आनंद की एंट्री क्यों अहम?
आकाश आनंद के बाहर होने के साथ ही मायावती के छोटे भतीजे ईशान आनंद का नाम अचानक बसपा की सक्रिय राजनीति में प्रमुखता से सामने आया है।
मायावती पहले ही पार्टी की बैठक में ईशान आनंद को नेताओं और पदाधिकारियों के सामने पेश कर चुकी हैं। उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
मायावती ने ईशान आनंद का आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट भी सार्वजनिक किया है। इससे संकेत मिलता है कि ईशान अब केवल पारिवारिक या कारोबारी दायरे तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पार्टी की गतिविधियों में भी सक्रिय नजर आ सकते हैं।
ईशान आनंद को मिली बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी
रिपोर्टों के मुताबिक ईशान आनंद को कई राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें अलग-अलग राज्यों में पार्टी के कामकाज और संगठन की स्थिति पर नजर रखने की भूमिका दी गई है। हालांकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे महत्वपूर्ण चुनावी राज्यों से उन्हें फिलहाल अलग रखने की बात सामने आई है।
ऐसे में यह जिम्मेदारी एक तरह से ईशान आनंद के लिए राजनीतिक प्रशिक्षण और संगठनात्मक अनुभव हासिल करने का मौका भी मानी जा रही है।
कानून की पढ़ाई और कारोबारी पृष्ठभूमि
ईशान आनंद, मायावती के भाई आनंद कुमार के छोटे बेटे और आकाश आनंद के छोटे भाई हैं। उनकी शिक्षा को लेकर उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने नोएडा के जेनेसिस ग्लोबल स्कूल से पढ़ाई की और बाद में लंदन से कानून की पढ़ाई की।
राजनीति में सक्रिय होने से पहले ईशान परिवार से जुड़े कारोबारी और व्यावसायिक कामकाज में भी भूमिका निभाते रहे हैं। अब बसपा संगठन में उनकी सक्रियता बढ़ने के साथ उनकी राजनीतिक पहचान भी बनती दिखाई दे रही है।
मायावती का परिवारवाद पर क्या संदेश?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात मायावती का वह राजनीतिक संदेश है, जिसमें उन्होंने बसपा को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित को व्यक्तिगत या पारिवारिक हितों से ऊपर रखना जरूरी है।
मायावती ने अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद के संदर्भ में भी इसी बात को आधार बनाया। उनका आरोप रहा कि व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों को पार्टी के हित से ऊपर रखने की स्थिति में संगठन को नुकसान हो सकता है।
यही वजह है कि आकाश आनंद के निष्कासन के बाद ईशान आनंद की सक्रियता को केवल परिवार के भीतर बदलाव के रूप में नहीं, बल्कि बसपा की अगली संगठनात्मक रणनीति के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
यूपी चुनाव से पहले बदली तस्वीर
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के सामने संगठन को मजबूत करने और अपना पुराना राजनीतिक आधार वापस हासिल करने की बड़ी चुनौती है। ऐसे समय में मायावती द्वारा एक तरफ आकाश आनंद को पूरी तरह बाहर करना और दूसरी तरफ ईशान आनंद को संगठन में सक्रिय भूमिका देना पार्टी के भीतर बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ईशान आनंद को भविष्य में पार्टी में कितनी बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी या उन्हें मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाएगा। फिलहाल इतना जरूर है कि बसपा की युवा पीढ़ी में अब ईशान आनंद का नाम पहले से कहीं ज्यादा चर्चा में आ गया है।

