श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर एक बार फिर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाला इनपुट सामने आया है। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े इनपुट के अनुसार, पाकिस्तान की सेना LoC के आसपास आतंकी संगठनों के कैडर की गतिविधियों को बढ़ावा देने और उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने की कोशिश कर रही है। खास तौर पर जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कैडर की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
इनपुट में दावा किया गया है कि करीब 50 से 60 आतंकियों को पाकिस्तानी सेना के विशेष बल स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) के साथ प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि प्रशिक्षण का उद्देश्य आतंकियों को ऐसे अभियानों के लिए तैयार करना है, जिनमें सीमा के बेहद करीब से कार्रवाई या घुसपैठ की कोशिश शामिल हो सकती है।
हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि सुरक्षा एजेंसियों की ओर से इनपुट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए सामने आई जानकारी को फिलहाल संभावित सुरक्षा खतरे के तौर पर देखा जा रहा है, न कि किसी निश्चित हमले की पुष्टि के रूप में।
उड़ी और केरन सेक्टर पर बढ़ी नजर
सुरक्षा इनपुट में जम्मू-कश्मीर के उड़ी और केरन सेक्टर को खास तौर पर संवेदनशील बताया गया है। नियंत्रण रेखा के पास इन इलाकों में किसी भी असामान्य गतिविधि पर सुरक्षा बलों की नजर बनी हुई है।
इसके अलावा राजौरी-पुंछ और गुरेज-टंगडार क्षेत्रों को भी संभावित घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। LoC पर पाकिस्तान की तरफ से आतंकियों की गतिविधियों में किसी भी तरह की वृद्धि को सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत माना जाता है।
इनपुट के मुताबिक, पाकिस्तान की सेना और आतंकी संगठनों के बीच समन्वय के जरिए सीमित स्तर की कार्रवाई की आशंका जताई गई है। इनमें सीमा पार से घुसपैठ या बॉर्डर एक्शन टीम (BAT) जैसी कार्रवाई शामिल होने की संभावना पर भी नजर रखी जा रही है।
मनशेरा में अस्थायी ट्रेनिंग कैंप का दावा
सुरक्षा सूत्रों से जुड़े इनपुट में पाकिस्तान के मनशेरा क्षेत्र में एक अस्थायी प्रशिक्षण शिविर बनाए जाने की बात कही गई है। दावा है कि यहां करीब 80 लोगों की मौजूदगी है, जिनमें लगभग 50-60 आतंकी और करीब 20 SSG कमांडो शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि प्रशिक्षण पिछले कुछ समय से चल रहा है। हालांकि, इस जानकारी की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
अगर यह इनपुट सही साबित होता है, तो यह संकेत हो सकता है कि पाकिस्तान की सेना आतंकी कैडर को पारंपरिक प्रशिक्षण के बजाय विशेष अभियानों के लिए तैयार करने पर जोर दे रही है।
पाकिस्तानी पंजाब में नए कैडर की भर्ती पर जोर
सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI अब पाकिस्तान के भीतर से नए कैडर तैयार करने पर जोर दे रही है।
बताया गया है कि पाकिस्तानी पंजाब और अन्य क्षेत्रों से युवाओं की भर्ती और उन्हें प्रशिक्षण देने की कोशिश की जा रही है। बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के पुराने नेटवर्क को फिर सक्रिय करने तथा पाकिस्तान के भीतर लश्कर से जुड़े प्रशिक्षण ढांचे को विस्तार देने की गतिविधियों का भी दावा किया गया है।
इस रणनीति का संभावित उद्देश्य पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के स्थानीय नेटवर्क पर निर्भरता कम करना और पाकिस्तान के भीतर ही आतंकी ढांचे के लिए नया मानव संसाधन तैयार करना हो सकता है।

जैश और लश्कर के नेटवर्क में बदलाव?
इनपुट में आतंकी संगठनों के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की भी बात कही गई है। दावा है कि बड़े नेटवर्क के बजाय छोटे मॉड्यूल, सीमित संख्या में प्रशिक्षित कैडर और गुप्त संपर्क व्यवस्था पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को प्रभावित करने और पुराने निष्क्रिय समर्थक नेटवर्क को फिर सक्रिय करने की कोशिशों पर भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर बताई जा रही है।
लश्कर के कुछ कैडर को विदेशी आतंकी संगठनों द्वारा इस्तेमाल किए गए युद्धक तौर-तरीकों से परिचित कराने के दावे भी सामने आए हैं। हालांकि, ऐसे दावों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र और विश्वसनीय जानकारी आवश्यक होगी।
LoC पर सीमित कार्रवाई की आशंका
मौजूदा इनपुट को एक साथ देखें तो सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती सिर्फ पारंपरिक घुसपैठ तक सीमित नहीं है। यदि आतंकी कैडर को वास्तव में विशेष सैन्य प्रशिक्षण दिया जा रहा है और सीमा के करीब उनकी गतिविधियां बढ़ रही हैं, तो इससे घुसपैठ, छोटे हमले या BAT जैसी कार्रवाई की आशंका बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, LoC पर किसी भी तरह की गतिविधि का आकलन केवल एक इनपुट के आधार पर नहीं किया जाता। सैन्य निगरानी, जमीन पर मूवमेंट, खुफिया सूचनाएं और सीमा के दूसरी तरफ की गतिविधियों को मिलाकर खतरे का आकलन किया जाता है।
वहीं, पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ असंतोष की खबरों के बीच सीमा पर तनाव बढ़ाने की किसी भी कोशिश को अलग नजरिए से भी देखा जा सकता है। हालांकि, इस तरह की किसी रणनीति के उद्देश्य के बारे में अभी निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
आने वाले दिन अहम
फिलहाल उड़ी, केरन, गुरेज-टंगडार और राजौरी-पुंछ जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा बल किसी भी संदिग्ध गतिविधि को लेकर सतर्क हैं। सामने आया इनपुट यदि आगे की जांच में सही साबित होता है तो LoC पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत किया जा सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी तक किसी बड़े हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए सामने आए दावों को सावधानी के साथ देखना जरूरी है। फिर भी, आतंकियों और पाकिस्तानी सेना के विशेष दस्तों के बीच कथित प्रशिक्षण की जानकारी ने LoC पर संभावित खतरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

