प्रयागराज। माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ से जुड़ी संपत्तियों को लेकर प्रयागराज में एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई की हलचल तेज हो गई है। आरोप है कि अतीक-अशरफ से जुड़ी कुछ जमीनों की बिक्री और प्लॉटिंग के जरिए मिलने वाली रकम फरार चल रही शाइस्ता परवीन और जैनब तक पहुंचाई जा रही है। इन शिकायतों में सरकारी जमीन और कथित तौर पर शत्रु संपत्ति से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायतों के सामने आने के बाद एडीएम प्रशासन सत्यम मिश्र ने मामले का संज्ञान लिया है और संबंधित अधिकारियों को जांच तथा आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हालांकि, संपत्तियों की वास्तविक स्थिति और बिक्री से जुड़ी शिकायतों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
कसारी-मसारी की जमीनों को लेकर शिकायत
प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में अतीक अहमद से जुड़ी कई संपत्तियों और जमीनों को लेकर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अतीक के प्रभाव के दौरान कुछ जमीनों पर कब्जे किए गए थे और कुछ संपत्तियां कथित तौर पर दबाव या अवैध तरीके से हासिल की गई थीं।
अब अतीक और अशरफ की मौत के बाद उनके नाम या उनसे जुड़े लोगों के कब्जे में बताई जा रही कुछ जमीनों की बिक्री और प्लॉटिंग का आरोप लगाया गया है। प्रशासन के सामने पहुंची शिकायतों में ऐसी ही संपत्तियों की जांच की मांग की गई है।
सरकारी जमीन पर प्लॉटिंग का आरोप
शिकायत के मुताबिक, कसारी-मसारी क्षेत्र में एक सरकारी जमीन पर अतीक द्वारा कथित कब्जे का मामला भी सामने आया है। अब आरोप है कि अतीक का साला जकी अहमद, अपने सहयोगियों इस्माइल और नबी अहमद के साथ मिलकर इस जमीन पर प्लॉटिंग कर रहा है।
हालांकि, इस संबंध में जमीन का वास्तविक स्वामित्व, कब्जे की स्थिति और प्लॉटिंग की वैधता प्रशासनिक जांच का विषय है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित जमीन सरकारी रिकॉर्ड में किस श्रेणी में दर्ज है और उस पर किसी तरह की बिक्री या निर्माण गतिविधि की अनुमति है या नहीं।
जकी अहमद के नाम दर्ज जमीन भी जांच के दायरे में
शिकायतों में ऐसी जमीनों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें कथित तौर पर अतीक ने अपने साले जकी अहमद के नाम खरीदा था। इन संपत्तियों की बिक्री किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
प्रशासन अब राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज और जमीन के स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर सकता है। यदि किसी संपत्ति को सरकारी जमीन या अन्य प्रतिबंधित श्रेणी की संपत्ति के रूप में दर्ज पाया जाता है, तो उसके हस्तांतरण या बिक्री की वैधता भी जांच के दायरे में आएगी।

अशरफ से जुड़ी जमीन की बिक्री का भी आरोप
मामले में धूमनगंज क्षेत्र के केसरिया मेन रोड से जुड़ी करीब 18 बिस्वा जमीन का भी उल्लेख किया गया है। शिकायत के अनुसार, यह जमीन अशरफ के नाम रजिस्टर्ड थी और अब इसे उसके साले जैद मास्टर द्वारा बेचने का आरोप है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जैद मास्टर के रिश्तेदार नायब अली और मोहम्मद अरशद इस जमीन पर प्लॉटिंग से जुड़े काम कर रहे हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए प्रशासनिक स्तर पर रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच की जाएगी।
शाइस्ता और जैनब तक पैसा पहुंचाने का आरोप
शिकायतकर्ताओं का सबसे गंभीर आरोप यह है कि अतीक और अशरफ से जुड़ी संपत्तियों की बिक्री से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल फरार चल रही शाइस्ता परवीन और जैनब की आर्थिक मदद के लिए किया जा रहा है।
हालांकि, यह एक आरोप है और इसके संबंध में ठोस वित्तीय लेनदेन की पुष्टि प्रशासनिक या जांच एजेंसियों की जांच के बाद ही हो सकती है। इसलिए फिलहाल इसे शिकायत में लगाए गए आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
कई अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी
मामले को गंभीरता से लेते हुए एडीएम प्रशासन सत्यम मिश्र ने कई संबंधित अधिकारियों को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इनमें मुख्य राजस्व अधिकारी, एडीएम वित्त एवं राजस्व, एडीएम नजूल, प्रभारी अधिकारी सीलिंग, प्रभारी अधिकारी शत्रु संपत्ति और एसडीएम सदर शामिल हैं।
अब इन अधिकारियों के स्तर पर जमीनों के राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्री, स्वामित्व, कब्जे और संबंधित संपत्तियों की श्रेणी की जांच की जा सकती है।
प्रशासनिक जांच में यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जमीनों और उनके हस्तांतरण के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो वास्तविक स्थिति भी जांच के बाद सामने आएगी।

