पटना। बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई हिस्सों में गंगा और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है, जिसके कारण नदी किनारे बसे इलाकों में परेशानी बढ़ गई है। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य के 15 जिलों में 47.33 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ के कारण कई स्थानों पर तटबंधों पर दबाव बढ़ा है और कुछ जगहों पर कटाव तथा तटबंध टूटने की घटनाएं सामने आई हैं। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में निगरानी और मरम्मत का काम कर रही हैं।
कई जगहों पर टूटे तटबंध, मरम्मत का काम जारी
अधिकारियों के अनुसार, भागलपुर जिले में अलग-अलग स्थानों पर तटबंध टूटने की करीब चार घटनाएं सामने आई हैं। इनमें कुछ स्थानों पर मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया है, जबकि अन्य जगहों पर राहत और मरम्मत कार्य जारी है।
गोपालपुर प्रखंड में ब्रह्मोत्तर बांध में टूट की स्थिति सामने आने के बाद जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीम और स्थानीय लोगों ने मिलकर रातभर अभियान चलाया। अधिकारियों के अनुसार, इसके बाद बांध की मरम्मत कर स्थिति को नियंत्रित किया गया।
वहीं, रंगरा प्रखंड में शुक्रवार सुबह करीब साढ़े चार बजे धोबनिया जमींदारी बांध में लगभग 20 फुट का कटाव होने की सूचना सामने आई। इसके कारण सड़क के किनारे बाढ़ का पानी फैल गया और आसपास के इलाकों में चिंता बढ़ गई।
तटबंधों की 24 घंटे निगरानी के निर्देश
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने अधिकारियों को गंगा, पुनपुन, गंडक समेत अन्य नदियों के किनारे स्थित तटबंधों की चौबीस घंटे निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने बताया कि पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 2016 के अब तक के सर्वाधिक रिकॉर्ड को पार कर चुका है। ऐसे में प्रशासन की प्राथमिकता तटबंधों की सुरक्षा और संभावित कटाव वाले स्थानों पर तत्काल कार्रवाई करना है।
अधिकारियों और तकनीकी टीमों को संवेदनशील स्थानों पर लगातार नजर रखने तथा किसी भी तरह की आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने को कहा गया है।
सोन और घाघरा के जलस्तर का भी असर
उपमुख्यमंत्री के मुताबिक, नदियों के बढ़े जलस्तर के पीछे सोन और घाघरा नदी में बढ़ा हुआ पानी भी एक प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि घाघरा का जलस्तर फिलहाल स्थिर होने लगा है, जबकि सोन नदी के जलस्तर में कमी देखी जा रही है।
जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन की टीमें अलग-अलग संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

सितंबर में सामान्य से ज्यादा बारिश
बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार, सितंबर में अब तक राज्य में करीब 90.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य से लगभग 20 प्रतिशत अधिक बताई गई है।
लगातार और सामान्य से अधिक बारिश के कारण नदियों के जलस्तर पर भी असर पड़ा है। हालांकि, बाढ़ की स्थिति को केवल बारिश से जोड़ने के बजाय विभिन्न नदियों में आने वाले पानी और जलस्तर में उतार-चढ़ाव को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
15 जिलों में लाखों लोग प्रभावित
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित 15 जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं।
इनमें भागलपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, कटिहार, पूर्णिया और बक्सर को अधिक प्रभावित जिलों में बताया गया है।
शुक्रवार सुबह छह बजे भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 36.62 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से करीब 2.12 मीटर ऊपर था।
कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
बिहार के अलग-अलग इलाकों में कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक गंडक नदी डुमरिया घाट, कोसी बलतरा और कुर्सेला में ऊंचे स्तर पर है।
इसी तरह बूढ़ी गंडक खगड़िया में, जबकि गंगा दीघा, गांधी घाट, हथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर बताई गई है।
पुनपुन नदी श्रीपालपुर, बागमती बेनीबाद तथा घाघरा नदी दरौली और गंगपुर सिसवन में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई से मदद
बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन और आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रशासन की ओर से बड़े स्तर पर राहत व्यवस्था की गई है।
विभाग के अनुसार, अलग-अलग जिलों में 1,194 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा 15 राहत शिविर भी चल रहे हैं, जहां करीब 11,255 बाढ़ पीड़ितों के लिए रहने, भोजन और चिकित्सा जैसी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
प्रशासन की कोशिश है कि प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।
अब आगे की स्थिति पर नजर
बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती तटबंधों को सुरक्षित रखना और नदी के बढ़ते जलस्तर पर लगातार निगरानी बनाए रखना है। कई संवेदनशील स्थानों पर मरम्मत कार्य जारी है।
आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर और मौसम की स्थिति यह तय करेगी कि प्रभावित इलाकों में हालात और बिगड़ते हैं या धीरे-धीरे सुधार की ओर बढ़ते हैं। फिलहाल प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें हाई अलर्ट पर हैं।

