बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति के चर्चित नाम और पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार मामला अदालत या चुनावी राजनीति से नहीं, बल्कि बेंगलुरु की हाई-सिक्योरिटी जेल से जुड़ा है। परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में औचक तलाशी के दौरान प्रज्वल रेवन्ना के बैरक से मोबाइल फोन समेत कई प्रतिबंधित सामान बरामद किए गए थे। अब इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच में 145 से अधिक अश्लील वीडियो मिलने की जानकारी सामने आई है।
मामले ने सिर्फ रेवन्ना को लेकर ही सवाल नहीं खड़े किए हैं, बल्कि जेल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जेल के अंदर पहुंच पर भी गंभीर बहस छेड़ दी है।
कौन हैं प्रज्वल रेवन्ना?
प्रज्वल रेवन्ना कर्नाटक के प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते और कर्नाटक के पूर्व मंत्री एचडी रेवन्ना के बेटे हैं। उनके चाचा एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
2019 के लोकसभा चुनाव में प्रज्वल ने हासन सीट से जीत हासिल की और संसद पहुंचे। हालांकि, 2024 में सामने आए गंभीर यौन अपराध मामलों के बाद उनका राजनीतिक करियर बुरी तरह प्रभावित हुआ। उन्हें जनता दल (सेक्युलर) से भी निष्कासित कर दिया गया था।
जेल पहुंचने के बाद भी खत्म नहीं हुआ विवाद
प्रज्वल रेवन्ना इस समय यौन अपराध के एक मामले में दोषसिद्धि के बाद सजा काट रहे हैं। अगस्त में जेल के अंदर उनके मोबाइल फोन इस्तेमाल करने का वीडियो सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे। इसके बाद जेल में सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने तलाशी अभियान चलाया।
11 अगस्त को हुई इस कार्रवाई में रेवन्ना के बैरक से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, चार्जर और अन्य डिजिटल सामान बरामद किया गया था। बाद में इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया।
फॉरेंसिक जांच में मिला बड़ा डिजिटल डेटा
जांच अधिकारियों के मुताबिक, बरामद मोबाइल फोन में 145 से अधिक अश्लील वीडियो क्लिप मिली हैं। इसके अलावा अन्य मनोरंजन सामग्री भी डिजिटल उपकरणों में मौजूद होने की जानकारी सामने आई है। पेन ड्राइव से भी फिल्मों और वेब सीरीज से जुड़ी सामग्री मिलने की बात कही गई है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बरामद डिजिटल सामग्री अपने आप में किसी नए आपराधिक आरोप का अंतिम प्रमाण नहीं है। उसका स्रोत, इस्तेमाल और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच पुलिस कर रही है।

जेल के बाहर लोगों से संपर्क के भी संकेत
फॉरेंसिक और कॉल डेटा की जांच में जेल के बाहर मौजूद लोगों से अनधिकृत संपर्क के संकेत भी मिले हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, फोन का इस्तेमाल परिवार के लोगों और एक महिला मित्र से संपर्क के लिए किए जाने की जानकारी जांच में सामने आई है।
जेल में बंद कैदी के पास प्रतिबंधित मोबाइल फोन का होना अपने आप में गंभीर सुरक्षा उल्लंघन माना जा रहा है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फोन जेल के भीतर कैसे पहुंचा और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
सिर्फ रेवन्ना नहीं, जेल के अंदर पूरे नेटवर्क की जांच
मामले की जांच आगे बढ़ने पर यह सिर्फ एक कैदी तक सीमित मामला नहीं रह गया है। पुलिस ने जेल में प्रतिबंधित मोबाइल और सिम पहुंचाने के कथित नेटवर्क के सिलसिले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें जेल कर्मचारियों और कैदियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जांच का मुख्य सवाल यही है कि हाई-सिक्योरिटी जेल में मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण किस तरह पहुंचे और क्या इसमें किसी स्तर पर मिलीभगत हुई।
जेल प्रशासन पर भी उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने जेल की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अगर हाई-सिक्योरिटी सेल में प्रतिबंधित मोबाइल फोन पहुंच सकता है और उसका इस्तेमाल भी किया जा सकता है, तो जेल की तलाशी और निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है—यह जांच का अहम विषय बन गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में जेल स्टाफ की भूमिका की भी जांच की जा रही है और प्रतिबंधित उपकरणों की आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश जारी है।
पहले से ही गंभीर मामलों में घिरे हैं प्रज्वल
प्रज्वल रेवन्ना का नाम 2024 में सामने आए कई गंभीर यौन अपराध मामलों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। इसके बाद विशेष जांच दल ने मामलों की जांच की और वह गिरफ्तार हुए। बाद में उनके खिलाफ चले मुकदमों में से एक में उन्हें दोषी ठहराकर सजा सुनाई गई।
अब जेल के अंदर प्रतिबंधित मोबाइल फोन मिलने का मामला उनकी कानूनी और प्रशासनिक मुश्किलों को और बढ़ा सकता है। हालांकि, इस नए मामले में जांच पूरी होने और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
अब जांच की नजर किन सवालों पर?
इस पूरे मामले में तीन सवाल सबसे अहम हैं—पहला, मोबाइल फोन जेल के अंदर किस रास्ते से पहुंचा; दूसरा, इसे उपलब्ध कराने में कौन-कौन लोग शामिल थे; और तीसरा, फोन के जरिए किन लोगों से संपर्क किया गया और किस उद्देश्य से किया गया।
पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जेल में प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आपूर्ति से जुड़े व्यापक नेटवर्क की जांच भी इसी मामले का हिस्सा बन गई है।

