Close Menu
Newsofindia TvNewsofindia Tv

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    बैलेट पेपर से चुनाव हुए, फिर भी कांग्रेस का खाता नहीं खुला? PM मोदी के एक सवाल से गरमाई सियासत

    October 28, 2026

    गुजरात में BJP की ‘लोकतंत्र बचाओ’ पदयात्रा से क्यों गरमाई सियासत? भूपेंद्र पटेल, जेपी नड्डा सड़क पर उतरे

    October 28, 2026

    गुजरात में बाल विवाह पर लगेगी लगाम? 2030 तक राज्य को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए उतरा ‘मुक्ति रथ’

    October 28, 2026
    Facebook Instagram YouTube
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    Newsofindia TvNewsofindia Tv
    Facebook Instagram YouTube
    • होम
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • राजनीति
    • अपराध
    • खेल
    • मनोरंजन
    Newsofindia TvNewsofindia Tv
    • होम
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • राजनीति
    • अपराध
    • खेल
    • मनोरंजन
    Home»विदेश»US Space Force: अंतरिक्ष में हथियारों की मौजूदगी का खुलासा! अमेरिका ने पहली बार मानी ‘स्पेस-कंट्रोल’ क्षमता, रूस-चीन पर टिकी नजर
    विदेश

    US Space Force: अंतरिक्ष में हथियारों की मौजूदगी का खुलासा! अमेरिका ने पहली बार मानी ‘स्पेस-कंट्रोल’ क्षमता, रूस-चीन पर टिकी नजर

    Chandra JyotiBy Chandra JyotiSeptember 15, 2026No Comments5 Mins Read
    Share
    Facebook Twitter Threads Copy Link Telegram WhatsApp Email

    वॉशिंगटन। अंतरिक्ष अब केवल वैज्ञानिक खोज और सैटेलाइट मिशनों तक सीमित नहीं रह गया है। अमेरिका, चीन और रूस के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा ने अंतरिक्ष को आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बना दिया है। इसी बीच अमेरिकी स्पेस फोर्स ने एक महत्वपूर्ण बयान में कहा है कि अमेरिका के पास ऑर्बिट में ऐसी ‘स्पेस-कंट्रोल’ क्षमताएं मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल विरोधी गतिविधियों से निपटने और अमेरिकी संयुक्त बलों की सुरक्षा के लिए किया जा सकता है।

    इस बयान ने अंतरिक्ष के सैन्यीकरण को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, अमेरिकी पक्ष ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कक्षा में कौन से विशिष्ट हथियार तैनात हैं। इसलिए इसे सीधे तौर पर यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका ने अंतरिक्ष में ऐसे हथियार तैनात कर दिए हैं जो पृथ्वी पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

    पहली बार इतनी स्पष्ट स्वीकारोक्ति

    अमेरिकी स्पेस फोर्स के प्रवक्ता के बयान के मुताबिक, Space Control में वे मिशन शामिल हैं जिनका उद्देश्य अंतरिक्ष क्षेत्र में चुनौती का सामना करना और वहां संचालन की क्षमता बनाए रखना है।

    अमेरिकी स्पेस फोर्स के आधिकारिक दस्तावेजों में भी Space Control को उसकी प्रमुख सैन्य भूमिकाओं में शामिल किया गया है। इसमें विरोधी की अंतरिक्ष क्षमताओं को प्रभावित करने के लिए kinetic और non-kinetic साधनों वाली offensive तथा defensive counterspace operations की बात की गई है।

    इसका अर्थ यह है कि अंतरिक्ष में सैन्य प्रतिस्पर्धा केवल किसी सैटेलाइट को भौतिक रूप से नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं है। संचार, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और अन्य अंतरिक्ष क्षमताओं को प्रभावित करने वाली तकनीकें भी इसका हिस्सा हो सकती हैं।

    रूस और चीन क्यों हैं अमेरिका की चिंता?

    अमेरिका अंतरिक्ष क्षेत्र में चीन और रूस को प्रमुख रणनीतिक प्रतिस्पर्धियों के रूप में देखता है। अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुसार, चीन अपनी सैन्य आधुनिकीकरण प्रक्रिया में अंतरिक्ष और counterspace क्षमताओं को विकसित कर रहा है।

    रूस को लेकर भी अमेरिका का आकलन है कि वह अंतरिक्ष को भविष्य के संघर्षों का महत्वपूर्ण क्षेत्र मानता है। ऐसे में सैटेलाइट और अंतरिक्ष आधारित संचार प्रणालियां किसी भी बड़े सैन्य संकट में बेहद महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

    आज सैन्य संचार, नेविगेशन, निगरानी और मिसाइल चेतावनी जैसी अनेक व्यवस्थाएं अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों पर निर्भर हैं। इसलिए किसी संघर्ष में अंतरिक्ष क्षमताओं को सुरक्षित रखना सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

    क्या अंतरिक्ष में हथियार रखना गैरकानूनी है?

    यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 1967 की Outer Space Treaty देशों को पृथ्वी की कक्षा में परमाणु हथियार या अन्य सामूहिक विनाश के हथियार रखने से रोकती है। चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों पर सैन्य अड्डे तथा हथियारों के परीक्षण पर भी संधि प्रतिबंध लगाती है।

    लेकिन यह संधि हर प्रकार की सैन्य अंतरिक्ष क्षमता पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाती। यही वजह है कि आधुनिक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में ‘space control’, electronic warfare और counterspace capabilities जैसे शब्द लगातार सामने आ रहे हैं।

    इसलिए अमेरिकी बयान को अंतरिक्ष में परमाणु हथियार तैनात करने की घोषणा के रूप में देखना सही नहीं होगा।

    सैटेलाइट क्यों बने हैं सबसे बड़ा रणनीतिक लक्ष्य?

    आधुनिक दुनिया में सैटेलाइट केवल टीवी प्रसारण या मौसम की जानकारी तक सीमित नहीं हैं। इनका इस्तेमाल संचार, नेविगेशन, निगरानी, समय निर्धारण और सैन्य चेतावनी जैसी सेवाओं में होता है।

    युद्ध की स्थिति में यदि किसी देश की महत्वपूर्ण अंतरिक्ष आधारित सेवाएं बाधित होती हैं तो उसकी सैन्य और नागरिक व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसी कारण अमेरिका, चीन और रूस अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाने पर जोर दे रहे हैं।

    अमेरिकी स्पेस फोर्स के मौजूदा दस्तावेजों में भी space superiority और विरोधी की क्षमताओं से निपटने की क्षमता को महत्वपूर्ण लक्ष्य बताया गया है।

    अमेरिका की नई अंतरिक्ष रणनीति कितनी बड़ी है?

    अमेरिकी स्पेस फोर्स केवल मौजूदा सैटेलाइट नेटवर्क की सुरक्षा पर ही काम नहीं कर रही। वह missile warning, tracking और space-domain awareness से जुड़ी नई प्रणालियां भी विकसित कर रही है।

    सितंबर 2026 में Space Systems Command ने Resilient Missile Warning and Tracking कार्यक्रम के अगले चरण से जुड़ी डिजाइन समीक्षा पूरी होने की जानकारी दी। इसका उद्देश्य मिसाइलों की निगरानी और वैश्विक स्तर पर battlespace awareness को मजबूत करना है।

    इसके अलावा अमेरिकी स्पेस फोर्स भविष्य में अंतरिक्ष आधारित missile-defense capabilities पर भी काम कर रही है। Space-Based Interceptor कार्यक्रम के तहत Low-Earth Orbit में interceptor constellation विकसित करने की योजना का उल्लेख आधिकारिक दस्तावेजों में किया गया है।

    क्या इससे अंतरिक्ष में नई हथियारों की दौड़ शुरू होगी?

    अमेरिकी बयान ने इस सवाल को फिर से महत्वपूर्ण बना दिया है। यदि प्रमुख शक्तियां अंतरिक्ष में अपनी offensive और defensive क्षमताओं को लगातार बढ़ाती हैं, तो दूसरे देश भी अपनी अंतरिक्ष सुरक्षा और counterspace व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं।

    इससे अंतरिक्ष में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। विशेषज्ञों के सामने चुनौती यह होगी कि सैन्य जरूरतों और अंतरिक्ष की दीर्घकालिक सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

    अंतरिक्ष में किसी भी संघर्ष का असर केवल सैन्य प्रणालियों तक सीमित नहीं रह सकता। सैटेलाइट सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की स्थिति में संचार, नेविगेशन और दूसरी महत्वपूर्ण सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

    China Counter Space Defense News International News Orbital Weapons Outer Space Treaty Russia Satellite Warfare Space Control Space Militarization Space Warfare Space Weapons Technology News US Space Force USA
    Share. Facebook Twitter Telegram Email WhatsApp
    Chandra Jyoti
    Chandra Jyoti
    • Website

    Related Posts

    बैलेट पेपर से चुनाव हुए, फिर भी कांग्रेस का खाता नहीं खुला? PM मोदी के एक सवाल से गरमाई सियासत

    October 28, 2026

    कौन हैं दिव्या अहिरवार, जिन्होंने जेल से बाहर आने से किया इनकार? केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ आंदोलन से चर्चा में आईं

    October 28, 2026

    ICC रैंकिंग में वैभव सूर्यवंशी की लंबी छलांग! 45वें नंबर पर पहुंचे, अब इन दिग्गजों से कितनी दूर?

    October 28, 2026
    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisements
    • News of India Tv
    • Newsofindia TV
    क्रिकेट लाइव
    Live Cricket Scores
    आज का मौसम
    Widget weather
    शेयर बाज़ार
    Track all markets on TradingView
    राशिफल
    Top Posts

    राजस्थान पंचायत चुनाव परिणाम 2026: गांवों में किसने जीता सरपंच का चुनाव? 16 जिलों में मतगणना के बाद सामने आने लगे नतीजे

    October 25, 20266,412 Views

    ‘क्या जामा मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़ी जा सकती है?’ अयोध्या से CM योगी का विपक्ष पर बड़ा हमला, हनुमानगढ़ी को लेकर दिया विवादित बयान

    July 10, 20265,567 Views

    महाराष्ट्र में UCC लागू होने की बड़ी तैयारी! CM फडणवीस ने बनाई समिति, 6 महीने में आएगी रिपोर्ट

    July 9, 2026596 Views
    About Us

    Newsofindia TV

    News of India TV is a trusted digital news platform committed to delivering fast, accurate, and unbiased news from across India and around the world. Our mission is to keep our readers informed with credible journalism, factual reporting, and timely updates on the issues that matter most.

    Trending

    बैलेट पेपर से चुनाव हुए, फिर भी कांग्रेस का खाता नहीं खुला? PM मोदी के एक सवाल से गरमाई सियासत

    By Rajat KumarOctober 28, 2026

    नई दिल्ली: देश के चार राज्यों में विधान परिषद यानी MLC चुनावों के नतीजों को…

    Also Read

    बैलेट पेपर से चुनाव हुए, फिर भी कांग्रेस का खाता नहीं खुला? PM मोदी के एक सवाल से गरमाई सियासत

    October 28, 2026

    गुजरात में BJP की ‘लोकतंत्र बचाओ’ पदयात्रा से क्यों गरमाई सियासत? भूपेंद्र पटेल, जेपी नड्डा सड़क पर उतरे

    October 28, 2026

    गुजरात में बाल विवाह पर लगेगी लगाम? 2030 तक राज्य को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए उतरा ‘मुक्ति रथ’

    October 28, 2026
    Facebook Instagram YouTube
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.