नई दिल्ली। भविष्य के युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और इसमें तकनीक की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होती जा रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन और दूसरी उभरती तकनीकों को लेकर दुनिया भर में हो रहे बदलावों के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत को भी भविष्य की सैन्य चुनौतियों के लिए तैयार करने पर जोर दिया है।
नई दिल्ली स्थित डीआरडीओ भवन में आयोजित DRDO-Industry Synergy Meet ‘विमर्श 2026’ को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक मजबूती हासिल करना नहीं है। भारत को ऐसा देश बनाना होगा जो तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और रणनीतिक रूप से सुरक्षित हो।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में तकनीकी बढ़त ही रणनीतिक बढ़त का आधार बनेगी।
भविष्य के युद्ध में AI और ड्रोन की बढ़ेगी भूमिका
राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य के युद्ध में उभरती तकनीकों की भूमिका महत्वपूर्ण होने वाली है। खासतौर पर AI और ड्रोन सैन्य क्षेत्र में बदलाव लाने वाली तकनीकों में शामिल हैं।
रक्षा मंत्री के मुताबिक, दुनिया जिस तेजी से तकनीकी बदलाव की ओर बढ़ रही है, उसमें भारत को केवल मौजूदा तकनीक अपनाने वाला देश नहीं बनना है। देश को ऐसी तकनीक विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा, जो आने वाली दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाए।
उन्होंने तकनीकी नवाचार की गति तेज करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि आज जिस तकनीक की कल्पना की जा रही है, वही भविष्य की सैन्य क्षमताओं का आधार बन सकती है।
‘आज की कल्पना बनेगी कल की सैन्य ताकत’
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में भविष्य की कल्पना और तकनीकी विकास के बीच संबंध पर खास जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत को यह कल्पना करनी होगी कि वह 40-50 साल बाद खुद को किस रूप में देखना चाहता है। उनके मुताबिक, जो कंपनियां आज नई और उभरती तकनीकों में निवेश करेंगी, वही आने वाले समय में तकनीकी नेतृत्व हासिल करने की स्थिति में होंगी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि केवल भविष्य की तकनीक की कल्पना करना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि उस तकनीक को आज ही विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया जाए।
यानी आने वाली सैन्य जरूरतों का इंतजार करने के बजाय भारत को अभी से अनुसंधान, विकास और नवाचार पर निवेश बढ़ाना होगा।
2047 तक रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
राजनाथ सिंह ने 2047 तक रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में भारत को अपनी क्षमता मजबूत करनी होगी।
इसके साथ ही स्वदेशी सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ाना, रक्षा निर्यात को कई गुना बढ़ाना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करना भी जरूरी बताया गया।
रक्षा मंत्री के अनुसार, इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केवल सरकार या किसी एक संस्था के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए रक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय और साझेदारी आवश्यक है।

DRDO और इंडस्ट्री की साझेदारी होगी अहम
‘विमर्श 2026’ का मुख्य उद्देश्य भी रक्षा अनुसंधान और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करना रहा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि DRDO और उद्योग के बीच साझेदारी केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे अनुसंधान, डिजाइन, परीक्षण, प्रमाणन और विनिर्माण तक पूरी मूल्य श्रृंखला में विस्तार देना होगा।
इस प्रक्रिया में बड़ी रक्षा कंपनियों के साथ MSME और स्टार्टअप को भी महत्वपूर्ण भागीदार बनाने पर जोर दिया गया।
इसका मकसद यह है कि रक्षा तकनीक विकसित करने से लेकर उसके परीक्षण और उत्पादन तक भारतीय उद्योग की भागीदारी बढ़े और देश में एक मजबूत स्वदेशी रक्षा इकोसिस्टम तैयार हो।
रक्षा क्षेत्र को क्यों बताया ‘आधार स्तंभ’?
रक्षा मंत्री ने 2047 के विकसित भारत के विजन में रक्षा क्षेत्र को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, आर्थिक विकास के साथ किसी देश की रणनीतिक सुरक्षा और तकनीकी क्षमता भी मजबूत होनी चाहिए।
ऐसे में रक्षा क्षेत्र केवल हथियारों और सैन्य उपकरणों के निर्माण तक सीमित नहीं है। यह अनुसंधान, अत्याधुनिक तकनीक, विनिर्माण, रोजगार, स्टार्टअप और निर्यात जैसे क्षेत्रों को भी प्रभावित करता है।
भारत यदि रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता हासिल करता है तो इससे देश की रणनीतिक क्षमता के साथ-साथ घरेलू उद्योग को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
AI की तस्वीर से भविष्य की तकनीक तक
राजनाथ सिंह ने AI की तेजी से बढ़ती क्षमताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि आज AI की मदद से ऐसी तस्वीर तैयार की जा सकती है, जो कई दशक पुरानी दिखाई दे।
लेकिन उनके मुताबिक असली चुनौती और उपलब्धि यह होगी कि तकनीक की मदद से आज से 40-50 साल आगे के भारत की कल्पना की जा सके।
उनका यह संदेश रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक सोच और नवाचार की जरूरत को रेखांकित करता है। सरकार और उद्योग को ऐसी तकनीकों पर काम करना होगा जो आने वाले समय में भारत की रणनीतिक जरूरतों को पूरा कर सकें।
स्टार्टअप और MSME के लिए खुल रहा बड़ा अवसर
रक्षा क्षेत्र में तकनीकी बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू भारतीय स्टार्टअप और छोटे उद्योगों की बढ़ती भूमिका भी है।
AI, ड्रोन, सेंसर, सॉफ्टवेयर और अन्य उभरती तकनीकों से जुड़े क्षेत्र में नए उद्यमों के लिए अवसर बढ़ सकते हैं। यदि DRDO, बड़ी कंपनियों और छोटे नवाचार आधारित उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बनता है तो भारत में रक्षा तकनीक का एक मजबूत घरेलू नेटवर्क विकसित किया जा सकता है।
हालांकि, इसके लिए अनुसंधान में निवेश, परीक्षण सुविधाओं, प्रमाणन प्रक्रिया और उद्योग के लिए अनुकूल माहौल को लगातार मजबूत करना होगा।
रणनीतिक बढ़त का नया आधार तकनीक
राजनाथ सिंह के संबोधन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना केवल पारंपरिक क्षमताओं से नहीं किया जा सकता।
तकनीकी नेतृत्व आने वाले समय में किसी भी देश की रणनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण आधार होगा। इसलिए भारत के लिए AI, ड्रोन और दूसरी उभरती तकनीकों में निवेश केवल औद्योगिक विकास का विषय नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से भी जुड़ा है।

