अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में क्षत्रिय युवा करणी सेना के जिलाध्यक्ष सचिन राघव के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। घटना बुधवार शाम सिविल लाइन थाना क्षेत्र के घंटाघर इलाके में हुई। रिपोर्टों के मुताबिक सचिन राघव अपने छोटे भाई सुंदर और दोस्त प्रहलाद के साथ वहां मौजूद थे, तभी युवकों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि भीड़ ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें सड़क से अंबेडकर पार्क की तरफ ले गई।
घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और चर्चा में आ गया। वीडियो में सचिन राघव के साथ भीड़ दिखाई दे रही है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उनसे माफी मंगवाई गई और ‘जय भीम’ समेत कुछ नारे लगवाए गए। हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर सामने आए प्रत्येक दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
घंटाघर के पास अचानक घिरी भीड़
जानकारी के अनुसार बुधवार शाम करीब 6:30 से 7 बजे के बीच सचिन राघव घंटाघर के पास अपने भाई और दोस्त के साथ चाट खा रहे थे। इसी दौरान कुछ युवक वहां पहुंचे और उनके साथ विवाद शुरू हो गया। इसके बाद भीड़ ने उन्हें घेर लिया।
रिपोर्टों में भीड़ की संख्या अलग-अलग बताई गई है। कुछ रिपोर्टों में करीब 100 युवकों का जिक्र है, जबकि अन्य रिपोर्टों में संख्या इससे कम बताई गई है। इसलिए भीड़ की सटीक संख्या पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
आरोप है कि सचिन को सड़क पर दौड़ाकर पीटा गया। उन्हें बचाने पहुंचे उनके छोटे भाई सुंदर और दोस्त प्रहलाद के साथ भी मारपीट की बात सामने आई है। सचिन को बाद में मेडिकल जांच के लिए सरकारी अस्पताल भेजे जाने की जानकारी रिपोर्टों में दी गई है।
अंबेडकर पार्क तक ले जाने का आरोप
मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस हिस्से को लेकर है जिसमें आरोप लगाया गया है कि भीड़ सचिन राघव को अंबेडकर पार्क के अंदर ले गई। वहां उनसे वाल्मीकि समाज और डॉ. भीमराव अंबेडकर के सम्मान में नारे लगवाए गए।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की है। पुलिस वायरल वीडियो, CCTV फुटेज और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के जरिए आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
मामले की पृष्ठभूमि में एक दिन पहले हुई सवर्ण समाज की पंचायत को बताया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक पंचायत में सचिन राघव के छोटे भाई सुंदर ने सामाजिक भूमिकाओं को लेकर भाषण दिया था। उनके भाषण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ, जिसके कुछ हिस्सों को लेकर वाल्मीकि समाज में आपत्ति और नाराजगी सामने आई।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार भाषण में अलग-अलग सामाजिक कार्यों को अलग-अलग जातीय पहचान से जोड़कर टिप्पणी की गई थी। इसी टिप्पणी को विवाद की मुख्य वजह बताया जा रहा है। हालांकि, इस बयान की व्याख्या और उससे जुड़े आरोपों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इसलिए मामले की पूरी पृष्ठभूमि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, आरोपियों की तलाश जारी
सीओ तृतीय सर्वम सिंह के अनुसार पीड़ित की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। घायल सचिन राघव को मेडिकल के लिए अस्पताल भेजा गया और वायरल वीडियो के आधार पर हमलावरों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को जल्द चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद अलीगढ़ में मामला सामाजिक विवाद से आगे बढ़कर कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी बन गया है। एक तरफ पुलिस वीडियो और CCTV के आधार पर आरोपियों की पहचान कर रही है, वहीं दूसरी तरफ घटना की पृष्ठभूमि में सामने आई कथित टिप्पणी की भी चर्चा हो रही है।
अब पुलिस जांच पर टिकी नजर
फिलहाल इस मामले में किसी आरोपी की भूमिका को अदालत द्वारा साबित किया जाना बाकी है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि घटना में कितने लोग शामिल थे, किसकी क्या भूमिका थी और विवाद की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बीच पुलिस के सामने चुनौती यह भी है कि घटना से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि कर निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जाए। मामले में आगे होने वाली गिरफ्तारियों और पुलिस की जांच से तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।

