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    Home»देश»ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंधों वाले कानून पर किए साइन, भारत पर 100% टैरिफ का रास्ता साफ; अब क्या होगा मोदी सरकार के सामने?
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    ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंधों वाले कानून पर किए साइन, भारत पर 100% टैरिफ का रास्ता साफ; अब क्या होगा मोदी सरकार के सामने?

    Chandra JyotiBy Chandra JyotiSeptember 19, 2026No Comments6 Mins Read
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    Trump Russia Sanctions Bill: अमेरिका और भारत के बीच व्यापार तथा ऊर्जा संबंधों को लेकर एक नया घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिससे रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका के पास टैरिफ लगाने की नई शक्ति आ गई है। भारत भी उन प्रमुख देशों में शामिल है, जिन पर इस कानून के तहत संभावित कार्रवाई की चर्चा हो रही है।

    हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ है। कानून राष्ट्रपति को परिस्थितियों और निर्धारित शर्तों के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों के आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। यानी कानून ने रास्ता साफ किया है, लेकिन इसका इस्तेमाल करना अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्णय पर निर्भर करेगा।

    ट्रंप ने किस कानून पर किए हस्ताक्षर?

    इस कानून का आधिकारिक नाम Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 है। इसे दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है। कानून रूस की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा क्षेत्र, नेतृत्व और उन जहाजों पर भी कार्रवाई का प्रावधान करता है, जिन्हें अमेरिकी अधिकारियों द्वारा प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली “शैडो फ्लीट” से जोड़ा जाता है।

    अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में इसे समर्थन मिला। सीनेट ने अगस्त में इसे 86-11 से पारित किया था, जबकि प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर को 262-159 के अंतर से मंजूरी दी। इसके बाद कानून ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए गया और अब यह कानून बन चुका है।

    भारत पर 100% टैरिफ की बात क्यों हो रही है?

    भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में शामिल है। कानून की व्यवस्था रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ बड़े आयातकों को निशाना बनाने के लिए राष्ट्रपति को अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्ति देती है।

    रिपोर्टों के अनुसार, पिछले 12 महीनों में रूस से ऊर्जा खरीद के मामले में शीर्ष आयातकों पर यह प्रावधान लागू हो सकता है। भारत और चीन को संभावित रूप से प्रभावित प्रमुख देशों के तौर पर लगातार चर्चा में रखा गया है।

    लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय सामान पर आज से ही 100% अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क लग गया है। कानून में अधिकतम सीमा 100% तक है और वास्तविक टैरिफ लगाने का निर्णय अलग से लिया जाना होगा। यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।

    भारत ने पहले ही अमेरिका को क्या कहा था?

    अमेरिका की इस कार्रवाई से पहले ही भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि रूस से तेल खरीद पर प्रस्तावित अमेरिकी उपायों के संभावित असर को लेकर नई दिल्ली ने वॉशिंगटन के साथ बातचीत की है।

    भारत ने कहा कि ऐसे कदमों का असर भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। साथ ही भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से तेल खरीद जारी रखने की बात कही है।

    भारत दुनिया का प्रमुख तेल आयातक है और रूसी कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों की सप्लाई व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। नई दिल्ली लंबे समय से यह तर्क देती रही है कि देश की बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था के लिए भरोसेमंद, उपलब्ध और किफायती ऊर्जा आपूर्ति जरूरी है।

    अगर 100% टैरिफ लगाया गया तो क्या होगा?

    यदि अमेरिका भविष्य में भारत पर इस कानून के तहत अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो इसका असर दोनों देशों के व्यापार पर पड़ सकता है। भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में अपने उत्पाद बेचना महंगा हो सकता है, जिससे कुछ निर्यात क्षेत्रों पर दबाव बढ़ने की संभावना होगी।

    दूसरी तरफ, रूस से तेल खरीद कम करने की स्थिति में भारतीय रिफाइनरों को दूसरे देशों से कच्चा तेल खरीदना पड़ सकता है। इससे तेल की खरीद लागत, शिपिंग खर्च और रिफाइनिंग मार्जिन पर असर पड़ने की संभावना है।

    Reuters के मुताबिक भारतीय रिफाइनर सितंबर और अक्टूबर के लिए रूसी तेल सहित अपनी सप्लाई पहले से व्यवस्थित कर चुके हैं। कुछ रिफाइनिंग कंपनियां अमेरिकी प्रशासन से राहत या संक्रमण अवधि की मांग करने की संभावना पर विचार कर रही हैं।

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी असर?

    इस घटनाक्रम का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता है। दोनों देश व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में रूसी तेल खरीद और संभावित अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा बातचीत को प्रभावित करने वाला विषय बन सकता है।

    Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय विश्लेषकों ने आशंका जताई है कि नए टैरिफ का खतरा व्यापार वार्ता को और जटिल बना सकता है। हालांकि, अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन कानून के तहत कौन से कदम उठाता है और भारत की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।

    क्या भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा?

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर ऐसा कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है कि भारत ने रूसी तेल खरीद पूरी तरह बंद करने का फैसला किया है। भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने और अलग-अलग देशों से सप्लाई लेने की नीति दोहराई है।

    यानी आने वाले समय में तीन चीजें सबसे महत्वपूर्ण होंगी—अमेरिका इस नए अधिकार का इस्तेमाल कब और किस देश के खिलाफ करता है, भारत और अमेरिका के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है और रूसी तेल की खरीद को लेकर नई दिल्ली अपनी ऊर्जा नीति में क्या बदलाव करती है।

    निष्कर्ष:

    डोनाल्ड ट्रंप के रूस प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर के बाद भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ की संभावना का रास्ता जरूर खुला है, लेकिन भारत पर ऐसा टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ है। नया कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर परिस्थितियों के अनुसार 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्ति देता है।

    भारत के लिए मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूसी कच्चा तेल उसकी ऊर्जा आपूर्ति का अहम हिस्सा है। दूसरी ओर अमेरिका भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक बाजार है। ऐसे में आगे की दिशा टैरिफ के वास्तविक इस्तेमाल, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और वैश्विक तेल बाजार पर निर्भर करेगी।

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