राजधानी दिल्ली: के कालकाजी मंदिर इलाके से एक बेहद गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, मंदिर में दर्शन करने आई एक नाबालिग लड़की के साथ तीन युवकों ने कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोप है कि तीनों ने पहले खुद को पुलिसकर्मी बताया और लड़की तथा उसके नाबालिग दोस्त को धमकाया। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और अब सामने आई ताजा जानकारी के मुताबिक एक आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया है। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
घटना आस्था कुंज पार्क, कालकाजी मंदिर के आसपास के इलाके में बताई गई है। पुलिस के अनुसार, किशोरी सोमवार शाम अपने नाबालिग दोस्त के साथ कालकाजी मंदिर में दर्शन करने पहुंची थी।
मंदिर से निकलने के बाद पार्क में पहुंचे दोनों
पुलिस के मुताबिक, दर्शन के बाद किशोरी और उसका दोस्त करीब शाम 7:30 बजे मंदिर के पास स्थित पार्क की तरफ गए थे। इसी दौरान 25 से 30 वर्ष की उम्र के तीन युवक उनके पास पहुंचे।
आरोप है कि युवकों ने दोनों से पूछताछ शुरू की और खुद को पुलिसकर्मी बताया। इसके बाद उन्होंने दोनों को कथित तौर पर कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर धमकाया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों में से एक ने लड़की के दोस्त को पकड़ लिया। इसके बाद तीनों ने लड़की के साथ कथित तौर पर यौन हिंसा की। घटना के बाद आरोपी वहां से फरार हो गए।
8:45 बजे मिली पुलिस को सूचना
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस को करीब रात 8:45 बजे PCR कॉल प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।
पुलिस ने पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा। मामले में नाबालिग की सुरक्षा और पहचान को ध्यान में रखते हुए कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में POCSO Act के तहत केस दर्ज किया गया है।
CCTV फुटेज से आरोपियों की तलाश
घटना के बाद पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। जांच टीम पार्क और आसपास के इलाके में मौजूद लोगों से भी पूछताछ कर रही है।
CCTV फुटेज के जरिए आरोपियों की पहचान करने और उनके आने-जाने के रास्ते का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस का उद्देश्य घटना से जुड़े सभी आरोपियों तक पहुंचना है।
एक आरोपी मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार
मामले में बाद की पुलिस कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने एक आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी के दौरान पुलिस और आरोपी के बीच संक्षिप्त मुठभेड़ हुई।
हालांकि, इस मामले में तीन आरोपियों के शामिल होने की बात सामने आई है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी बताई गई है। इसलिए जांच पूरी होने तक सभी आरोपों और घटनाक्रम को पुलिस की जांच के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
खुद को पुलिस बताने का आरोप
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरोपियों ने कथित तौर पर खुद को पुलिसकर्मी बताया था। पुलिस के अनुसार, इसी पहचान का इस्तेमाल करके उन्होंने किशोरी और उसके दोस्त को डराने-धमकाने की कोशिश की।
ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति की पुलिस पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों ने पीड़ितों को किस तरह रोका और घटना के बाद किस रास्ते से फरार हुए।
पुलिस की जांच में क्या-क्या शामिल?
जांच के दौरान पुलिस CCTV फुटेज के अलावा घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ कर रही है। मेडिकल जांच और पीड़िता के बयान भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे।
पुलिस आरोपियों की पहचान, उनकी आपसी भूमिका और घटना से पहले तथा बाद की गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है। साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या आरोपी पहले से पीड़ितों का पीछा कर रहे थे या दोनों से उनकी मुलाकात मौके पर अचानक हुई।
नाबालिग की पहचान सार्वजनिक करना कानूनन प्रतिबंधित
इस मामले में पीड़िता नाबालिग है। ऐसे मामलों में उसकी पहचान उजागर करना कानून के तहत प्रतिबंधित है। इसलिए उसके नाम, पते, स्कूल या परिवार से जुड़ी ऐसी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए जिससे उसकी पहचान हो सके।
पुलिस की जांच और अदालत की कार्रवाई के दौरान भी पीड़िता की निजता और सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों के सामने बाकी आरोपियों तक पहुंचने की चुनौती है। CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।
मामले में आरोपियों के खिलाफ अदालत में क्या साक्ष्य पेश किए जाते हैं और जांच के बाद आरोप किस तरह तय होते हैं, यह आगे की कानूनी प्रक्रिया में स्पष्ट होगा।

