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    Home»देश»वर्दी में Reel बनाई तो होगी कार्रवाई! ChatGPT पर सरकारी फाइल डालने से लेकर सोशल मीडिया कमाई तक, MP पुलिस के 24 नए नियमों ने मचाई हलचल
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    वर्दी में Reel बनाई तो होगी कार्रवाई! ChatGPT पर सरकारी फाइल डालने से लेकर सोशल मीडिया कमाई तक, MP पुलिस के 24 नए नियमों ने मचाई हलचल

    Chandra JyotiBy Chandra JyotiSeptember 22, 2026No Comments5 Mins Read
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    भोपाल: सोशल मीडिया के दौर में पुलिसकर्मियों की ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने नई गाइडलाइन जारी की है। डीजीपी कैलाश मकवाना के निर्देश पर जारी बताई जा रही इस 24-पॉइंट गाइडलाइन में फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, व्हाट्सऐप, यूट्यूब समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर कई नियम तय किए गए हैं। इनमें वर्दी में रील और फोटो पोस्ट करने से लेकर सरकारी दस्तावेजों को AI टूल्स पर अपलोड करने तक के प्रावधान शामिल हैं।

    वर्दी में Reel और वीडियो बनाने पर रोक

    नई गाइडलाइन का सबसे चर्चित हिस्सा पुलिस की वर्दी और सोशल मीडिया से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी के बाद वर्दी में रील, फोटो, वीडियो अथवा ऑडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकेंगे।

    वर्दी के साथ पुलिस बैज, रैंक चिन्ह और विभागीय पहचान भी इसी दायरे में माने गए हैं। पहले से सोशल मीडिया पर मौजूद ऐसी सामग्री को हटाने के निर्देश भी बताए गए हैं।

    इसके पीछे पुलिस वर्दी की गरिमा, विभागीय अनुशासन और पुलिस की संस्थागत छवि बनाए रखने को प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।

    ChatGPT और Gemini पर सरकारी दस्तावेज भी नहीं

    गाइडलाइन का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू AI टूल्स के इस्तेमाल से जुड़ा है। पुलिस अधिकारी और कर्मचारी केस डायरी, जांच रिपोर्ट, खुफिया जानकारी या अन्य संवेदनशील और गोपनीय सरकारी दस्तावेजों को ChatGPT, Gemini या दूसरे AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं कर सकेंगे।

    रिपोर्टों के अनुसार, केवल पूरा दस्तावेज ही नहीं बल्कि उसका स्कैन, स्क्रीनशॉट या संवेदनशील अंश भी AI टूल में डालने से रोकने की बात कही गई है।

    इसका संबंध सरकारी और पुलिस संबंधी संवेदनशील जानकारी को बाहरी डिजिटल सिस्टम तक पहुंचने से रोकने से है। खास तौर पर जांच से जुड़ी सामग्री और खुफिया इनपुट को सार्वजनिक या अनधिकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करने से बचने पर जोर दिया गया है।

    सोशल मीडिया से कमाई पर भी नजर

    पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया से कमाई करने को लेकर भी नियम बनाए गए हैं। बिना अनुमति सोशल मीडिया अकाउंट को मॉनेटाइज करने, किसी कंपनी या प्रोडक्ट का पैसे लेकर प्रचार करने अथवा निजी कारोबार का प्रमोशन करने पर रोक बताई गई है।

    रिपोर्टों के मुताबिक, यदि किसी पुलिसकर्मी ने पहले सोशल मीडिया के जरिए कमाई की है तो उसे निर्धारित अवधि में इसकी जानकारी विभाग को देनी होगी। कुछ रिपोर्टों में इसके लिए 30 दिन की समयसीमा बताई गई है।

    परिवार के सदस्यों के सोशल मीडिया अकाउंट से होने वाली ऐसी कमाई की जानकारी देने का प्रावधान भी रिपोर्टों में सामने आया है।

    दबिश, हथियार ट्रेनिंग और VIP सुरक्षा की जानकारी सार्वजनिक नहीं

    पुलिस की संवेदनशील ड्यूटी से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर डालने को लेकर भी सख्ती बताई गई है।

    दबिश, हथियार प्रशिक्षण, फायरिंग प्रैक्टिस, संवेदनशील तैनाती और VIP/VVIP सुरक्षा जैसी गतिविधियों की फोटो या वीडियो पोस्ट करने और लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक की बात कही गई है।

    पुलिसकर्मी संवेदनशील ड्यूटी के दौरान अपनी लोकेशन, तैनाती और जिम्मेदारी से जुड़ी ऐसी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं कर सकेंगे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

    जियो-टैगिंग से जुड़े प्रतिबंध भी रिपोर्टों में बताए गए हैं।

    पीड़ित, गवाह और जांच से जुड़ी जानकारी को लेकर भी नियम

    सोशल मीडिया पर पुलिस कार्रवाई की तस्वीरें साझा करते समय भी सावधानी बरतने के निर्देश बताए गए हैं। शिकायतकर्ता, पीड़ित, गवाह या आरोपी की पहचान उजागर करने वाली सामग्री पोस्ट करने पर प्रतिबंध की बात सामने आई है।

    विशेष रूप से यौन अपराधों की पीड़ित महिलाओं और बच्चों की पहचान सार्वजनिक न करने पर जोर है। चल रही जांच या अदालत में विचाराधीन मामलों से संबंधित ऐसी जानकारी भी सोशल मीडिया पर साझा नहीं की जा सकेगी, जिससे जांच या न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो।

    यह प्रावधान पुलिस की सोशल मीडिया गतिविधियों को केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं रखता, बल्कि संवेदनशील मामलों की गोपनीयता से भी जोड़ता है।

    आपराधिक या असामाजिक गतिविधियों से जुड़े लोगों से ऑनलाइन दूरी

    नई गाइडलाइन में पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया कनेक्शन को लेकर भी नियम बताए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, आपराधिक गतिविधियों या संदिग्ध/असामाजिक गतिविधियों से जुड़े लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने, उन्हें फॉलो करने या उनके साथ सहयोगात्मक सोशल मीडिया सामग्री साझा करने पर रोक रहेगी।

    पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों के साथ फोटो या वीडियो पोस्ट करने से भी बचना होगा। इसका उद्देश्य पुलिस की ऑनलाइन गतिविधियों और संदिग्ध व्यक्तियों के बीच अनावश्यक सार्वजनिक जुड़ाव को रोकना बताया गया है।

    सरकारी इंटरनेट और निजी सोशल मीडिया का इस्तेमाल

    गाइडलाइन में सरकारी संसाधनों के निजी सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़ा प्रावधान भी है। पुलिसकर्मी अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट के लिए सरकारी CUG सिम, सरकारी इंटरनेट, वाई-फाई, IP एड्रेस या आधिकारिक ई-मेल का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

    इसी तरह निजी मोबाइल पर सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट लॉगिन करने से जुड़े प्रतिबंध भी रिपोर्टों में बताए गए हैं।

    इसके अलावा, पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों, विभागीय कामकाज या वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी करने से भी रोकने की बात सामने आई है। विभागीय शिकायतों को निर्धारित आधिकारिक माध्यम से रखने पर जोर दिया गया है।

    पुराने पोस्ट भी हटाने होंगे

    नई गाइडलाइन केवल भविष्य में किए जाने वाले पोस्ट तक सीमित नहीं बताई गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, यदि पुलिसकर्मी के सोशल मीडिया अकाउंट पर पहले से वर्दी, अशोभनीय सामग्री या नियमों के दायरे में आने वाली पोस्ट मौजूद हैं, तो उन्हें हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

    इससे साफ है कि पुलिस मुख्यालय सोशल मीडिया को व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के साथ-साथ विभागीय अनुशासन और सुरक्षा से जुड़े विषय के रूप में देख रहा है।

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