राजस्थान: में सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। जिन इलाकों में कुछ दिन पहले तक बारिश और बादलों का असर दिखाई दे रहा था, वहां अब तेज धूप और बढ़ता तापमान लोगों को परेशान कर रहा है। पश्चिमी राजस्थान में गर्मी का असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। जैसलमेर में अधिकतम तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि बीकानेर और बाड़मेर में भी पारा 40 डिग्री के पार दर्ज हुआ।
भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के 22 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार जैसलमेर का अधिकतम तापमान 41.5°C रहा, जो सामान्य से 4.1 डिग्री अधिक था। बीकानेर में 40.6°C और बाड़मेर में 40.4°C तापमान दर्ज किया गया। जोधपुर में भी अधिकतम तापमान 39.4°C रहा, जबकि चूरू और पिलानी में पारा 39.6°C तक पहुंचा।
जैसलमेर में सबसे ज्यादा गर्मी, पारा सामान्य से 4 डिग्री ऊपर
मंगलवार को राजस्थान में सबसे गर्म शहर जैसलमेर रहा। यहां 41.5°C तापमान दर्ज किया गया। खास बात यह है कि सितंबर के इस दौर में यह तापमान सामान्य से काफी ऊपर है। IMD के मुताबिक जैसलमेर में अधिकतम तापमान सामान्य से 4.1 डिग्री ज्यादा रहा।
बीकानेर में 40.6°C और बाड़मेर में 40.4°C रिकॉर्ड हुआ। दोनों जगह भी तापमान सामान्य से ऊपर रहा। पश्चिमी राजस्थान के इन क्षेत्रों में शुष्क हवाओं और बारिश की कमी के कारण गर्मी का असर ज्यादा महसूस हो रहा है।
जयपुर में भी बढ़ा पारा
राजधानी जयपुर में भी बारिश नहीं होने से दिन के तापमान में बढ़ोतरी हुई। IMD के आंकड़ों के मुताबिक जयपुर में 22 सितंबर को अधिकतम तापमान 36.2°C और न्यूनतम तापमान 25.6°C रहा। अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 1.5 डिग्री ऊपर दर्ज हुआ।
दिन में तेज धूप के कारण गर्मी ज्यादा महसूस हुई, जबकि शाम के बाद तापमान में कुछ राहत मिली। आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधि कमजोर रहने पर दिन का तापमान फिर बढ़ सकता है।
कोटा में भी गर्मी और उमस का असर
कोटा में मंगलवार को अधिकतम तापमान 34.3°C दर्ज हुआ। न्यूनतम तापमान 25.4°C रहा। हालांकि कोटा का अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास था, लेकिन बारिश नहीं होने और वातावरण में नमी रहने के कारण उमस का असर महसूस किया जा सकता है।

सीकर से मानसून की विदाई, मौसम रहेगा शुष्क
सीकर समेत राजस्थान के कुछ हिस्सों में मानसून की वापसी का असर दिखाई देने लगा है। यहां मौसम साफ रहने और बारिश की गतिविधियां कमजोर होने से तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
IMD मानसून की वापसी घोषित करने के लिए केवल बारिश रुकने को आधार नहीं मानता। इसके लिए किसी क्षेत्र में लगातार करीब पांच दिन तक बारिश की गतिविधि का रुकना, निचले वायुमंडल में एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन का बनना और वातावरण में नमी का काफी कम होना जैसे संकेत देखे जाते हैं।
पश्चिमी राजस्थान से शुरू हो चुकी है मानसून की वापसी
राजस्थान के मौसम में सबसे बड़ा बदलाव मानसून की वापसी है। IMD ने पश्चिमी राजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने की घोषणा कर दी है। सामान्य तौर पर पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी लगभग 17 सितंबर के आसपास शुरू होती है, जबकि इस वर्ष इसकी शुरुआत कुछ देरी से हुई।
इसका सीधा असर राजस्थान के मौसम पर दिखाई दे रहा है। बारिश की गतिविधि घटने और वातावरण में नमी कम होने से दिन का तापमान ऊपर जाने लगा है।
क्या आगे और बढ़ेगी गर्मी?
आने वाले दिनों में राजस्थान के कई हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने की संभावना है। खासकर पश्चिमी जिलों में बारिश की कमी के कारण तापमान सामान्य से ऊपर बने रहने की संभावना है।
जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों में दिन के समय गर्म हवाओं का असर महसूस हो सकता है। वहीं जयपुर, अजमेर, जोधपुर, सीकर और अन्य शहरों में भी धूप और बढ़ते तापमान के कारण गर्मी महसूस हो सकती है।
हालांकि मानसून की वापसी एक क्रमिक प्रक्रिया है। किसी एक दिन तापमान बढ़ने या बारिश नहीं होने से पूरे राज्य से मानसून की वापसी घोषित नहीं की जाती। IMD लगातार मौसम संबंधी परिस्थितियों की निगरानी करता है।
बारिश की कमी से पश्चिमी राजस्थान में चिंता
मानसून के कमजोर पड़ने का असर बारिश पर भी पड़ा है। पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से कृषि और जल उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ सकती है। मानसून के अंतिम चरण में यदि बारिश की गतिविधि सीमित रहती है, तो जिन क्षेत्रों में पहले से बारिश कम हुई है वहां स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
इसलिए फिलहाल राजस्थान के मौसम की तस्वीर दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है—एक तरफ मानसून की विदाई और शुष्क मौसम, तो दूसरी तरफ बढ़ता तापमान और सितंबर में असामान्य गर्मी।

