उत्तर प्रदेश में रक्षा उपकरणों के निर्माण को लेकर तैयार हो रहा औद्योगिक आधार अब अंतरराष्ट्रीय कारोबार के मंच पर भी दिखाई दे रहा है। ग्रेटर नोएडा में आयोजित UP International Trade Show 2026 में उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। यहां राज्य की रक्षा विनिर्माण क्षमता और उससे जुड़े औद्योगिक इकोसिस्टम को विदेशी खरीदारों के सामने रखा जा रहा है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेड शो में 72 देशों के खरीदारों की मौजूदगी है। इस मंच के जरिए उत्तर प्रदेश के डिफेंस सेक्टर में तैयार हो रही औद्योगिक क्षमता को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर है।
पिस्टल से मिसाइल और ड्रोन तक रक्षा उत्पादन
यूपी डिफेंस कॉरिडोर की खासियत यह है कि इसका दायरा केवल किसी एक तरह के हथियार तक सीमित नहीं है।
ट्रेड शो में पिस्टल और छोटे हथियारों के साथ-साथ मिसाइल, एयरोस्पेस सिस्टम, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और एम्युनिशन जैसे क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक आधार को प्रदर्शित किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य राज्य में रक्षा उत्पादन से जुड़ी अलग-अलग क्षमताओं को एक व्यापक सप्लाई चेन का हिस्सा बनाना है। इससे बड़े रक्षा उत्पादकों के साथ छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी अवसर तैयार होने की संभावना है।
यूपी डिफेंस कॉरिडोर में कितने नोड हैं?
उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को छह प्रमुख नोड में विकसित किया गया है।
इनमें लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट शामिल हैं। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी UPEIDA को इसके क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।
सरकारी Invest UP के अनुसार, कॉरिडोर के लिए करीब 5,071 हेक्टेयर का लैंड बैंक चिन्हित किया गया है, जिसमें से लगभग 3,796 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जा चुकी थी। सरकार ने कॉरिडोर में करीब 50,000 करोड़ रुपये के निवेश और 2.5 लाख रोजगार अवसरों की संभावित क्षमता बताई है।
चित्रकूट नोड में प्रस्तावित बड़ा निवेश
ट्रेड शो में चित्रकूट नोड से जुड़ी रक्षा विनिर्माण गतिविधियों को भी खास तौर पर प्रदर्शित किया गया है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) की अत्याधुनिक रक्षा विनिर्माण इकाई स्थापित करने की दिशा में प्रस्तावित निवेश को प्रदर्शनी में दिखाया गया है। इसके जरिए चित्रकूट में रक्षा उत्पादन की संभावनाओं को सामने रखा जा रहा है।
यहां केवल उत्पादन क्षमता पर ही नहीं, बल्कि रक्षा क्षेत्र में डिजाइन और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
IIT Kanpur और IIT-BHU की भूमिका
डिफेंस कॉरिडोर के इकोसिस्टम में शोध और तकनीकी विकास को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने IIT Kanpur और IIT (BHU), वाराणसी को डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से संबंधित Centre of Excellence के रूप में विकसित करने की पहल की है। UPEIDA के अनुसार, दोनों संस्थानों को इस दिशा में स्वीकृति और वित्तीय प्रावधान दिए गए हैं।
सरकारी Invest UP दस्तावेजों में डिफेंस कॉरिडोर के संभावित क्षेत्रों में स्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरक्राफ्ट, हथियार और एम्युनिशन, MRO, ड्रोन, AI आधारित प्लेटफॉर्म, डिफेंस टेस्टिंग, प्रोपेलेंट, प्रिसीजन मैन्युफैक्चरिंग, लैंड सिस्टम और मिसाइल जैसे क्षेत्र शामिल किए गए हैं।
लखनऊ से ब्रह्मोस और अमेठी से AK-203
उत्तर प्रदेश में रक्षा उत्पादन की चर्चा के दौरान लखनऊ और अमेठी भी महत्वपूर्ण केंद्रों के तौर पर सामने आए हैं।
26 सितंबर को UP International Trade Show में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता का उल्लेख करते हुए राज्य में BrahMos missile systems और Amethi में AK-203 rifles के उत्पादन का जिक्र किया था। यह बयान ट्रेड शो के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान दिया गया था।
लखनऊ डिफेंस कॉरिडोर का एक प्रमुख केंद्र बन रहा है, जबकि सरकारी Invest UP के अनुसार यहां BrahMos Aerospace की मिसाइल असेंबली इकाई भी कॉरिडोर के रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम का हिस्सा है।
UP International Trade Show में क्या हो रहा है?
UP International Trade Show 2026 का आयोजन 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित India Expo Centre & Mart में किया जा रहा है। इस संस्करण में 2,400 से अधिक प्रदर्शक शामिल हैं और 600 से अधिक विदेशी खरीदारों के आने की जानकारी विभिन्न रिपोर्टों में दी गई है।
यहां रक्षा क्षेत्र के अलावा उत्तर प्रदेश के अन्य औद्योगिक, विनिर्माण, MSME, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्यात उत्पाद भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
इस साल जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, ऑस्ट्रिया और बेलारूस को ट्रेड शो के पार्टनर देशों के रूप में शामिल किया गया है।
72 और 90 देशों का आंकड़ा क्यों अलग है?
यहां एक जरूरी तथ्यात्मक अंतर समझना महत्वपूर्ण है। संबंधित खबर में 72 देशों के खरीदारों की मौजूदगी का उल्लेख है। वहीं ट्रेड शो की व्यापक कवरेज में 2026 संस्करण के लिए 600 से अधिक खरीदारों के करीब 90 देशों से आने की जानकारी दी गई है। 72 देशों का आंकड़ा पिछले वर्ष के खरीदारों के संदर्भ में भी रिपोर्ट किया गया है।
इसलिए 72 देशों के आंकड़े को डिफेंस कॉरिडोर के संदर्भ में प्रकाशित रिपोर्ट का आंकड़ा मानना उचित है, जबकि पूरे UPITS 2026 की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के लिए नवीनतम उपलब्ध आंकड़ा अलग है।
यूपी डिफेंस कॉरिडोर का आगे का लक्ष्य
डिफेंस कॉरिडोर का मूल उद्देश्य उत्तर प्रदेश में रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण का मजबूत औद्योगिक आधार तैयार करना और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना है। UPEIDA के अनुसार, परियोजना को भारत की रक्षा और एयरोस्पेस जरूरतों में विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
सरकारी दस्तावेजों में छह नोड के लिए अलग-अलग औद्योगिक विशेषज्ञताओं और निवेश संभावनाओं को विकसित करने की योजना बताई गई है। मार्च 2024 तक के Invest UP दस्तावेज में 114 औद्योगिक और 25 संस्थागत MoU की पुष्टि तथा 41 उद्योगों को भूमि आवंटन की जानकारी दी गई थी।

