मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में सामने आए चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अब अदालत के फैसले का दिन आ गया है। जिला अदालत में करीब 13 महीने तक चली सुनवाई के बाद 30 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया जाना है। इस मामले में सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला आरोपी हैं। अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस पूरी हो चुकी है और अब अदालत के निर्णय पर सबकी नजर है।
22 गवाहों की गवाही के बाद फैसले की बारी
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में करीब 22 गवाहों के बयान रिकॉर्ड किए गए। अप्रैल 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार आरोपियों से भी अदालत में सवाल-जवाब किए गए थे। दोनों ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया था। साहिल ने अपने पक्ष में गवाह पेश करने की अनुमति मांगी थी, जबकि मुस्कान ने कहा था कि उसके पास बचाव के लिए कोई गवाह नहीं है।
सितंबर में सुनवाई अंतिम चरण में पहुंची। बचाव पक्ष ने दलील दी कि हत्या का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था और घटनास्थल पर साहिल की मौजूदगी देखने वाला भी कोई चश्मदीद सामने नहीं आया। इसके बाद अभियोजन पक्ष को बचाव की दलीलों का जवाब देने का अवसर मिला।
क्या है पूरा सौरभ राजपूत हत्याकांड?
यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था। सौरभ राजपूत मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र से जुड़े थे और मर्चेंट नेवी में काम कर चुके थे। पुलिस जांच के अनुसार उनकी हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को आरोपी बनाया गया।
जांच के दौरान पुलिस को घर में एक नीला ड्रम मिला था, जिसके बाद मामले ने व्यापक चर्चा बटोरी। अभियोजन के अनुसार सौरभ की हत्या के बाद शव को टुकड़ों में काटकर ड्रम में सीमेंट के साथ छिपाया गया था। पुलिस ने जांच के बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया था।
फैसले से पहले कोर्ट में क्या हुआ?
मुकदमे के दौरान कई चरणों में गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अप्रैल में दोनों आरोपियों से अदालत में 32-32 सवाल किए गए थे। रिपोर्टों के अनुसार दोनों ने हत्या और शव को ड्रम में छिपाने से संबंधित आरोपों से इनकार किया था। इसके बाद बचाव पक्ष की ओर से दलीलें रखी गईं।
सितंबर में बचाव पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं होने सहित कई बिंदुओं को आधार बनाया। अभियोजन ने इन दलीलों का जवाब देने की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद अदालत ने अंतिम निर्णय की तारीख तय की।

30 सितंबर को क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अदालत अपने फैसले में क्या कहती है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 30 सितंबर 2026 को जिला अदालत में फैसला सुनाया जाना है। फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों तथा प्रस्तुत साक्ष्यों को किस तरह स्वीकार या अस्वीकार किया।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि फैसला आने से पहले किसी आरोपी को दोषी या निर्दोष बताना उचित नहीं है। अदालत का निर्णय ही इस मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट करेगा।
सौरभ के परिवार की नजर भी फैसले पर
मामले की सुनवाई के दौरान सौरभ के परिवार की ओर से आरोपियों के खिलाफ कड़ी सजा की मांग किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। वहीं बचाव पक्ष ने अदालत में अपने तर्क रखे और आरोपों पर सवाल उठाए। इस तरह मामले में दोनों पक्षों की दलीलें अदालत के सामने रखी जा चुकी हैं।
13 महीने की सुनवाई के बाद अब अंतिम निर्णय
सौरभ राजपूत हत्याकांड की सुनवाई लंबे समय तक चली। अदालत में गवाहों के बयान, आरोपियों से सवाल-जवाब और दोनों पक्षों की अंतिम दलीलों के बाद अब मुकदमा निर्णय के चरण में पहुंच चुका है।
30 सितंबर का दिन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन अदालत मामले में अपना निर्णय सुनाने वाली है। हालांकि अदालत का फैसला आने तक सजा को लेकर किसी तरह का अनुमान लगाना सही नहीं होगा। फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर क्या निष्कर्ष निकाला।

