बिहार: के सारण जिले में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ बाढ़ का खतरा एक बार फिर गहराता दिखाई दे रहा है। पानापुर प्रखंड में मुख्य तटबंध पर नदी के पानी का दबाव बढ़ गया है। सलेमपुर और सारंगपुर में तटबंध पर रिसाव की सूचना के बाद बाढ़ नियंत्रण विभाग और स्थानीय प्रशासन अलर्ट मोड में आ गए हैं। विभागीय टीमें कमजोर हिस्सों पर निगरानी रखने और रिसाव को नियंत्रित करने में जुटी हैं।
स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि गंडक का पानी बढ़ने के साथ तटबंधों पर लगातार दबाव बन रहा है। ऐसे में किसी कमजोर हिस्से में कटाव या रिसाव बढ़ने पर आसपास के निचले इलाकों में पानी तेजी से पहुंच सकता है।
पानापुर में दो जगह रिसाव से बढ़ी बेचैनी
पानापुर क्षेत्र में सलेमपुर और सारंगपुर के पास तटबंध पर रिसाव सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ी है। बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास में जुटी है।
तटबंध में रिसाव को शुरुआती स्तर पर रोकना महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि पानी का लगातार दबाव कमजोर हिस्से को और नुकसान पहुंचा सकता है। यही वजह है कि विभागीय कर्मचारी संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी कर रहे हैं।
ग्रामीणों को भी स्थिति पर नजर रखने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
सारण के मकेर में तटबंध धंसने से बढ़ा बाढ़ का खतरा
इसी बीच सारण जिले के मकेर प्रखंड में तटबंध को लेकर स्थिति और गंभीर हुई। हैजलपुर और बाघाकोल क्षेत्र के पास गंडक नदी के मुख्य तटबंध पर पानी के दबाव के कारण पहले रिसाव और धंसान की स्थिति बनी। इसके बाद तटबंध का हिस्सा टूट गया।
उपलब्ध विभागीय जानकारी के अनुसार हैजलपुर में गंडक नदी के दाएं सारण तटबंध के करीब 46.50 किलोमीटर हिस्से में लगभग आठ मीटर का धंसान हुआ। इसके साथ करीब 45 किलोमीटर पर बना बाढ़ निरोधक फाटक भी क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। इससे पानी के निचले इलाकों की ओर फैलने की आशंका जताई गई।
वहीं स्थानीय रिपोर्टों में बाघाकोल क्षेत्र के पास तटबंध टूटने के बाद पानी के आसपास के ग्रामीण इलाकों की ओर तेजी से बढ़ने की बात सामने आई है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें मरम्मत तथा बाढ़ नियंत्रण के काम में जुटी हैं।
कई गांवों के सामने संपर्क टूटने का खतरा
तटबंध को हुए नुकसान के बाद हैजलपुर, परमानंद छपरा और नौकरहा जैसे निचले इलाकों में पानी फैलने और संपर्क प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। स्थानीय स्तर पर लोगों को सतर्क किया गया है।
तटबंध टूटने के बाद खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में पानी पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने घर के सामान के साथ-साथ मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की चुनौती भी रहती है।
सारण के मकेर, पानापुर, तरैया और परसा समेत कई क्षेत्रों में पहले से बाढ़ जैसी स्थिति की चिंता बनी हुई है।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
तटबंध पर दबाव और रिसाव की जानकारी सामने आने के बाद जिला प्रशासन तथा जल संसाधन विभाग की टीमों ने निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों की ओर से प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
मकेर में तटबंध क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण भी किया। प्रभावित लोगों की सुरक्षा और पानी के फैलाव को नियंत्रित करने के लिए राहत-बचाव की तैयारियां की जा रही हैं।
प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल कमजोर हिस्सों को मजबूत करना और पानी के बहाव को नियंत्रित करना है। इसके साथ ही उन इलाकों पर नजर रखी जा रही है, जहां तटबंध के दूसरे हिस्सों में भी रिसाव या कटाव की संभावना है।
गंडक का जलस्तर क्यों बना हुआ है चिंता का कारण?
गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि का असर केवल नदी किनारे बसे गांवों तक सीमित नहीं रहता। तटबंधों पर पानी का दबाव बढ़ने के साथ निचले इलाकों में जलभराव और संपर्क मार्गों के प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
जल संसाधन विभाग के अनुसार राज्य में कई स्थानों पर गंडक नदी के तटबंधों पर सीपेज और पाइपिंग की स्थिति बनी हुई है। विभागीय टीमें लगातार फ्लड-फाइटिंग कार्य के जरिए इन्हें नियंत्रित करने में लगी हैं। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में बारिश और राज्य में लगातार वर्षा को भी मौजूदा बाढ़ की स्थिति से जोड़ा गया है।
दूसरे जिलों में भी गंडक का दबाव
गंडक नदी का बढ़ता जलस्तर केवल सारण तक सीमित नहीं है। गोपालगंज के बैकुंठपुर क्षेत्र में भी जमींदारी बांध टूटने की सूचना सामने आई, जिसके बाद आसपास के निचले क्षेत्रों में पानी फैलने की आशंका जताई गई।
विभिन्न इलाकों में तटबंधों पर दबाव बढ़ने के कारण प्रशासन को लगातार निगरानी करनी पड़ रही है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि किसी एक कमजोर हिस्से में अचानक कटाव बढ़ने से पानी तेजी से आबादी की ओर पहुंच सकता है।
ग्रामीणों के लिए बढ़ी सावधानी की जरूरत
बाढ़ की स्थिति में ग्रामीणों के लिए सबसे जरूरी है कि वे तटबंध या नदी के कमजोर हिस्सों के बेहद करीब जाने से बचें। प्रशासन की ओर से सुरक्षित स्थान पर जाने का निर्देश मिलने पर उसे गंभीरता से लेना जरूरी है।
पानी बढ़ने की स्थिति में बिजली के उपकरणों से दूरी बनाए रखना, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान पर रखना तथा जरूरी दस्तावेज और दवाइयां साथ रखना भी उपयोगी सावधानी हो सकती है।
फिलहाल स्थिति पर प्रशासन और जल संसाधन विभाग की नजर बनी हुई है। तटबंधों की मरम्मत और रिसाव को रोकने का काम जारी है।

