बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के परिवार की पुश्तैनी जमीन को कथित तौर पर हड़पने की कोशिश की गई। आरोप है कि जमीन पर अपना दावा मजबूत करने के लिए फर्जी वसीयत के साथ कमलनाथ के पिता महेंद्रनाथ का कथित फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र भी तैयार किया गया। इतना ही नहीं, शिकायत के मुताबिक इस दस्तावेज में उनकी पत्नी यानी कमलनाथ की मां का नाम भी गलत दर्ज किया गया।
मामला सामने आने के बाद नजीबाबाद पुलिस ने केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। पुलिस के मुताबिक इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है।
करीब 26 बीघा जमीन को लेकर है विवाद
यह पूरा मामला बिजनौर की नजीबाबाद तहसील के अमीखानपुर गांव की जमीन से जुड़ा है। पुलिस और शिकायत में सामने आए विवरण के मुताबिक कमलनाथ के पिता महेंद्रनाथ के नाम गांव में करीब 90 बीघा जमीन थी।
इसी जमीन के एक हिस्से, करीब 26 बीघा, को लेकर विवाद सामने आया। परिवार की ओर से जमीन की विरासत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद रिकॉर्ड में पहले से चल रहे विवाद की जानकारी मिली।
बताया गया कि जमीन का कुछ हिस्सा बटाई पर दिया गया था और परिवार की ओर से वहां नियमित मौजूदगी नहीं रहती थी। इसी स्थिति का फायदा उठाकर जमीन से जुड़े दस्तावेजों में कथित हेरफेर किए जाने का आरोप लगाया गया है।
विरासत दर्ज कराने पहुंचे तो खुला पूरा मामला
मामले का खुलासा तब हुआ जब कमलनाथ की ओर से 18 मई 2026 को नजीबाबाद तहसीलदार के यहां जमीन की विरासत अपने नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन किया गया।
राजस्व रिकॉर्ड की जांच के दौरान संबंधित जमीन को विवादित बताया गया। इसके बाद पता चला कि जमीन को लेकर तहसीलदार की अदालत में एक मामला पहले से चल रहा था।
जांच आगे बढ़ी तो एक ऐसी कथित वसीयत सामने आई, जिसके आधार पर जमीन पर दूसरा पक्ष अपना अधिकार जताने की कोशिश कर रहा था।
यहीं से मामले ने नया मोड़ ले लिया।
1998 की बताई गई वसीयत पर उठे सवाल
पुलिस के अनुसार विवादित दस्तावेजों में एक अपंजीकृत वसीयत शामिल थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह वसीयत महेंद्रनाथ के नाम से तैयार की गई थी और इसके आधार पर जमीन पर दावा स्थापित करने का प्रयास किया गया।
रिपोर्टों के अनुसार वसीयत को वर्ष 1998 का बताया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि दस्तावेज वास्तव में कब और किसने तैयार किया तथा उसमें इस्तेमाल किए गए हस्ताक्षर और अन्य विवरण वास्तविक हैं या नहीं।
मृत्यु प्रमाणपत्र ने बढ़ाया फर्जीवाड़े का शक
इस मामले में सबसे अहम दस्तावेजों में कथित मृत्यु प्रमाणपत्र भी शामिल है।
शिकायत के मुताबिक महेंद्रनाथ का मृत्यु प्रमाणपत्र 10 अप्रैल 2003 का बताया गया, जबकि कमलनाथ ने पुलिस को बताया कि उनके पिता की वास्तविक मृत्यु 7 सितंबर 2004 को दिल्ली के एस्कॉर्ट्स अस्पताल में हुई थी।
यानी शिकायत के अनुसार कथित दस्तावेज में मृत्यु का वर्ष वास्तविक मृत्यु से करीब एक साल पहले दिखाया गया। यही अंतर अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मां का नाम भी कथित तौर पर गलत दर्ज
मामले को और गंभीर बनाने वाला एक और आरोप यह है कि कथित मृत्यु प्रमाणपत्र में महेंद्रनाथ की पत्नी का नाम ‘प्रेमलता’ दर्ज किया गया था।
कमलनाथ ने शिकायत में इस नाम को भी गलत बताया है। यानी आरोप सिर्फ मृत्यु की तारीख से जुड़े दस्तावेज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पहचान से संबंधित विवरण में भी कथित बदलाव का आरोप लगाया गया है।
अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि यह दस्तावेज कहां तैयार हुआ, किस रिकॉर्ड के आधार पर जारी किया गया और इसमें दर्ज जानकारियां किसने उपलब्ध कराईं।
चार लोगों के नाम सामने आए
पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक इस मामले में धर्मपाल सिंह, जसबिंदर सिंह ढिल्लों, विजय शंकर पांडेय और लेखपाल डेविड कुमार समेत अन्य लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत में आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर कथित फर्जी दस्तावेज तैयार किए और जमीन पर अधिकार स्थापित करने की कोशिश की।
हालांकि, इन सभी आरोपों को अभी अंतिम रूप से साबित नहीं माना जा सकता। पुलिस मामले की जांच कर रही है और दस्तावेजों की वास्तविकता तथा प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जांच की जा रही है।
दो आरोपियों की गिरफ्तारी
बिजनौर पुलिस के मुताबिक मामले में धर्मपाल सिंह और विजय शंकर को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने दोनों को पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए हिरासत में लिया।
वहीं अन्य आरोपियों की तलाश और भूमिका की जांच जारी है। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या इसी तरह के दस्तावेज किसी दूसरी संपत्ति के मामले में भी इस्तेमाल किए गए थे।
पुलिस को बड़े नेटवर्क का भी शक?
मामले की जांच केवल 26 बीघा जमीन तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर तैयार किए गए दस्तावेजों के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं था।
कमलनाथ की शिकायत में अन्य संपत्तियों से जुड़े कथित फर्जी दस्तावेजों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस अब राजस्व रिकॉर्ड, वसीयत, मृत्यु प्रमाणपत्र और तहसील में चल रहे पुराने मुकदमों से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है।
जमीन की कीमत से ज्यादा बड़ा है रिकॉर्ड का सवाल
इस मामले में सबसे अहम सवाल सिर्फ जमीन पर कब्जे की कोशिश का नहीं, बल्कि सरकारी और न्यायिक रिकॉर्ड में कथित फर्जी दस्तावेज पहुंचने का भी है।
अगर जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि उन्हें तैयार करने से लेकर संबंधित रिकॉर्ड में पेश करने तक किन लोगों की भूमिका थी।
जमीन के स्वामित्व से जुड़े मामलों में वसीयत, मृत्यु प्रमाणपत्र और राजस्व रिकॉर्ड महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। इसलिए इनमें कथित हेरफेर का मामला सामान्य संपत्ति विवाद से अलग गंभीर कानूनी जांच का विषय बन जाता है।

