श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, राजौरी में पहले हुई एक मुठभेड़ के दौरान घायल होने के बाद मूसा ने जंगलों में रहते हुए अपने घावों की देखभाल के लिए शहद का इस्तेमाल किया था। उसके पास से बरामद मोबाइल फोन में घावों से संबंधित कुछ तस्वीरें भी मिली थीं। इस खुलासे ने जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की गतिविधियों और उनके जंगलों में लंबे समय तक छिपे रहने से जुड़ी परिस्थितियों को फिर चर्चा में ला दिया है।
बडगाम मुठभेड़ के बाद सामने आई अहम जानकारी
जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने हाल ही में एक अभियान के दौरान हाशिम मूसा को मार गिराया था। वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रमुख ऑपरेशनल कमांडर बताया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, उसके खिलाफ जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे।
मुठभेड़ के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार, मूसा पहले भी सुरक्षाबलों के साथ हुई एक मुठभेड़ में घायल हुआ था। उसके मोबाइल फोन में मिली तस्वीरों और अन्य जानकारी से उसके घायल होने के बाद की परिस्थितियों के बारे में अहम सुराग मिले। अधिकारियों के मुताबिक, वह उस दौरान जंगल में छिपा हुआ था और उसे नियमित चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं हो पा रही थी।
राजौरी में पहले हुई मुठभेड़ में घायल हुआ था आतंकी
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, हाशिम मूसा राजौरी के डोरीमल-गंभीर मुगला क्षेत्र में ऑपरेशन शेरुवाली के दौरान घायल हुआ था। इस अभियान में हुई मुठभेड़ के बाद वह घायल अवस्था में था। अधिकारियों का कहना है कि उस समय उसे चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल पाई थी।
इसी दौरान उसने अपने घावों की देखभाल के लिए शहद का इस्तेमाल किया था। उसके मोबाइल फोन से मिली तस्वीरों को इस घटना से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस तरह के किसी घरेलू उपाय को गोली लगने जैसी गंभीर चोट का सुरक्षित या प्रभावी इलाज नहीं माना जाना चाहिए। ऐसी चोटों में तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता बेहद जरूरी होती है।
मोबाइल फोन से मिले अहम सुराग
बडगाम में अभियान के दौरान मारे गए आतंकी के पास से बरामद मोबाइल फोन में कुछ ऐसी तस्वीरें मिलीं, जिनसे उसके पहले घायल होने की जानकारी सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक, इन तस्वीरों में उसके घावों की देखभाल से संबंधित दृश्य मौजूद थे।
इस जानकारी से सुरक्षा एजेंसियों को मूसा की पिछली गतिविधियों और उसके घायल होने की परिस्थितियों के बारे में अतिरिक्त जानकारी मिली। मोबाइल फोन और अन्य बरामद सामग्री की जांच सुरक्षा एजेंसियों के लिए आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े तथ्यों को समझने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।
पहलगाम आतंकी हमले से भी जुड़ा था नाम
हाशिम मूसा का नाम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के संदर्भ में भी सामने आया था। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। सुरक्षा एजेंसियों ने मूसा को इस हमले से जुड़े प्रमुख आरोपियों और कथित साजिशकर्ताओं में शामिल बताया था।
मूसा को पाकिस्तानी नागरिक और लश्कर-ए-तैयबा का वरिष्ठ कमांडर बताया गया था। अधिकारियों के अनुसार, वह पाकिस्तान की सेना की स्पेशल सर्विसेज ग्रुप का पूर्व कमांडो भी रह चुका था। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थीं।
पहलगाम हमले की जांच के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मामले में कई आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इस मामले में सुरक्षा एजेंसियों की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी रही है।
जंगलों में छिपे आतंकियों के खिलाफ सुरक्षा अभियान
जम्मू-कश्मीर के दुर्गम और वन क्षेत्रों में आतंकियों की मौजूदगी सुरक्षाबलों के लिए सुरक्षा संबंधी चुनौती बनी रहती है। ऐसे इलाकों में आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां समन्वय के साथ अभियान चलाती हैं।
हाशिम मूसा के मारे जाने को सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में देखा है। बडगाम के यूसमर्ग क्षेत्र में हुई मुठभेड़ के बाद आसपास के इलाकों में सुरक्षा संबंधी जांच और निगरानी भी की गई।
सुरक्षाबलों की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बनाए रखना, स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा करना और किसी भी संभावित खतरे को रोकना है। ऐसे अभियानों में खुफिया जानकारी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की अहम भूमिका होती है।
कौन था हाशिम मूसा?
मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रमुख कमांडर बताया गया था। उसका नाम कई आतंकी घटनाओं की जांच में सामने आया था। अधिकारियों के मुताबिक, वह संगठन की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था और सुरक्षा एजेंसियों के लिए लंबे समय से वांछित था।
उसके खिलाफ दर्ज मामलों और कथित आतंकी गतिविधियों की जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने विभिन्न साक्ष्य जुटाए थे। बडगाम में उसकी मौत के बाद उसके नेटवर्क और पूर्व गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जांच का महत्व भी बढ़ गया।
सुरक्षा के लिहाज से क्यों अहम है यह कार्रवाई?
बडगाम मुठभेड़ में हाशिम मूसा का मारा जाना जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों के लिहाज से एक अहम घटनाक्रम है। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, वह क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क का वरिष्ठ सदस्य था और कई गंभीर घटनाओं से उसका कथित संबंध था।
उसके पास से मिली सामग्री और पहले घायल होने से संबंधित जानकारी भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच का विषय है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए निगरानी जारी रखना महत्वपूर्ण होगा।

