मेरठ। मेरठ के बहसूमा क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव का चर्चित अमित कश्यप हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब साढ़े 17 महीने तक चली सुनवाई के बाद अब इस मामले में 7 अक्टूबर 2026 को अदालत का फैसला आने की तारीख तय है। फैसले से पहले जांच के दौरान सामने आया एक अहम तथ्य फिर चर्चा में है—अमित की मौत वाली रात से लेकर आरोपियों की गिरफ्तारी से ठीक पहले तक रविता और अमरदीप के बीच मोबाइल पर 51 बार बातचीत हुई थी।
मामले की शुरुआत 13 अप्रैल 2025 की सुबह हुई, जब अमित कश्यप उर्फ मिक्की का शव घर में मिला था। शुरुआती तौर पर मौत को सांप के काटने से जोड़कर देखा गया था, क्योंकि शव के पास सांप मिलने की बात सामने आई थी। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदली पूरी कहानी
जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत का कारण सर्पदंश नहीं बल्कि दम घुटना सामने आया। इसके बाद पुलिस ने इसे हत्या के कोण से जांचना शुरू किया। इसी जांच में अमित की पत्नी रविता और अमरदीप की भूमिका पर पुलिस का संदेह गहराया। दोनों को बाद में गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार, हत्या को सर्पदंश जैसा दिखाने की कोशिश की गई थी। हालांकि, इस मामले में आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत के फैसले से ही तय होगा।
51 फोन कॉल ने बढ़ाया जांच का शक
मामले में सबसे ज्यादा चर्चा जिस तथ्य की हो रही है, वह है 51 फोन कॉल का रिकॉर्ड। अदालत में पेश किए गए गवाहों और साक्ष्यों के अनुसार, 12 अप्रैल 2025 की रात से 16 अप्रैल की सुबह गिरफ्तारी से पहले तक रविता और अमरदीप के बीच 51 बार मोबाइल पर बातचीत हुई थी।
यह कॉल रिकॉर्ड जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आया। हालांकि, केवल फोन पर बातचीत होना अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता। अदालत को पूरे मामले के अन्य साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना होगा।

आखिर सांप का मामला सामने कैसे आया?
अमित की मौत के बाद परिवार की ओर से शुरुआत में सर्पदंश की आशंका जताई गई थी। शव के नीचे सांप मिलने की बात ने इस आशंका को और मजबूत किया। लेकिन मेडिकल जांच में मौत का कारण अलग सामने आने के बाद पुलिस ने घटना की परिस्थितियों की दोबारा पड़ताल की।
जांच एजेंसी के अनुसार, इसी दौरान रविता और अमरदीप के कथित संबंध तथा हत्या की साजिश से जुड़े आरोप सामने आए। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने अमित की हत्या के बाद घटना को अलग रूप देने की कोशिश की थी।
अमरदीप को मिल चुकी है जमानत
मामले की वर्तमान कानूनी स्थिति भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी अमरदीप को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है, जबकि रविता जेल में है। वहीं निचली अदालत में मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अब 7 अक्टूबर को फैसले की तारीख तय की गई है।
इसका मतलब यह है कि अब मामले में अदालत के सामने मौजूद साक्ष्यों और गवाहियों का अंतिम न्यायिक मूल्यांकन होने वाला है।
7 अक्टूबर पर टिकी सबकी नजर
यह मामला इसलिए भी चर्चित रहा है क्योंकि शुरुआत में सामने आई कहानी और बाद में जांच से निकले तथ्यों में बड़ा अंतर था। एक तरफ मौत को सांप के काटने से जोड़कर देखा गया, दूसरी तरफ पोस्टमार्टम के बाद हत्या का मामला सामने आया।
अब अदालत के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्य आरोपों को कानूनी कसौटी पर कितना साबित कर पाते हैं। 51 फोन कॉल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और गवाहों के बयान—इन सभी का फैसला मामले की दिशा तय कर सकता है।
मामला फिर क्यों चर्चा में आया?
मेरठ में इस मामले की चर्चा ऐसे समय फिर तेज हुई है जब हाल में सामने आए एक अन्य चर्चित हत्याकांड में भी अदालत ने फैसला सुनाया है। हालांकि दोनों मामलों के तथ्य और कानूनी परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन एक के बाद दूसरे चर्चित मामले में अदालत के फैसले की तारीख आने से लोगों की नजरें अब 7 अक्टूबर पर टिक गई हैं।
अमित कश्यप मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अदालत उपलब्ध साक्ष्यों को किस नजरिए से देखती है और क्या अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित कर पाया है।

