दिल्ली: में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी विवाद के बीच 15 अक्टूबर को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हंगामा हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दिपके, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की नेता नेहा बोरा और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण समेत कई लोग इस कार्यक्रम में मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी और मौजूद नेताओं से वहां से जाने को कहा।
रिपोर्टों के मुताबिक, विरोध कर रहे लोगों ने “बंद करो” और “दफा हो जाओ” जैसे नारे लगाए। इस घटनाक्रम के कारण प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब दिल्ली में SIR के विरोध, प्रदर्शनकारियों की हिरासत और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कौन-कौन था मौजूद?
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दिपके और नेहा बोरा के अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण तथा अभिनेता प्रकाश राज सहित अन्य लोग भी मौजूद थे। कार्यक्रम में हालिया प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और विरोध जताने के अधिकार से जुड़े सवाल उठाए गए।
नेहा बोरा ने कथित तौर पर प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ हुए व्यवहार पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पत्रकारों के कैमरे छीने गए और उन्हें कवरेज जारी रखने पर उपकरण वापस न मिलने की धमकी दी गई। ये आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा।
SIR को लेकर क्यों जारी है विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। CJP और कुछ विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
दूसरी ओर, चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों और उनके जवाबों का आकलन तथ्यों तथा संबंधित संस्थाओं के आधिकारिक पक्ष के आधार पर किया जाना चाहिए। किसी भी मतदाता सूची में बदलाव के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया की जांच जरूरी है। SIR को लेकर जारी विवाद अब केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस कार्रवाई और नागरिकों के विरोध के अधिकार पर भी बहस का विषय बन गया है।
दिपके ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दिपके ने हालिया प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई और दिल्ली में लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करने वाले प्रदर्शनकारियों तथा विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। दिपके ने सरकार से पूछा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इतनी सख्ती क्यों की जा रही है।
ये दिपके के आरोप और राजनीतिक दावे हैं। पुलिस और प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था तथा सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी अलग-अलग वजहें बताई गई हैं। इसलिए घटनाओं का पूरा आकलन करने के लिए प्रदर्शनकारियों के आरोपों के साथ प्रशासन का पक्ष और संबंधित कानूनी रिकॉर्ड भी देखना जरूरी है।
16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च का आह्वान
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिपके ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च आयोजित करने का आह्वान किया। उन्होंने लोगों से शाम पांच बजे एकत्र होने और राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली नहीं पहुंच पाने वाले लोग अपने शहरों में भी इसी समय तिरंगा मार्च आयोजित कर सकते हैं।
यह आह्वान ऐसे समय किया गया है, जब CJP के दो नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को हालिया प्रदर्शन के बाद पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर सामने आई। इस कार्रवाई को लेकर CJP और विपक्षी नेताओं ने आलोचना की है, जबकि पुलिस ने कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया है।
आगे क्या होगा?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई नारेबाजी ने दिल्ली में जारी SIR विवाद और विरोध प्रदर्शनों को फिर चर्चा में ला दिया है। अब नजर 16 अक्टूबर के प्रस्तावित तिरंगा मार्च, पुलिस की व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों की अगली रणनीति पर रहेगी। इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर विरोध जताने और सवाल उठाने का अधिकार है, तो दूसरी ओर सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी प्रशासन पर है।
मामले से जुड़े आरोपों, पुलिस के दावों और प्रदर्शनकारियों की मांगों की पुष्टि संबंधित पक्षों के बयानों तथा आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही की जानी चाहिए।

