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    Home»देश»Cancer Medicine Price Cut: कैंसर की 137 दवाएं होंगी सस्ती! 70% तक घट सकती है कीमत, जानें कब से मिलेगा फायदा
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    Cancer Medicine Price Cut: कैंसर की 137 दवाएं होंगी सस्ती! 70% तक घट सकती है कीमत, जानें कब से मिलेगा फायदा

    Chandra JyotiBy Chandra JyotiOctober 24, 2026No Comments5 Mins Read
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    नई दिल्ली। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज कराना कई परिवारों के लिए आर्थिक रूप से बड़ी चुनौती बन जाता है। अस्पताल में भर्ती, जांच, डॉक्टरों की फीस और महंगी दवाओं पर होने वाला खर्च परिवारों के बजट को प्रभावित कर सकता है। इसी बीच केंद्र सरकार ने कैंसर के मरीजों को राहत देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है। इस फैसले से संबंधित दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत में 70 प्रतिशत तक कमी आने की उम्मीद है।

    नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी 137 दवाएं 70 प्रतिशत सस्ती हो जाएंगी। कीमतों में वास्तविक कमी अलग-अलग दवाओं और उनके मौजूदा मूल्य ढांचे पर निर्भर करेगी।

    1. आखिर क्या है सरकार का नया फैसला?

    केंद्र सरकार के औषधि विभाग के तहत काम करने वाली राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं के लिए ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है।

    इस व्यवस्था का उद्देश्य दवा की सप्लाई चेन में अत्यधिक व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करना और मरीजों तक दवाएं अधिक उचित कीमत पर पहुंचाना है।

    दवा निर्माता से लेकर वितरक, खुदरा विक्रेता और अस्पताल तक दवाओं की आपूर्ति के अलग-अलग चरण होते हैं। इन चरणों में जुड़ने वाले मार्जिन का असर अंतिम कीमत पर पड़ सकता है। नई व्यवस्था इसी प्रक्रिया में अत्यधिक मार्जिन को सीमित करने का प्रयास है।

    2. कब से मिलना शुरू होगा फायदा?

    सरकार द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। दवा कंपनियों को अधिसूचना जारी होने के सात दिनों के भीतर अपनी संशोधित कीमतों की जानकारी NPPA को देनी है।

    इसके अलावा, कंपनियों को नई कीमतों की सूची अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होगी और उसे दवा विक्रेताओं तथा अस्पतालों तक पहुंचाना होगा।

    निर्धारित तारीख से खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को संबंधित दवाएं संशोधित कीमतों पर उपलब्ध करानी होंगी। अस्पतालों को भी नई कीमतें प्रमुखता से प्रदर्शित करनी होंगी।

    इसलिए मरीजों और उनके परिजनों के लिए दवा खरीदते समय पुरानी और संशोधित कीमत की जानकारी की पुष्टि करना जरूरी होगा।

    3. किन कैंसर दवाओं पर पड़ेगा असर?

    सरकार की अधिसूचना में 137 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं को शामिल किया गया है। इनमें कई महत्वपूर्ण उपचारों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं।

    इनमें प्रमुख रूप से:

    • पेम्ब्रोलिजुमैब (Pembrolizumab): कुछ प्रकार के कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी दवा।
    • डुर्वालुमैब (Durvalumab): कुछ कैंसर के उपचार में उपयोग की जाने वाली इम्यूनोथेरेपी दवा।
    • ओसिमर्टिनिब (Osimertinib): कुछ विशेष प्रकार के फेफड़ों के कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवा।
    • बेवा सिजुमैब (Bevacizumab): कुछ प्रकार के कोलन, अंडाशय और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवा।
    • डेनोसुमैब (Denosumab): कुछ परिस्थितियों में कैंसर से जुड़ी हड्डियों की जटिलताओं के प्रबंधन में इस्तेमाल होने वाली दवा।
    • पेगफिलग्रैस्टिम (Pegfilgrastim): कैंसर उपचार के दौरान कुछ मरीजों में सफेद रक्त कोशिकाओं की कमी से जुड़े जोखिम को कम करने में इस्तेमाल होने वाली दवा।

    ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी दवा का सूची में शामिल होना और उसकी कीमत में कितनी कटौती होगी, ये दो अलग-अलग बातें हैं। प्रत्येक दवा की संशोधित कीमत संबंधित अधिसूचना के अनुसार देखनी चाहिए।

    4. क्या हर दवा 70 प्रतिशत सस्ती होगी?

    यह इस फैसले से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। सरकार ने कीमतों में 70 प्रतिशत तक कमी आने की उम्मीद जताई है, लेकिन यह सभी दवाओं पर समान रूप से लागू नहीं होगी।

    किसी दवा का मौजूदा ट्रेड मार्जिन कितना है, उसकी मूल्य संरचना कैसी है और संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य की गणना किस तरह होती है—इन बातों से अंतिम कीमत प्रभावित होगी।

    जिन दवाओं का मौजूदा मार्जिन पहले से निर्धारित सीमा के भीतर है, उनकी कीमत में बड़ी कटौती जरूरी नहीं है। इसलिए मरीजों को किसी एक दवा की कीमत में आई कमी को सभी कैंसर दवाओं पर लागू मानने से बचना चाहिए।

    5. सरकार ने सप्लाई जारी रखने पर भी दिया जोर

    दवाओं की कीमत कम करने के साथ उनकी उपलब्धता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। यदि कोई जरूरी दवा बाजार में उपलब्ध नहीं होती, तो कम कीमत का लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच पाएगा।

    इसी वजह से दवा कंपनियों को अधिसूचित दवाओं का उत्पादन और आपूर्ति मौजूदा स्तर पर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य औषधि नियंत्रकों को भी निर्माताओं, वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों के स्तर पर नियमों के अनुपालन की निगरानी करनी है।

    इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कीमतों में बदलाव के दौरान दवाओं की कृत्रिम कमी पैदा न हो और मरीजों को उपचार के लिए जरूरी दवाएं मिलती रहें।

    6. मरीज नई कीमतों की जानकारी कहां से लें?

    मरीज और उनके परिजन संशोधित कीमतों की जानकारी के लिए NPPA की आधिकारिक वेबसाइट और Pharma Sahi Daam मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

    दवा खरीदने से पहले दवा का सही नाम, उसकी स्ट्रेंथ, पैक का आकार और लागू संशोधित MRP मिलाना उपयोगी होगा। एक ही दवा के अलग-अलग ब्रांड या पैक की कीमत अलग हो सकती है।

    यदि किसी दवा की कीमत को लेकर संदेह हो, तो अस्पताल के फार्मेसी विभाग या अधिकृत दवा विक्रेता से संशोधित मूल्य की पुष्टि की जा सकती है।

    यह भी ध्यान रखें कि दवा की कीमत में कमी आने से पूरे इलाज का खर्च उतने ही प्रतिशत कम होना जरूरी नहीं है। जांच, अस्पताल, डॉक्टर की फीस और अन्य उपचार संबंधी खर्च अलग हो सकते हैं।

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