नई दिल्ली: भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति के तहत चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा और खुफिया सूत्रों के अनुसार, संगठन के कई ठिकानों, नेटवर्क और कैडर को भारी नुकसान पहुंचा है। अब दावा किया जा रहा है कि संगठन अपनी गतिविधियों को बनाए रखने के लिए पारंपरिक तरीकों के बजाय ऑनलाइन प्रचार (डिजिटल प्रोपेगैंडा) का सहारा लेने की कोशिश कर रहा है।
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी होने और जमीनी नेटवर्क कमजोर पड़ने के बाद संगठन कथित तौर पर इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी मौजूदगी बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इस प्रकार की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्या बदला?
सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जैश-ए-मोहम्मद के कई अहम ठिकानों और संरचनाओं को नुकसान पहुंचा। इसके बाद संगठन की जमीनी गतिविधियां काफी सीमित हो गईं।
इसी वजह से अब संगठन कथित तौर पर डिजिटल माध्यमों के जरिए अपनी विचारधारा फैलाने और समर्थकों से संपर्क बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
डिजिटल प्रोपेगैंडा पर क्यों बढ़ा जोर?
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, हाल के महीनों में सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और अन्य ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कर भ्रामक सामग्री प्रसारित करने की कोशिशें देखी गई हैं।
इन गतिविधियों का उद्देश्य कथित तौर पर:
- युवाओं को गुमराह करना।
- फर्जी या संपादित (डॉक्टर्ड) वीडियो के जरिए गलत नैरेटिव फैलाना।
- समर्थकों का मनोबल बनाए रखना।
- नए लोगों को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने का प्रयास करना।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म आतंकवादी संगठनों के लिए कम लागत और तेज पहुंच वाला माध्यम बन सकता है, इसलिए साइबर निगरानी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
क्या है कथित नई रणनीति?
खुफिया सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां निम्नलिखित पहलुओं पर नजर रख रही हैं—
- सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो और भ्रामक सामग्री का प्रसार।
- सुरक्षा बलों के खिलाफ झूठे मानवाधिकार नैरेटिव तैयार करने की कोशिश।
- स्थानीय स्तर पर युवाओं को प्रभावित करने वाले ऑनलाइन संदेश।
- सीमा पार से संचालित डिजिटल नेटवर्क और समन्वित प्रचार अभियान।
हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है।
मसूद अजहर को लेकर क्या चर्चा है?
जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को लेकर भी कई तरह की अटकलें सामने आती रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से वह सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
कुछ रिपोर्टों में उसके बीमार होने और सुरक्षित स्थान पर रहने के दावे किए गए हैं, लेकिन इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उसकी वर्तमान स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क
भारत की सुरक्षा एजेंसियां इंटरनेट आधारित कट्टरपंथी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख रही हैं। साइबर सेल, खुफिया एजेंसियां और कानून प्रवर्तन संस्थाएं संदिग्ध ऑनलाइन नेटवर्क, फर्जी अकाउंट और भ्रामक प्रचार सामग्री की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवाद का स्वरूप लगातार बदल रहा है। जहां पहले घुसपैठ और हथियारों के जरिए खतरा पैदा किया जाता था, वहीं अब डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
सावधानी और जागरूकता जरूरी
सुरक्षा विशेषज्ञ नागरिकों से अपील करते हैं कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले किसी भी वीडियो, संदेश या दावे पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। संदिग्ध सामग्री मिलने पर संबंधित प्लेटफॉर्म या प्रशासन को इसकी सूचना देना जरूरी है।

