नई दिल्ली: देशभर में चर्चा का विषय बने राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक नया मोड़ सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में दावा किया है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और वह पूरी तरह बेगुनाह हैं। वहीं, मेघालय सरकार ने उन्हें मिली जमानत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार से गिरफ्तारी के आधार (Grounds of Arrest) से जुड़े दस्तावेज अदालत में पेश करने को कहा है। अदालत अब यह तय करेगी कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया कानून के अनुसार हुई थी या नहीं।
क्या है पूरा मामला?
राजा रघुवंशी हत्याकांड देश के चर्चित मामलों में शामिल है। इस मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को निचली अदालत से जमानत मिल चुकी है। अदालत ने माना था कि गिरफ्तारी के समय उन्हें कानून के अनुसार गिरफ्तारी के स्पष्ट आधार उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
इसी आदेश को चुनौती देते हुए मेघालय सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। सरकार का कहना है कि गिरफ्तारी के आधार आरोपी को बताए गए थे, लेकिन दस्तावेज में केवल एक टाइपिंग त्रुटि रह गई थी।
मेघालय सरकार ने क्या कहा?
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि गिरफ्तारी से संबंधित दस्तावेज में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) की जगह गलती से धारा 403(1) लिख दी गई थी, जबकि ऐसी कोई धारा अस्तित्व में ही नहीं है।
सरकार का कहना है कि यह केवल तकनीकी त्रुटि थी और इससे गिरफ्तारी की वैधता प्रभावित नहीं होती। इसी आधार पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से सोनम की जमानत रद्द करने की मांग की है।
सोनम रघुवंशी ने हलफनामे में क्या कहा?
सोनम रघुवंशी ने अपने हलफनामे में कहा कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उन्होंने अदालत को बताया कि वह जांच और ट्रायल में लगातार सहयोग कर रही हैं और कार्यवाही में किसी भी प्रकार की देरी के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें 27 अप्रैल 2026 को जमानत मिली थी और अगले दिन जेल से रिहा कर दिया गया था। ऐसे में बिना किसी नए कानूनी आधार के उनकी जमानत रद्द करना उचित नहीं होगा।
सोनम का कहना है कि कानून के अनुसार जमानत रद्द करने के लिए ठोस परिस्थितियां होनी चाहिए, जो इस मामले में मौजूद नहीं हैं।
पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
इससे पहले हुई सुनवाई में सोनम की ओर से पेश अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि गिरफ्तारी के समय न तो उन्हें किसी वकील की सहायता उपलब्ध कराई गई और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट कारण बताए गए।
वकील का दावा था कि पुलिस ने केवल एक खाली प्रोफॉर्मा उपलब्ध कराया था, जिससे आरोपी अपने अधिकारों की जानकारी नहीं प्राप्त कर सकी।
हालांकि, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाते हुए पूछा था कि यदि यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण था तो इसे पहले अदालत के सामने क्यों नहीं उठाया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि यदि जमानत केवल तकनीकी आधार पर दी गई है, तो क्या कानून पुलिस को दोबारा वैधानिक प्रक्रिया अपनाकर गिरफ्तारी करने से रोकता है?
अदालत ने फिलहाल कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है और मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की है।
अब किन बिंदुओं पर होगी सुनवाई?
आगामी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट मुख्य रूप से इस बात की जांच करेगा कि—
- क्या सोनम रघुवंशी को गिरफ्तारी के समय कानून के अनुसार गिरफ्तारी के आधार बताए गए थे?
- क्या दस्तावेज में हुई टाइपिंग की गलती केवल तकनीकी त्रुटि थी या इससे गिरफ्तारी अवैध हो जाती है?
- क्या जमानत रद्द करने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद हैं?
इन सवालों के जवाब के आधार पर अदालत आगे का फैसला सुनाएगी।
मामले पर बनी हुई है देशभर की नजर
राजा रघुवंशी हत्याकांड पहले से ही देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल इस मामले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया और आरोपी के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं को भी प्रभावित कर सकता है।
राजा रघुवंशी हत्याकांड में सोनम रघुवंशी के हलफनामे ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। जहां एक ओर उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए झूठा फंसाए जाने का दावा किया है, वहीं मेघालय सरकार उनकी जमानत रद्द कराने पर अड़ी हुई है। अब सभी की निगाहें 14 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित मामले में महत्वपूर्ण कानूनी सवालों पर फैसला हो सकता है।

