पश्चिम बंगाल: की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ी राहत देते हुए पार्टी के फ्रीज किए गए बैंक खातों से सीमित वित्तीय लेन-देन की अनुमति दे दी है। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि खातों से निकासी पूरी तरह न्यायालय द्वारा नियुक्त स्पेशल ऑफिसर की निगरानी में ही होगी।
यह मामला उस समय और अधिक चर्चा में आ गया जब सोशल मीडिया पर ममता बनर्जी का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह कथित तौर पर एक पार्टी कार्यकर्ता को थप्पड़ मारती नजर आ रही हैं। इस वीडियो को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है, जबकि टीएमसी ने इसे सामान्य राजनीतिक घटना बताया है।
440 करोड़ रुपये के बैंक खाते क्यों हुए थे फ्रीज?
जानकारी के अनुसार, TMC के HDFC बैंक में मौजूद तीन खातों में करीब 440 करोड़ रुपये जमा हैं। पार्टी के भीतर उभरे विवाद के बाद बागी नेताओं और पूर्व पदाधिकारियों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि इन खातों में मौजूद रकम कथित तौर पर अवैध वसूली और विभिन्न घोटालों से जुड़ी हो सकती है।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए खातों को फ्रीज कर दिया। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू कर दी।
हाईकोर्ट ने क्या राहत दी?
कलकत्ता हाईकोर्ट की जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने कहा कि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के नियमित कामकाज को पूरी तरह बाधित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने आदेश दिया कि TMC अपने कर्मचारियों के वेतन, कार्यालय संचालन और अन्य आवश्यक दैनिक खर्चों के लिए बैंक खातों से धन निकाल सकती है। हालांकि, यह निकासी केवल अदालत द्वारा नियुक्त स्पेशल ऑफिसर की निगरानी में होगी।
इसके लिए हाईकोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुब्रत तालुकदार को स्पेशल ऑफिसर नियुक्त किया है। यह व्यवस्था 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।
बड़े लेन-देन पर अब भी रोक
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल नियमित प्रशासनिक और आवश्यक खर्चों के लिए है। पार्टी को किसी भी बड़े वित्तीय लेन-देन की अनुमति नहीं होगी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस आदेश का अर्थ यह नहीं है कि ममता बनर्जी गुट को “असली” तृणमूल कांग्रेस घोषित कर दिया गया है। पार्टी की वास्तविक मान्यता का फैसला भारत निर्वाचन आयोग करेगा।
कोर्ट ने पुलिस और ED से भी पूछे सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई की टाइमिंग पर सवाल उठाए।
अदालत ने पूछा कि FIR दर्ज होने के तुरंत बाद बैंक खाते फ्रीज करने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? कोर्ट ने संकेत दिया कि जांच एजेंसियों को कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।
TMC की ओर से क्या दलील दी गई?
पार्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में कहा कि बैंक खाते फ्रीज होने से पार्टी का पूरा प्रशासनिक ढांचा प्रभावित हो गया था।
उन्होंने दलील दी कि कर्मचारियों का वेतन, कार्यालयों का संचालन और अन्य जरूरी गतिविधियां पूरी तरह रुक गई थीं। उनके अनुसार यह कार्रवाई संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का उल्लंघन है।
ED के आरोप क्या हैं?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि TMC के खातों से केयरवेल एविएशन नामक कंपनी को करीब 160 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।
जांच एजेंसी का कहना है कि यह भुगतान चार्टर्ड विमान और हेलीकॉप्टर से जुड़े लेन-देन में किया गया था और पूरे मामले की मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच जारी है।
हालांकि अभी तक अदालत ने इन आरोपों पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है और जांच जारी है।
थप्पड़ वाले वीडियो पर सियासत तेज
इस बीच सोशल मीडिया पर ममता बनर्जी का एक वीडियो वायरल हो गया, जिसमें वह कथित रूप से एक पार्टी कार्यकर्ता को थप्पड़ मारती दिखाई दे रही हैं।
इस वीडियो को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए, जबकि TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि ममता बनर्जी अपने कार्यकर्ताओं के बेहद करीब हैं और उनके साथ पारिवारिक संबंधों जैसा व्यवहार करती हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए और पार्टी कार्यकर्ता इसे सामान्य रूप से लेते हैं।
राजनीतिक असर भी रहेगा अहम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला TMC को प्रशासनिक राहत जरूर देता है, लेकिन 440 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय विवाद और ED की जांच अभी भी जारी है।
ऐसे में आने वाले समय में अदालत, जांच एजेंसियों और निर्वाचन आयोग के फैसले पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकते हैं।

