गांधीनगर: गुजरात सरकार ने राज्य को देश का सबसे बड़ा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने नई गुजरात डेटा सेंटर पॉलिसी की घोषणा करते हुए बताया कि राज्य को अब तक लगभग 6 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इन निवेशों के माध्यम से लगभग 10 गीगावॉट क्षमता वाले अत्याधुनिक डेटा सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जिससे गुजरात डिजिटल अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनने की ओर तेजी से बढ़ेगा।
सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल बैंकिंग, ई-कॉमर्स और सरकारी डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विस्तार करेगा। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए गुजरात ने दीर्घकालिक नीति तैयार की है।
धोलेरा बनेगा देश का नया डेटा सेंटर हब
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि जिस तरह साणंद आज सेमीकंडक्टर निर्माण का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है, उसी प्रकार धोलेरा को देश का प्रमुख डेटा सेंटर हब विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गुजरात पहले से ही औद्योगिक विकास, निवेश और आधुनिक बुनियादी ढांचे के लिए देशभर में पहचान बना चुका है। अब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी राज्य अग्रणी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल बड़े निवेश आकर्षित करना नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना भी है। इसी कारण “जीरो डिफेक्ट और ग्रीन डेवलपमेंट” की अवधारणा को नीति का आधार बनाया गया है।

समुद्र के पानी से होगी जल आपूर्ति
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने बताया कि डेटा सेंटरों के संचालन के लिए बड़ी मात्रा में पानी और बिजली की आवश्यकता होती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए समुद्र के पानी को डिसेलिनेशन (लवण हटाने की प्रक्रिया) के माध्यम से उपयोग योग्य बनाया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए किसानों या आम नागरिकों के हिस्से का पानी और बिजली नहीं दी जाएगी। उद्योगों को आवश्यक संसाधन अलग व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि कृषि और घरेलू जरूरतों पर कोई असर न पड़े।
51 प्रतिशत ऊर्जा होगी ग्रीन एनर्जी
नई नीति के तहत प्रत्येक डेटा सेंटर परियोजना के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि उसकी कुल ऊर्जा आवश्यकता का कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सा ग्रीन एनर्जी से पूरा किया जाए। सरकार का उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन कम करना और स्वच्छ ऊर्जा आधारित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम गुजरात को पर्यावरण अनुकूल डेटा सेंटर स्थापित करने वाले अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल कर सकता है।
GIFT City और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधीनगर स्थित GIFT City पहले ही भारत के वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में तेजी से विकसित हो रही है। डेटा सेंटरों की स्थापना से वित्तीय सेवाओं, डिजिटल बैंकिंग, फिनटेक कंपनियों और क्लाउड आधारित सेवाओं को मजबूत आधार मिलेगा।
इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा और गुजरात वैश्विक डिजिटल कंपनियों के लिए आकर्षक गंतव्य बन सकता है।
10 गीगावॉट क्षमता वाले डेटा सेंटर
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने बताया कि राज्य को अभी तक लगभग 10 गीगावॉट क्षमता वाले डेटा सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि एक गीगावॉट क्षमता के डेटा सेंटर पर लगभग 75 हजार करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश हो सकता है।
यदि सभी प्रस्ताव धरातल पर उतरते हैं तो गुजरात में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में ऐतिहासिक निवेश देखने को मिलेगा। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर सरकार का फोकस
हर्ष संघवी ने कहा कि आने वाले समय में डेटा सेंटर किसी भी आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेंगे। उनका कहना था कि जो राज्य अभी इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने में पीछे रह जाएगा, उसे भविष्य में प्रतिस्पर्धा करना कठिन होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, डेटा सेंटर उद्योग केवल आईटी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दूरसंचार, बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा, ई-कॉमर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल गवर्नेंस जैसे अनेक क्षेत्रों को भी मजबूती प्रदान करता है।

