नई दिल्ली: देशभर में मानसून ने तय समय से पहले दस्तक देकर पूरे भारत को अपनी चपेट में ले लिया है, लेकिन अब मौसम के बदलते संकेत नई चिंता पैदा कर रहे हैं। ताजा सैटेलाइट तस्वीरों में पश्चिम भारत के कई राज्यों से मानसूनी बादल लगभग गायब दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने बिहार और झारखंड के कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल मध्य भारत में मानसून सबसे अधिक सक्रिय है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के अधिकांश हिस्सों में घने बादलों का जमाव बना हुआ है, जिससे लगातार बारिश हो रही है। इसके विपरीत राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी भारत के कुछ अन्य हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ गई हैं और आने वाले दिनों में यहां अच्छी बारिश की संभावना कम दिखाई दे रही है।
सुपर टायफून ‘बावी’ बना चिंता की वजह
देश के मानसून पर असर डालने वाला सबसे बड़ा कारण फिलीपींस के पास प्रशांत महासागर में बना सुपर टायफून ‘बावी’ माना जा रहा है। यह शक्तिशाली तूफान ताइवान और चीन की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इसका प्रभाव हजारों किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी तक महसूस किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक जब तक यह सुपर टायफून चीन की ओर आगे नहीं बढ़ जाता, तब तक बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना कम रहेगी। यही कारण है कि अगले दो से तीन दिनों में देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। व्यापक और अच्छी बारिश के लिए लोगों को लगभग एक सप्ताह तक इंतजार करना पड़ सकता है।

पूरे देश में पहुंचा मानसून
इस वर्ष मानसून ने सामान्य से तेज गति दिखाई है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून ने पूरे देश को केवल 36 दिनों में कवर कर लिया, जबकि सामान्य तौर पर इसमें लगभग 38 दिन लगते हैं। हालांकि अब इसकी सक्रियता में कमी आने की आशंका जताई जा रही है।
बिहार और झारखंड में भारी बारिश का खतरा
पूर्वी भारत में लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। बिहार और झारखंड में कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। प्रशासन को सतर्क रहने और निचले इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तराखंड और हिमाचल में आफत
उत्तराखंड में लगातार बारिश के कारण अलकनंदा नदी उफान पर है। उत्तरकाशी में यमुनोत्री हाईवे का लगभग 100 मीटर हिस्सा भूस्खलन की वजह से बह गया, जिससे करीब एक हजार यात्री प्रभावित हुए। पिथौरागढ़ में भी चट्टानें गिरने के कारण आदि कैलाश मार्ग बंद हो गया है।
हरिद्वार में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से कई स्थानों पर जलभराव देखा गया। वहीं ऋषिकेश में तेज बहाव के बीच एक स्कूटी सवार नदी पार करते समय फंस गया, जिसे स्थानीय लोगों ने सुरक्षित बाहर निकाला।
हिमाचल प्रदेश के शिमला में लगातार बारिश के चलते एक रिटेनिंग वॉल का हिस्सा ढह गया। वहीं बनमोर इलाके में पेड़ गिरने से यातायात कुछ समय के लिए बाधित रहा।
दिल्ली और उत्तर प्रदेश में बारिश का असर
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 घंटे के दौरान कई इलाकों में भारी बारिश दर्ज की गई। विकास मार्ग, गाजीपुर मंडी, संगम विहार, द्वारका और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास जलभराव की स्थिति बन गई। कई स्थानों पर पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित हुआ।
उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी तेज बारिश के चलते कई हादसे सामने आए। अलग-अलग घटनाओं में कई लोगों की जान गई, जबकि बिजली गिरने, दीवार गिरने और नदी में बहने जैसी घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी।
पश्चिम भारत में बारिश कमजोर
राजस्थान और गुजरात में फिलहाल मानसूनी बादलों की कमी साफ दिखाई दे रही है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि खरीफ फसलों की बुआई के लिए नियमित बारिश बेहद जरूरी मानी जाती है। यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश नहीं हुई तो कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
रेल सेवाओं पर भी असर
महाराष्ट्र में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण मुंबई-पुणे रेल मार्ग प्रभावित हुआ है। रेलवे ने 10 से 17 जुलाई तक करीब 30 ट्रेनों को रद्द कर दिया है। कई अन्य ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हुआ है।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
देश के कई राज्यों में बाढ़, जलभराव, भूस्खलन और तेज बारिश की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय कर दिया है। लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है।

