उत्तर प्रदेश: के फिरोजाबाद जिले में साइबर अपराध से जुड़े एक गंभीर मामले का खुलासा हुआ है। पुलिस ने एक बीएससी छात्र को गिरफ्तार किया है, जिस पर टेलीग्राम प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाल यौन शोषण से संबंधित अवैध सामग्री (Child Sexual Abuse Material – CSAM) बेचने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई Google की सहयोगी संस्था द्वारा साझा की गई सूचना और तकनीकी जांच के आधार पर की गई।
यह मामला इंटरनेट के दुरुपयोग और बच्चों से जुड़े यौन शोषण संबंधी सामग्री के अवैध प्रसार के खिलाफ चल रही कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
पुलिस के अनुसार, नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन (NCMEC) से प्राप्त सूचना के आधार पर मामले की जांच शुरू की गई। तकनीकी विश्लेषण में पता चला कि फिरोजाबाद निवासी एक युवक टेलीग्राम पर ग्रुप बनाकर बाल यौन शोषण से संबंधित अवैध सामग्री साझा और बेच रहा था।
जांच के दौरान डिजिटल गतिविधियों, ऑनलाइन लेनदेन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया, जिसके बाद आरोपी की पहचान हुई।
₹200 में अवैध सामग्री बेचने का आरोप
पुलिस जांच में आरोप है कि आरोपी ग्राहकों को मात्र ₹200 में अवैध सामग्री उपलब्ध कराने का लालच देता था। भुगतान के लिए वह यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग करता था।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से संभावित ग्राहकों तक पहुंचता था और भुगतान प्राप्त होने के बाद डिजिटल माध्यम से सामग्री साझा करता था। इन आरोपों की आगे विस्तृत जांच जारी है।
मोबाइल से मिले 10 हजार से अधिक डिजिटल कंटेंट
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए। अधिकारियों के अनुसार, मोबाइल की जांच में 10 हजार से अधिक डिजिटल फाइलें और ऑनलाइन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड मिले हैं।
अब साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की विस्तृत जांच कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

आईटी एक्ट और POCSO के तहत मामला दर्ज
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) तथा POCSO Act की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पूछताछ के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
अधिकारियों का कहना है कि मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
साइबर अपराध के खिलाफ बढ़ रही निगरानी
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों से जुड़े यौन शोषण संबंधी सामग्री का निर्माण, संग्रह, खरीद, बिक्री, साझा करना या डाउनलोड करना गंभीर अपराध है। ऐसी गतिविधियों की निगरानी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लगातार करती हैं।
इंटरनेट प्लेटफॉर्म और तकनीकी कंपनियां भी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी संबंधित जांच एजेंसियों के साथ साझा करती हैं, जिसके आधार पर पुलिस कार्रवाई करती है।
पुलिस की लोगों से अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण संबंधी कोई संदिग्ध सामग्री दिखाई दे, तो उसे आगे साझा न करें। इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल पर दें।
अधिकारियों ने कहा कि ऐसी सामग्री का प्रसार न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि इससे पीड़ित बच्चों को दोबारा नुकसान पहुंचता है।

