सूरत: आज के समय में जहां अक्सर बेईमानी और धोखाधड़ी की खबरें सुर्खियां बनती हैं, वहीं गुजरात के सूरत से सामने आई एक घटना ने लोगों का इंसानियत पर भरोसा और मजबूत कर दिया है। हाल ही में शहर में हुई भारी बारिश और बाढ़ के बाद एक गरीब मजदूर ने ऐसी ईमानदारी दिखाई, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है।
जहांगीरपुरा इलाके में रहने वाले गौतमभाई देवीपूजक ने बाढ़ के पानी में बहकर आई करीब 50 वाहनों की नंबर प्लेटें इकट्ठा कीं। उन्हें अपने पास रखने या फेंकने के बजाय उन्होंने तय किया कि ये प्लेटें उनके असली मालिकों तक पहुंचाई जाएंगी। आज उनकी इसी सोच और ईमानदारी की सोशल मीडिया पर जमकर सराहना हो रही है।
बाढ़ के बाद मिला जिम्मेदारी निभाने का मौका
सूरत में हाल की भारी बारिश के दौरान कई इलाकों में जलभराव हो गया था। तेज बहाव में अनेक दोपहिया और चारपहिया वाहनों की नंबर प्लेटें टूटकर पानी में बह गईं।
जब पानी उतरने लगा, तब जहांगीरपुरा बॉटनिकल गार्डन के पास फुटपाथ पर रहने वाले गौतमभाई को एक-एक कर कई नंबर प्लेटें दिखाई दीं। उन्होंने बताया कि रात करीब 11 बजे तक उन्हें लगभग 40 से 50 नंबर प्लेटें मिल चुकी थीं।
गौतमभाई चाहते तो इन्हें कबाड़ समझकर फेंक सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने सभी प्लेटों को सुरक्षित रख लिया ताकि उनके असली मालिकों तक पहुंचाया जा सके।
सोशल मीडिया ने बनाई लोगों तक पहुंच
गौतमभाई के इस नेक काम को लोगों तक पहुंचाने में विवेक अशोकभाई भवानिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जब विवेक की नजर गौतमभाई के पास रखी नंबर प्लेटों के ढेर पर पड़ी तो उन्होंने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। देखते ही देखते यह वीडियो वायरल हो गया।
वीडियो वायरल होने के बाद कई लोग अपनी खोई हुई नंबर प्लेट की तलाश में गौतमभाई से संपर्क करने लगे। सोशल मीडिया ने इस नेक कार्य को हजारों लोगों तक पहुंचा दिया।
बिना जांच किसी को नहीं सौंपते नंबर प्लेट
गौतमभाई केवल नंबर प्लेट लौटाने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा है।
उन्होंने तय किया कि कोई भी व्यक्ति बिना पहचान के नंबर प्लेट नहीं ले जाएगा।
इसके लिए वे वाहन मालिक से—
- आरसी बुक (RC Book)
- वाहन का विवरण
- नंबर का मिलान
करने के बाद ही नंबर प्लेट वापस करते हैं।
इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नंबर प्लेट किसी गलत व्यक्ति के हाथ न लगे और उसका किसी प्रकार के अवैध या आपराधिक कार्य में इस्तेमाल न हो।
एक रुपये भी नहीं ले रहे मजदूर
सबसे खास बात यह है कि गौतमभाई इस काम के बदले किसी से एक रुपया भी नहीं ले रहे हैं।
वह पूरी तरह नि:स्वार्थ भाव से लोगों की मदद कर रहे हैं।
विवेक भवानिया ने बताया कि उन्होंने गौतमभाई को विशेष रूप से सलाह दी थी कि बिना आरसी बुक देखे किसी को नंबर प्लेट न दें। गौतमभाई ने इस सलाह का पूरी जिम्मेदारी के साथ पालन किया।
मानवता की मिसाल बना यह काम
फुटपाथ पर रहकर मेहनत-मजदूरी करने वाले गौतमभाई की आर्थिक स्थिति भले ही साधारण हो, लेकिन उनके विचार और ईमानदारी ने लोगों का दिल जीत लिया है।
सोशल मीडिया पर लोग उनकी जमकर प्रशंसा कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि आज के दौर में जहां छोटी-छोटी चीजों के लिए भी लोग गलत रास्ता अपना लेते हैं, वहीं गौतमभाई ने साबित कर दिया कि ईमानदारी और इंसानियत किसी आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती।
बाढ़ के बाद राहत की एक सकारात्मक कहानी
भारी बारिश और बाढ़ की घटनाओं के बीच यह खबर लोगों के लिए राहत और उम्मीद का संदेश लेकर आई है।
जहां एक ओर कई परिवारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, वहीं गौतमभाई जैसे लोगों ने समाज में भरोसा और सहयोग की भावना को मजबूत किया है।
उनकी यह पहल न केवल वाहन मालिकों की परेशानी कम कर रही है, बल्कि यह भी दिखाती है कि संकट के समय छोटे-छोटे प्रयास भी किसी के लिए बड़ी मदद साबित हो सकते हैं।

