मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट की सुलह की पहल फिलहाल सफल होती नहीं दिख रही है। सर्वोच्च अदालत ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन प्रारंभिक स्तर पर किसी भी पक्ष ने समझौते के संकेत नहीं दिए हैं।
हिंदू पक्ष का कहना है कि वह अदालत के माध्यम से पूरे विवादित क्षेत्र पर अपना दावा साबित करेगा, जबकि शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी का कहना है कि वर्ष 1968 के समझौते के बाद नए सिरे से किसी समझौते की आवश्यकता नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह परिसर को लेकर कई वर्षों से न्यायालय में विभिन्न याचिकाएं लंबित हैं।
इसी क्रम में दायर एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) में दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की संभावना तलाशने का अनुरोध किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध पर विचार करते हुए मामला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को भेजा, ताकि बातचीत के जरिए समाधान की संभावना देखी जा सके।
पहली बैठक में नहीं पहुंचा ईदगाह पक्ष
प्राधिकरण के समक्ष 4 जुलाई को सुनवाई निर्धारित की गई थी, लेकिन शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ।
कमेटी के सचिव ने लिखित रूप में प्राधिकरण को सूचित किया कि यह मामला लोक अदालत या सुलह प्रक्रिया के लिए उपयुक्त नहीं है और इसे उस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
हिंदू पक्ष का स्पष्ट रुख
मामले में याचिकाकर्ताओं ने भी अपने-अपने रुख स्पष्ट कर दिए हैं।
एक याचिकाकर्ता अधिवक्ता ने कहा कि उनका पक्ष अदालत के माध्यम से पूरे विवादित क्षेत्र पर अपना दावा पेश करेगा और समझौते के पक्ष में नहीं है।
दूसरे याचिकाकर्ता ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बुलाई गई वार्ता में शामिल होना पड़ा तो वे जाएंगे, लेकिन उनका उद्देश्य केवल कानूनी प्रक्रिया में भाग लेना होगा, समझौता करना नहीं।
कुछ अन्य याचिकाकर्ताओं ने भी कहा कि वे पूरे विवादित क्षेत्र पर अपना दावा बनाए रखेंगे।

ईदगाह कमेटी ने क्यों किया इनकार?
शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी का कहना है कि वर्ष 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और ईदगाह कमेटी के बीच समझौता हो चुका था, जिसे न्यायालय की स्वीकृति भी प्राप्त है।
कमेटी का तर्क है कि जब पहले से कानूनी समझौता मौजूद है, तब नए सिरे से किसी समझौते की आवश्यकता नहीं है।
इसी आधार पर कमेटी ने वर्तमान मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार किया है।
अगस्त में होगी अगली प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट की ओर से समझौते की संभावनाओं पर विचार करने के लिए 21, 22 और 23 अगस्त की तिथियां तय की गई हैं।
इन तारीखों पर यदि संबंधित पक्ष उपस्थित होते हैं तो बातचीत की संभावना पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए किसी सहमति की संभावना फिलहाल सीमित दिखाई दे रही है।
मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन
श्रीकृष्ण जन्मस्थान-शाही मस्जिद ईदगाह विवाद से संबंधित विभिन्न याचिकाएं अलग-अलग अदालतों में लंबित हैं।
वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट केवल सुलह की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। मामले के स्वामित्व, धार्मिक दावों या अन्य कानूनी प्रश्नों पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं दिया गया है।
आगे क्या होगा?
यदि दोनों पक्ष मध्यस्थता प्रक्रिया में भाग नहीं लेते या सहमति नहीं बनती, तो मामला नियमित न्यायिक सुनवाई के माध्यम से आगे बढ़ेगा।
अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय द्वारा सभी कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर विचार करने के बाद ही दिया जाएगा।
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान-शाही मस्जिद ईदगाह विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की पहल की है, लेकिन फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। हिंदू पक्ष पूरे क्षेत्र पर दावा कर रहा है, जबकि ईदगाह कमेटी 1968 के समझौते को अंतिम मानते हुए नई वार्ता से इनकार कर रही है। अब सभी की नजर अगस्त में प्रस्तावित प्रक्रिया और आगे की न्यायिक सुनवाई पर टिकी रहेगी।

