मथुरा: उत्तर प्रदेश के धार्मिक शहर मथुरा-वृंदावन में मंगलवार सुबह उस समय राजनीतिक माहौल अचानक गर्मा गया, जब शहर के प्रमुख स्थानों पर समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के विवादित पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टरों पर लिखे गए नारे और नेताओं की तस्वीरों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पोस्टरों को तत्काल हटवा दिया। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है।
बताया जा रहा है कि गोवर्धन चौराहे के पास हाईवे और एफसीआई क्षेत्र में लगाए गए पोस्टरों में सपा नेताओं को एक विशेष प्रकार की टोपी पहने हुए दिखाया गया था। पोस्टरों पर “दिल में बाबर, मुंह में राम” जैसे विवादित और आपत्तिजनक नारे भी लिखे गए थे। सुबह राहगीरों की नजर जैसे ही इन पोस्टरों पर पड़ी, लोगों ने उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करना शुरू कर दिया, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया।
सोशल मीडिया पर वायरल होते ही बढ़ा विवाद
कुछ ही घंटों में पोस्टरों की तस्वीरें विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गईं। पोस्टरों को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कई लोगों ने इसे राजनीतिक उकसावे की कोशिश बताया, जबकि कुछ ने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की।
पोस्टरों के वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई। प्रशासन को आशंका थी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
सपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी
घटना की जानकारी मिलते ही समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में नाराजगी फैल गई। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि यह समाजवादी पार्टी की छवि खराब करने और राजनीतिक माहौल को बिगाड़ने की सुनियोजित कोशिश है।
सपा नेताओं ने प्रशासन से दोषियों की जल्द पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन इस तरह के आपत्तिजनक पोस्टर लगाकर सामाजिक और राजनीतिक माहौल खराब करना उचित नहीं है।

पुलिस ने तुरंत हटवाए पोस्टर
सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस टीम गोवर्धन चौराहा और एफसीआई क्षेत्र पहुंची। अधिकारियों ने विवादित पोस्टरों को तुरंत हटवाया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि पोस्टर किसने लगाए और इन्हें कब लगाया गया। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि पोस्टर देर रात लगाए गए होंगे। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।
सपा जिलाध्यक्ष ने क्या कहा?
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह पार्टी नेतृत्व की छवि खराब करने का एक सुनियोजित प्रयास है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारों का मतभेद होना सामान्य बात है, लेकिन इस तरह के भड़काऊ पोस्टर लगाकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग भी की।
अन्य जिलों में भी सामने आए ऐसे मामले
जानकारी के अनुसार, इसी तरह के विवादित पोस्टर उत्तर प्रदेश के अयोध्या और बाराबंकी जिलों में भी लगाए जाने की चर्चाएं सामने आई हैं। हालांकि स्थानीय प्रशासन अपने-अपने स्तर पर इन मामलों की जांच कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए इस तरह की घटनाएं राजनीतिक तनाव बढ़ा सकती हैं। इसलिए प्रशासन ऐसे मामलों को गंभीरता से लेकर जांच कर रहा है।
जांच के कई पहलुओं पर काम
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पोस्टर किसी संगठन, राजनीतिक समूह या किसी शरारती तत्व द्वारा लगाए गए हैं। इसके लिए घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, पोस्टर प्रिंट कराने वाले संभावित स्थानों और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि दोषियों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
मथुरा-वृंदावन में लगाए गए विवादित पोस्टरों ने एक बार फिर राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पोस्टर हटवा दिए हैं और मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पोस्टर लगाने के पीछे किसका हाथ है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

