त्विषा शर्मा केस में जांच ने पकड़ी नई रफ्तार, वॉयस सैंपल पर अड़े आरोपी
भोपाल: के बहुचर्चित त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में जांच एक बार फिर अहम मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा मामले की जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपी समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह, ने अदालत के आदेश के बावजूद अपना वॉयस सैंपल देने से इनकार कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद भोपाल जिला अदालत ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत 28 जुलाई तक बढ़ा दी है।
यह मामला पहले से ही पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है और अब वॉयस सैंपल को लेकर सामने आए घटनाक्रम ने जांच को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
CBI की टीम जेल पहुंची, लेकिन नहीं मिला सहयोग
अदालत में हुई सुनवाई के दौरान CBI ने बताया कि 6 जुलाई को उसकी टीम भोपाल केंद्रीय जेल पहुंची थी। टीम का उद्देश्य अदालत के आदेश के अनुरूप दोनों आरोपियों के वॉयस सैंपल लेना था।
CBI के अनुसार शुरुआत में दोनों आरोपी सहयोग करने से बचते रहे। बाद में समर्थ सिंह ने स्पष्ट रूप से वॉयस सैंपल देने से इनकार कर दिया।
वहीं गिरिबाला सिंह ने पहले वॉयस सैंपल तो दिया, लेकिन जांच एजेंसी के अनुसार रिकॉर्ड की गई आवाज उनकी सामान्य आवाज से मेल नहीं खा रही थी। अधिकारियों ने दोबारा वास्तविक आवाज में सैंपल देने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने भी अस्वीकार कर दिया।
इसके बाद CBI ने अदालत में आवेदन देकर दोनों आरोपियों के वॉयस सैंपल दोबारा लेने की अनुमति मांगी है।
28 जुलाई तक बढ़ी न्यायिक हिरासत
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई पेशी के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत 28 जुलाई तक बढ़ा दी।
अब अगली सुनवाई में अदालत CBI के नए आवेदन और जांच की प्रगति पर विचार कर सकती है।

दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब भी लंबित
मामले की एक और महत्वपूर्ण कड़ी दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट है।
दिल्ली एम्स के मेडिकल बोर्ड द्वारा 24 मई को भोपाल एम्स में दूसरा पोस्टमार्टम कराया गया था। हालांकि उसकी अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट अब तक जिला अदालत के सामने प्रस्तुत नहीं हो सकी है।
बताया गया कि यह पोस्टमार्टम मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर कराया गया था, इसलिए रिपोर्ट सीधे जिला अदालत को नहीं भेजी गई।
उच्च न्यायालय से भी अब तक यह रिपोर्ट जिला अदालत तक नहीं पहुंची है, जिससे जांच की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
परिजनों ने मांगी पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रति
त्विषा शर्मा के परिवार की ओर से अदालत में पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने के लिए आवेदन दायर किया गया था।
परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि भोपाल एम्स ने सूचित किया है कि पोस्टमार्टम से जुड़े सभी दस्तावेज पहले ही CBI को सौंपे जा चुके हैं। ऐसे में अलग से रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।
वहीं दिल्ली एम्स की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।
चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में CBI
CBI सूत्रों के अनुसार एजेंसी इस मामले में उपलब्ध सभी साक्ष्यों, डिजिटल सबूतों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का गहन विश्लेषण कर रही है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद 25 मई को CBI ने इस केस की जांच अपने हाथ में ली थी।
अब एजेंसी वैधानिक 60 दिन की समयसीमा के भीतर आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल करने की तैयारी में जुटी हुई है ताकि आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत का लाभ न मिल सके।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्धारित समय के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होती है, तो आरोपी जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
देशभर की नजर इस केस पर
त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला शुरू से ही चर्चाओं में रहा है। हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही जांच, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, CBI की कार्रवाई और अब वॉयस सैंपल को लेकर सामने आए विवाद ने इस केस को और अधिक गंभीर बना दिया है।
अब सभी की निगाहें 28 जुलाई की अगली सुनवाई और CBI की चार्जशीट पर टिकी हुई हैं।
त्विषा शर्मा केस में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। वॉयस सैंपल देने से इनकार, लंबित पोस्टमार्टम रिपोर्ट और CBI की चार्जशीट की तैयारी इस मामले को और महत्वपूर्ण बना रही है। आने वाले दिनों में अदालत और जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई इस केस की दिशा तय कर सकती है।

