चंडीगढ़: संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले पंजाब की राजनीति में एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने सियासी हलकों में चर्चाओं का नया दौर शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी की चंडीगढ़ में हुई गर्मजोशी भरी मुलाकात अब राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी दलों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के दौरे पर थे। इसी दौरान चंडीगढ़ में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में उन्होंने मंच पर मौजूद कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी से हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत भी की। यह मुलाकात सामान्य शिष्टाचार का हिस्सा मानी जा रही है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
कांग्रेस में उपेक्षा के बाद बढ़ीं चर्चाएं
हाल ही में पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक फेरबदल के दौरान मनीष तिवारी को कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं मिली थी। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अप्रत्यक्ष रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने एक कहावत साझा करते हुए पार्टी के भीतर प्रतिभाशाली नेताओं की अनदेखी का संकेत दिया था।
उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक गलियारों में पहले से ही चर्चा थी कि कांग्रेस में उन्हें वह महत्व नहीं मिल रहा जिसकी वे अपेक्षा रखते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी गर्मजोशी भरी मुलाकात ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया।
मंच पर क्या हुआ?
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी मंच पर पहुंचे तो उन्होंने मौजूद गणमान्य लोगों का अभिवादन किया। इसी दौरान उन्होंने कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी से हाथ मिलाया, मुस्कुराते हुए कुछ देर बातचीत की और आगे बढ़ गए। मंच पर उस समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा समेत कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।
हालांकि इस बातचीत की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है कि दोनों नेताओं के बीच क्या चर्चा हुई, लेकिन तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए।
क्या बीजेपी के संपर्क में हैं मनीष तिवारी?
प्रधानमंत्री मोदी और मनीष तिवारी की मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। कुछ लोगों ने इसे सामान्य शिष्टाचार बताया, जबकि कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे भविष्य की राजनीति से जोड़कर देखना शुरू कर दिया।
हालांकि अभी तक न तो भारतीय जनता पार्टी और न ही मनीष तिवारी की ओर से किसी राजनीतिक बदलाव या पार्टी परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। इसलिए ऐसे सभी दावे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकलें हैं।
कांग्रेस में लंबे समय से सक्रिय हैं मनीष तिवारी
मनीष तिवारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वे करीब 45 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले तिवारी ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
वे केंद्र की पूर्व यूपीए सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वे लुधियाना, आनंदपुर साहिब और वर्तमान में चंडीगढ़ से सांसद रह चुके हैं। संसद में उनकी पहचान एक प्रभावशाली वक्ता के रूप में भी होती है।
ऑपरेशन सिंदूर में भी निभाई थी भूमिका
हाल के दिनों में केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए “ऑपरेशन सिंदूर” प्रतिनिधिमंडल में भी मनीष तिवारी को शामिल किया गया था। इससे पहले भी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे कई अहम मुद्दों पर उनकी राय को महत्व दिया जाता रहा है।
पंजाब कांग्रेस में जारी है खींचतान
पंजाब कांग्रेस इस समय अंदरूनी खींचतान से गुजर रही है। संगठनात्मक नियुक्तियों और नेतृत्व को लेकर कई वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी सामने आ चुकी है। ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री मोदी और मनीष तिवारी की सार्वजनिक मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है।
हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में विभिन्न दलों के नेताओं का आपस में मिलना लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है और केवल मुलाकात के आधार पर किसी बड़े राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
