अहमदाबाद: गुजरात में आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत आतंकवाद रोधी दस्ता (ATS) ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से कथित तौर पर जुड़े पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई राज्य के अलग-अलग जिलों में एक समन्वित अभियान के तहत की गई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए संदिग्धों के संबंध पिछले महीने गिरफ्तार किए गए कुछ अन्य आरोपियों से होने की आशंका है। फिलहाल जांच एजेंसियां इनके संपर्कों, गतिविधियों और संभावित नेटवर्क की विस्तृत जांच कर रही हैं।
कौन-कौन हुए गिरफ्तार?
गुजरात एटीएस के अनुसार गिरफ्तार किए गए संदिग्धों की पहचान इस प्रकार की गई है—
- बिलाल आबिद शेरा
- मोहम्मद अयूब काडीवाल उर्फ मोहम्मद खड़ियासन
- मोहम्मद शफी मुखी उर्फ शफी चापी
- मोहम्मद हसन क. राडिया उर्फ हसन हैदरपुरी
- मोहम्मद अयूब सुमासरा उर्फ मोहम्मद खली
अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और उनके डिजिटल उपकरणों, संपर्कों तथा अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
पहले गिरफ्तार संदिग्धों से जुड़े होने की आशंका
एटीएस अधिकारियों के मुताबिक, इन पांचों संदिग्धों का संपर्क पिछले महीने गिरफ्तार किए गए आठ अन्य आरोपियों से होने की जानकारी सामने आई है। इसी आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई और विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर इन्हें हिरासत में लिया गया।
हालांकि, जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इनकी कथित भूमिका क्या थी तथा क्या किसी बड़े नेटवर्क से इनका संबंध था।
स्लीपर सेल की आशंका की जांच
जांच एजेंसियों का कहना है कि वे इस बात की भी जांच कर रही हैं कि क्या राज्य में किसी प्रकार का कथित स्लीपर सेल नेटवर्क सक्रिय करने का प्रयास किया जा रहा था।
एटीएस के अनुसार, संदिग्धों के मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का फॉरेंसिक विश्लेषण कराया जा रहा है। जांच के बाद ही किसी भी संभावित गतिविधि या नेटवर्क को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।
अधिकारी ने क्या कहा?
एटीएस के पुलिस उपाधीक्षक हर्ष उपाध्याय ने बताया कि पूर्व में गिरफ्तार किए गए संदिग्धों के संपर्क में आने वाले पांच व्यक्तियों को पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार किया गया है।
उन्होंने कहा कि जांच कई पहलुओं पर जारी है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल एजेंसी पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कार्रवाई
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकी संगठनों से जुड़े मामलों में समय रहते की गई कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां केवल गिरफ्तार व्यक्तियों की भूमिका ही नहीं बल्कि उनके संभावित संपर्कों, वित्तीय लेनदेन, संचार माध्यमों और अन्य नेटवर्क की भी गहन जांच करती हैं।
इसी कारण इस मामले में भी एटीएस विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर जांच कर रही है।
डिजिटल और तकनीकी जांच पर जोर
आधुनिक समय में आतंकी गतिविधियों की जांच में डिजिटल साक्ष्यों की अहम भूमिका होती है। इसलिए एटीएस संदिग्धों के मोबाइल फोन, लैपटॉप, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे और लोगों से पूछताछ या अतिरिक्त कार्रवाई भी की जा सकती है।
जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष बाकी
फिलहाल गिरफ्तार किए गए सभी संदिग्धों से पूछताछ जारी है। एजेंसियों का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इनकी कथित भूमिका क्या थी और किन-किन लोगों से इनके संपर्क थे।
किसी भी आरोपी के विरुद्ध आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगा।

