संसद के करीब पहुंचे प्रदर्शनकारी, अमित शाह से मिले धर्मेंद्र प्रधान; दिल्ली में सुरक्षा बढ़ी, जानिए पूरे घटनाक्रम की बड़ी बातें
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार को उस समय सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर आ गईं जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारी संसद भवन के बेहद करीब पहुंच गए। NEET पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित संसद मार्च ने दिल्ली की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था दोनों को प्रभावित किया।
इसी बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान संसद भवन में गृह मंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को और तेज कर दिया। हालांकि बैठक के विषय पर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इसे मौजूदा प्रदर्शन और संसद की सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संसद भवन के पास हाई अलर्ट, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
CJP के प्रदर्शनकारियों के संसद की ओर बढ़ने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल मोर्चा संभाल लिया। संसद भवन के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई और CISF ने गेट नंबर-1 को बंद कर दिया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की और हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तथा पैरामिलिट्री फोर्स तैनात की गई।
दिल्ली पुलिस ने पूरे इलाके में थ्री-टियर सिक्योरिटी ग्रिड लागू किया है। इसमें दिल्ली पुलिस की दो सुरक्षा परतों के साथ पैरामिलिट्री फोर्स की एक अतिरिक्त परत भी शामिल है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमें भी लगातार तैनात हैं।

धर्मेंद्र प्रधान ने अमित शाह से की मुलाकात
प्रदर्शन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान संसद भवन में गृह मंत्री अमित शाह के कक्ष में पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि सरकार की ओर से इस बैठक पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
जेपी नड्डा से बातचीत का दावा
CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया कि उन्हें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बातचीत के लिए बुलाया है। पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका बातचीत के लिए रवाना हुए। इससे पहले पार्टी ने कहा था कि यदि सरकार छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करती है तो बातचीत के लिए उनके दरवाजे खुले हैं।
क्या हैं CJP की प्रमुख मांगें?
CJP का कहना है कि देशभर में हुई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। संगठन की प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
- NEET और अन्य भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की निष्पक्ष जांच।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
- प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम समय पर घोषित किए जाएं।
- बेरोजगार युवाओं के लिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
- परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लागू किए जाएं।
दिल्ली पुलिस की एडवाइजरी और धारा 163 लागू
नई दिल्ली के डीसीपी ने स्पष्ट किया कि संसद मार्च के लिए किसी प्रकार की अनुमति नहीं दी गई थी। मानसून सत्र को देखते हुए नई दिल्ली क्षेत्र में BNSS की धारा 163 लागू है, जिसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने या विरोध प्रदर्शन पर रोक है।
दिल्ली पुलिस ने चेतावनी दी है कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
समर्थकों से शांत रहने की अपील
बढ़ते तनाव के बीच CJP ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की। पार्टी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि यदि कहीं रोका जाए तो कानून का सम्मान करें और आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखें।
नोएडा-दिल्ली सीमा पर लंबा ट्रैफिक जाम
सुरक्षा जांच और बैरिकेडिंग के कारण DND फ्लाईवे तथा नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिला। बड़ी संख्या में वाहन घंटों तक जाम में फंसे रहे। पुलिस ने यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी।
आगे क्या होगा?
सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के संकेत मिलने के बाद सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आंदोलन का कोई समाधान निकलता है या आने वाले दिनों में प्रदर्शन और तेज होगा। फिलहाल दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक कड़ी कर दी गई है और संसद परिसर के आसपास अतिरिक्त निगरानी जारी है।
NEET पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर शुरू हुआ CJP का आंदोलन अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में पहुंच चुका है। संसद मार्च, सुरक्षा व्यवस्था, सरकार के साथ संभावित बातचीत और धर्मेंद्र प्रधान-अमित शाह की मुलाकात ने इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच होने वाली बातचीत इस आंदोलन की दिशा तय कर सकती है।

