नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के “चलो संसद” मार्च के दौरान राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई। संसद की ओर कूच कर रहे प्रदर्शनकारियों के बीच CJP के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी तीन प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखीं। मुलाकात के बाद CJP ने दावा किया कि जेपी नड्डा ने मांगों को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने का आश्वासन देते हुए उन्हें “थोड़ा समय दीजिए” कहा।
इस बीच संसद मार्ग, जनपथ, रायसीना रोड और कनॉट प्लेस समेत मध्य दिल्ली के कई इलाकों में प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पहले ही कई इलाकों में धारा 163 लागू कर दी थी और बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी।
जेपी नड्डा के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं—
- सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
- आत्महत्या करने वाले सभी NEET अभ्यर्थियों के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि जेपी नड्डा ने इन मांगों को केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष रखने का भरोसा दिया और निर्णय के लिए कुछ समय मांगा।
संसद मार्च के दौरान बढ़ा तनाव
दिनभर प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया। पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की भी खबरें सामने आईं।
रायसीना रोड और संसद मार्ग पर सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। कई स्थानों पर हल्का बल प्रयोग भी किया गया। पुलिस ने हालात पर कड़ी नजर बनाए रखी और संसद भवन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी।
ट्रैफिक व्यवस्था हुई प्रभावित
प्रदर्शन के कारण सेंट्रल दिल्ली में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। कनॉट प्लेस, जनपथ, संसद मार्ग, पहाड़गंज और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास लंबा जाम देखने को मिला। हजारों वाहन घंटों तक फंसे रहे, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस लगातार वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह देती रही।

दीपके को लेकर स्थिति रही स्पष्ट नहीं
दिनभर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे। शुरुआती जानकारी में उन्हें हिरासत में लिए जाने की बात कही गई, लेकिन बाद में पार्टी प्रवक्ता सौरभ दास ने स्पष्ट किया कि अभिजीत दीपके को न तो गिरफ्तार किया गया और न ही हिरासत में लिया गया।
डिंपल यादव समेत कई नेताओं ने जताया समर्थन
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचकर समर्थन जताया। इससे प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन मिलने की चर्चा भी तेज हो गई।
क्या हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें?
CJP का कहना है कि उसका आंदोलन केवल एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। संगठन का दावा है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, युवाओं की बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहा है। इसी क्रम में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और अन्य मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है।
सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क
दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। संसद भवन, केंद्रीय सचिवालय, जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
संसद मार्च के बीच CJP प्रतिनिधिमंडल और जेपी नड्डा की मुलाकात ने आंदोलन को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार प्रतिनिधिमंडल की मांगों पर क्या निर्णय लेती है। दूसरी ओर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

