भारत में पहली बार डेंगू वैक्सीन को मिली मंजूरी, लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत
नई दिल्ली: डेंगू जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने देश की पहली डेंगू वैक्सीन QDENGA (TAK-003) को बाजार में उपयोग की मंजूरी दे दी है। यह पहली ऐसी वैक्सीन होगी जिसे 4 वर्ष से 60 वर्ष तक के लोग बिना यह जांच कराए कि उन्हें पहले डेंगू हुआ था या नहीं, लगवा सकेंगे।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस मंजूरी से देश में डेंगू की रोकथाम को नई दिशा मिलेगी। हर वर्ष लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं और बरसात के मौसम में इसके मामले तेजी से बढ़ जाते हैं।
दो डोज में मिलेगा सुरक्षा कवच
कंपनी के अनुसार QDENGA की कुल दो डोज दी जाएंगी।
- पहली डोज: 0.5 मिलीलीटर
- दूसरी डोज: पहली डोज के 3 महीने बाद
- वैक्सीन त्वचा के नीचे (Subcutaneous Injection) लगाई जाएगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वैक्सीन लगाने से पहले किसी व्यक्ति का यह टेस्ट नहीं किया जाएगा कि उसे पहले कभी डेंगू हुआ था या नहीं।
19 क्लीनिकल ट्रायल के बाद मिली मंजूरी
QDENGA को मंजूरी देने से पहले इसके फेज-1, फेज-2 और फेज-3 सहित कुल 19 क्लीनिकल ट्रायल किए गए।
इन परीक्षणों में 28 हजार से अधिक स्वयंसेवियों ने हिस्सा लिया। इन ट्रायल्स के आधार पर वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया, जिसके बाद DCGI ने इसके उपयोग की अनुमति प्रदान की।
भारत में ही बनेगी वैक्सीन
भारत के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि इस वैक्सीन का उत्पादन ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत देश में ही किया जाएगा।
जापान की वैश्विक बायोफार्मास्यूटिकल कंपनी Takeda ने हैदराबाद स्थित Biological E के साथ समझौता किया है। इससे वैक्सीन की सप्लाई तेज होगी और भविष्य में कीमत भी अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है।
हालांकि फिलहाल इसकी आधिकारिक कीमत घोषित नहीं की गई है।

लॉन्च के बाद भी होगी निगरानी
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वैक्सीन बाजार में आने के बाद शुरुआती 6 महीनों तक इसके प्रभाव और सुरक्षा की विशेष निगरानी की जाएगी।
यदि किसी प्रकार का दुष्प्रभाव सामने आता है तो संबंधित स्वास्थ्य एजेंसियां उसका विस्तृत अध्ययन करेंगी।
चारों प्रकार के डेंगू वायरस से सुरक्षा का दावा
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डेंगू वायरस के चारों सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4) एक साथ पाए जाते हैं।
Takeda का दावा है कि QDENGA को इन चारों प्रकार के वायरस से सुरक्षा देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बड़े स्तर पर सफल साबित होती है तो अस्पतालों में भर्ती होने वाले गंभीर डेंगू मरीजों की संख्या कम हो सकती है।
WHO भी कर चुका है सिफारिश
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही QDENGA को Prequalification प्रदान कर चुका है।
WHO का कहना है कि जिन क्षेत्रों में डेंगू का संक्रमण अधिक है, वहां इस वैक्सीन को बिना Pre-Vaccination Screening के सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।
WHO की मंजूरी मिलने के बाद UNICEF और PAHO जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी इस वैक्सीन की खरीद कर सकती हैं।
भारत पर है दुनिया के डेंगू मामलों का बड़ा बोझ
विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया में हर साल करोड़ों लोग डेंगू से संक्रमित होते हैं।
भारत उन देशों में शामिल है जहां डेंगू का सबसे अधिक प्रभाव देखा जाता है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलभराव, जलवायु परिवर्तन और मच्छरों के बढ़ते प्रजनन के कारण संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि वैक्सीन आने के बाद भी मच्छर नियंत्रण, साफ-सफाई, पानी जमा न होने देना और समय पर इलाज जैसी सावधानियां पहले की तरह जरूरी रहेंगी।
भारत में पहली डेंगू वैक्सीन QDENGA को मिली मंजूरी सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यह वैक्सीन डेंगू की रोकथाम की दिशा में नया विकल्प प्रदान करेगी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि टीकाकरण के साथ-साथ मच्छर नियंत्रण, स्वच्छता और जनजागरूकता जैसे उपाय भी समान रूप से आवश्यक रहेंगे। वैक्सीन की कीमत और बाजार में उपलब्धता की आधिकारिक घोषणा का अब लोगों को इंतजार रहेगा।

